राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में, हुआ एक भयानक अग्निकांड जिसने हर किसी को हिलाकार रख दिया! आग इतनी भयंकर और विकराल रूप में थी की हर तरफ सिर्फ मोट थी लेकिन इसके बाद भी परिवार को बचाने की जिद्द लड़ गए मोत से! अब तक भीषण आग ने करीब 21 जिंदगियां छीन लीं, लेकिन इस हादसे से सामने आई एक ऐसी कहानी जिसने डॉक्टर दमकल और और आस पास के हर किसी की आखो को नम कर दिया है!
बताया रहा जा रहा है आग लगाने के बाद आग की लपटें तेजी से पूरी इमारत में फैल रही थीं। चारों तरफ धुआं ही धुआं था। चारो तरफ अफरा तफरी मच गई थी! इसी बीच जान बचाने की आखिरी उम्मीद में एक पति-पत्नी बाथरूम में जाकर छुप गए। उन्हें लगा कि शायद यह छोटा सा कमरा उन्हें मौत से बचा लेगा।
लेकिन आग का जहरीला धुआं धीरे-धीरे उस कमरे के पास के वाशरूम में भी भर गया। पर जब रेस्क्यू टीम वहां पहुंची तो जो मंजर सामने था, उसने अनुभवी दमकलकर्मियों को भी बेहद भावुक कर दिया। दोनों एक पति-पत्नी एक-दूसरे को गले लगाए हुए थे।
मौत उनकी सांसें छीन चुकी थी, लेकिन आखिरी पल तक उन्होंने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा था!
लेकिन मालवीय नगर अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उन सवालों की आग भी है जो सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर उठ रहे हैं। इस भीषण हादसे में 21 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए हैं। जांच एजेंसियां अब आग के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई कथित चूक की जांच कर रही हैं।
“आखिरी सांस तक नहीं छोड़ा एक-दूसरे का साथ!”
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, आग लगने के बाद एक दंपति खुद को बचाने के लिए बाथरूम में छिप गया। लेकिन धुएं और दम घुटने के कारण दोनों की मौत हो गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोनों के शव एक-दूसरे को गले लगाए हुए मिले।
इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोगों को बचाया गया। शुरुआती जांच में होटल और बिल्डिंग में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मौत सामने थी, लेकिन आखिरी पल तक दोनों ने एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा। हादसा जितना बड़ा था, लापरवाही उतनी ही भयानक थी। दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 यानी गैर-इरादतन हत्या के तहत केस दर्ज किया गया है। लेकिन पुलिस की जांच में जो सच सामने आया, वो होश उड़ा देने वाला है।
खुलासा हुआ है कि इस होटल के पास न तो फायर डिपार्टमेंट की NOC थी और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम। हैरानी की बात देखिए, प्रशासन से मंजूरी सिर्फ 6 कमरे चलाने की थी, लेकिन लालच में आकर बिल्डिंग के अंदर अवैध रूप से 25 कमरे बना दिए गए। संकरी सीढ़ियां और बंद पड़े इमरजेंसी रास्ते… मासूमों के लिए मौत का जाल बन गए।
21 मौतों के बाद अब दिल्ली का सरकारी सिस्टम जागा है। उपराज्यपाल के सख्त आदेश के बाद पूरी दिल्ली के होटलों, गेस्ट हाउसों और नर्सिंग होम की चेकिंग शुरू कर दी गई है। साफ निर्देश हैं- जो भी नियमों को तोड़ेगा, उस पर बुलडोजर भी चलेगा और जेल की सलाखें भी मिलेंगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर हर बार कार्रवाई के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जाता है?

