धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भोजशाला को राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है, जबकि परिसर में नमाज पर रोक लगा दी गई है।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन के अनुसार अदालत ने माना कि भोजशाला की मूल संरचना मंदिर के रूप में बनाई गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यह कमाल मौला मस्जिद नहीं है और यहां केवल पूजा-पाठ की अनुमति रहेगी।
इस फैसले के बाद देशभर में चल रहे अन्य धार्मिक स्थल विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। वाराणसी के ज्ञानवापी, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि, दिल्ली की कुतुब मीनार और लखनऊ के लक्ष्मण टीला समेत कई मामलों में कानूनी बहस तेज हो गई है।
ज्ञानवापी विवाद
वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में वजूखाने के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग पर सुनवाई जारी है। अदालत ने अगली सुनवाई जुलाई 2026 तक तय की है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह को लेकर विवाद लगातार अदालत में चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि ईदगाह मंदिर की जमीन पर बनाई गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है।
भोजशाला फैसले के बाद अब इन मामलों को लेकर देशभर में राजनीतिक और धार्मिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

