नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) में सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा और ‘आप’ दोनों को निशाने पर लेते हुए इस नीति को गरीब और दलित विरोधी करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि निगम प्रशासन अस्थाई कर्मचारियों को पक्का करने के बजाय ‘ठेका प्रथा’ को बढ़ावा देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
“16349 कर्मचारियों को पक्का करने का वादा रहा अधूरा”
देवेन्द्र यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा कि 2022 के निगम चुनावों से पहले भाजपा ने 16349 सफाई कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि अब हर जोन में 50-50 कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किया जा रहा है, ताकि जेम (GeM) पोर्टल के जरिए अपने करीबी ठेकेदारों को लाभ पहुँचाया जा सके। यादव ने सवाल उठाया कि जब दिल्ली की सफाई व्यवस्था पहले से ही बदहाल है, तो सरकार स्थाई भर्ती से क्यों बच रही है?
12 साल से सीधी भर्ती ठप, जोखिम में कर्मचारियों की जान
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 12 वर्षों से नगर निगम में कोई सीधी भर्ती नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोना) पर रोक लगाए जाने के बावजूद, आज भी सफाई कर्मचारियों को मजबूरी में खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। सरकार की विफल नीतियों के कारण सफाई कर्मचारी अपने मूलभूत अधिकारों, पेंशन, भत्ते और मेडिकल सुविधाओं से वंचित हैं।
“यूनियनों के साथ मिलकर लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई”
देवेन्द्र यादव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से ठेका प्रणाली (Contract System) के विरोध में है और सफाई कर्मचारी संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी इन कर्मचारियों के नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतन की लड़ाई को सड़कों से लेकर सदन तक जारी रखेगी। कांग्रेस ने मांग की है कि संविदा पर भर्ती के बजाय उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए जो दशकों से अस्थाई रूप से निगम की सेवा कर रहे हैं।

