दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली के करोल बाग स्थित अंबेडकर बस्ती में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वंचित, श्रमिक और कमजोर वर्गों तक न्याय की सहज पहुँच सुनिश्चित करने और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक ‘मेगा न्याय परामर्श केंद्र’ का आयोजन किया गया. 27 अप्रैल 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में अधिवक्ता परिषद, दिल्ली (तीस हजारी इकाई) और सेवा भारती के संयुक्त तत्वावधान में कानून विशेषज्ञों ने स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद किया.
इन आयोजनों की अहमियत क्यों है?
समाज में ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये केवल परामर्श केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के माध्यम हैं। इन आयोजनों की प्रासंगिकता निम्नलिखित कारणों से है:
- न्याय की सुलभता: यह आयोजन उन लोगों तक पहुँच सुनिश्चित करता है जिन्हें अक्सर कानूनी पेचीदगियों और संसाधनों की कमी के कारण न्याय पाने में कठिनाई होती है.
- संवैधानिक जागरूकता: यह कार्यक्रम लोगों को उनके मौलिक अधिकारों, विधिक उपायों और संवैधानिक संरक्षण के प्रति सचेत करता है, जिससे वे अपने हक के लिए आवाज उठाने में सक्षम बनते हैं.
- सामाजिक लोकतंत्र का आधार: बंधुता, स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों को धरातल पर उतारकर यह आयोजन सामाजिक एकता और राष्ट्र की अखंडता को मजबूत करता है.
- भाईचारे का संदेश: स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों के माध्यम से यह कार्यक्रम समाज में समरसता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है, जो एक सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य है.

कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ. इसके पश्चात, उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया, जिसमें ‘बंधुता’ शब्द पर विशेष जोर दिया गया.
इस अवसर पर अधिवक्ता परिषद की ओर से अध्यक्ष अंजु शर्मा, सचिव आशीष कुमार शर्मा, श्रीमती अनु सिंह, श्री रुपिंदर पाल सिंह और सेवा भारती से श्री हिमांशु उपस्थित रहे. विशेषज्ञों की टीम ने उपस्थित लोगों को उनकी कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए निःशुल्क परामर्श प्रदान किया, जिससे समाज में कानून के प्रति विश्वास और उत्साह का संचार हुआ. कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने आश्वासन दिया कि समाज के हर व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए ऐसे प्रकल्पों का विस्तार भविष्य में भी जारी रहेगा.
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