नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों और विपक्ष के बीच चर्चाओं के दौर के बीच, आम आदमी पार्टी ने एक कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी का अस्तित्व किसी सांसद या बड़े नेता पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उन निस्वार्थ कार्यकर्ताओं की नींव पर टिकी है जिन्होंने बिना किसी पद की लालसा के अपना करियर, पढ़ाई और परिवार तक पार्टी को समर्पित कर दिया।
सौरभ भारद्वाज ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ‘सवालों’ से डरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उन विपक्षी दलों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है जो जनता से जुड़े कठिन और महत्वपूर्ण सवाल सत्ता के सामने रखते हैं। भारद्वाज का तर्क है कि ‘बड़े नेता’ जिनके पास गहरी जेबें हैं, वे शायद ईडी (ED) जैसी जांच एजेंसियों के डर से टूट सकते हैं या झुक सकते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी का समर्पित स्वयंसेवक (Volunteer) न तो डरेगा और न ही झुकेगा। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि भाजपा का यह कदम राजनीतिक दबाव की राजनीति को दर्शाता है।
आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दोहराया है कि उसका असली आधार उसके कार्यकर्ता हैं, न कि वे सांसद जो व्यक्तिगत लाभ के लिए विचारधारा बदल लेते हैं। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे भाजपा के इस डर और दबाव की राजनीति के आगे न झुकें। सौरभ भारद्वाज ने साफ कर दिया कि पार्टी का मुख्य एजेंडा सवाल पूछना और जनहित के मुद्दों को उठाना है, और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। वे चाहें या न चाहें, जनता के लिए आवाज उठाने का काम आम आदमी पार्टी बिना किसी बड़े नेता की परवाह किए करती रहेगी।
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