दिल्ली दर्पण ब्यूरो
हरियाणा के दमकल विभाग में गहरा असंतोष उबल रहा है। 16 फरवरी 2026 को फरीदाबाद के मुजेसर सेक्टर-24 स्थित कालकाजी स्टील कंपनी में लगी भीषण आग के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने वाले दो दमकल कर्मियों, भवी चंद शर्मा और रणवीर सिंह, के परिवारों को न्याय न मिलने से कर्मचारी संगठन आक्रोशित हैं। ‘हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन’ ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
क्या है भेदभाव का आरोप?
यूनियन का कहना है कि एक ही घटना में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की तुलना में दमकल कर्मियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। जहाँ पुलिसकर्मियों को ‘शहीद’ का दर्जा, एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाती है, वहीं दमकल कर्मियों को मात्र 30 लाख रुपये (सरकार द्वारा घोषित) की राशि दी जा रही है। यूनियन इसे बलिदान का अपमान मानते हुए पूरी तरह से अस्वीकार करती है।
सिस्टम का ‘कुचक्र’: एक विश्लेषणात्मक नजरिया
इस मामले की पड़ताल करने पर कुछ गंभीर मुद्दे सामने आते हैं जो सिस्टम की विफलता को दर्शाते हैं:
- आउटसोर्सिंग की मार: शहीद रणवीर सिंह ‘कौशल निगम’ के माध्यम से कार्यरत थे, जो स्पष्ट करता है कि सरकार सुरक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में भी स्थायी भर्ती के बजाय ‘कच्चे’ कर्मचारियों पर निर्भर है।
- आर्थिक शोषण का चक्र: 6-7 वर्षों से दमकल विभाग में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों के वेतन में एक रुपये की भी वृद्धि न होना, महंगाई के इस दौर में उनके परिवारों के लिए जीवन यापन को असंभव बना रहा है।
- बजटीय बनाम मानवीय दृष्टिकोण: सफीदों की घटना (7 मार्च 2026) में सरकार द्वारा त्वरित सहायता एक अच्छा कदम था, लेकिन फरीदाबाद के मामले में यह “बेरुखी” प्रशासनिक तंत्र की प्राथमिकता पर सवाल खड़े करती है।

यूनियन की प्रमुख मांगें
यूनियन ने निम्नलिखित मांगों को लेकर सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया है:
- शहीद का दर्जा: भवी चंद शर्मा और रणवीर सिंह को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ घोषित किया जाए।
- समान सम्मान राशि: पुलिसकर्मियों की तर्ज पर एक-एक करोड़ रुपये की सहायता दी जाए।
- आश्रितों को नौकरी: बिना शर्त स्थायी सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
- नियमितीकरण: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
आगामी आंदोलन की रूपरेखा
सरकार पर दबाव बनाने के लिए यूनियन ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है:
- 22 से 25 अप्रैल: प्रदेश के सभी 90 मंत्रियों और विधायकों को मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- 27 अप्रैल: प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर दमकल केंद्रों में क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
निष्कर्ष
दमकल कर्मचारी राज्य की आपातकालीन ‘रीढ़’ माने जाते हैं। यदि रक्षक ही अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकेंगे, तो यह प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस आंदोलन के उग्र होने से पहले सकारात्मक संवाद शुरू करती है या फिर दमकल कर्मियों को अपनी लड़ाई लंबी खींचनी पड़ेगी?

