Saturday, April 25, 2026
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यूट्यूब का ‘सितारा’ निकला 31 साल पुराना कातिल: अपहरण-हत्या केस में सजायाफ्ता भगोड़ा सलीम वास्तिक गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है जो पिछले 31 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था। सोशल मीडिया पर एक चर्चित यूट्यूबर के रूप में सक्रिय ‘सलीम वास्तिक’ असल में 1995 के एक सनसनीखेज अपहरण और हत्याकांड का दोषी निकला। खुद को मृत घोषित कर नाम और पहचान बदलकर रह रहे इस अपराधी को पुलिस ने फिंगरप्रिंट तकनीक की मदद से गाजियाबाद के लोनी इलाके से दबोच लिया।

क्या था 1995 का वह मामला?

यह खौफनाक वारदात 1995 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक नामी कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे, संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया था। आरोपी सलीम खान (जो अब सलीम वास्तिक के नाम से जाना जाता था) उस समय बच्चे के स्कूल में मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षक था। अपहरण के अगले ही दिन आरोपियों ने फिरौती की मांग की और बाद में मासूम की हत्या कर दी। जांच के दौरान सलीम खान का नाम सामने आया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। साल 1997 में कोर्ट ने उसे और उसके साथी अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मौत का नाटक और बदली पहचान

सजा पाने के बाद सलीम जेल में था, लेकिन साल 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलते ही वह फरार हो गया। इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने अपनी ‘मौत’ का नाटक रचा और खुद को मृत घोषित कर दिया। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपना नाम बदलकर ‘सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक’ रख लिया। इस दौरान वह यूपी और हरियाणा में छिपकर रहा और अंत में गाजियाबाद के लोनी इलाके में बस गया, जहां उसने कपड़ों का कारोबार शुरू किया और यूट्यूब पर वीडियो बनाने लगा।

फिंगरप्रिंट तकनीक ने खोली पोल

पुलिस ने कई सालों तक उसकी तलाश की, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। हालांकि, कानून के लंबे हाथ आखिरकार उस तक पहुँच ही गए। क्राइम ब्रांच की टीम ने पुराने रिकॉर्ड, फोटो और सबसे महत्वपूर्ण—फिंगरप्रिंट्स का मिलान किया। तकनीकी निगरानी और बारीकी से की गई जांच के बाद पुष्टि हुई कि जिसे लोग एक सम्मानित यूट्यूबर समझ रहे थे, वह दरअसल तीन दशक पुराना भगोड़ा अपराधी है। क्राइम ब्रांच की टीम ने लोनी में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कानून से कोई भी बच नहीं सकता। चाहे नाम बदल लिया जाए या पहचान मिटाने की कोशिश की जाए, न्याय की प्रक्रिया अंततः अपना काम करती ही है। फिलहाल पुलिस उससे इस दौरान उसके छिपे रहने और अन्य सहयोगियों के बारे में पूछताछ कर रही है।

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