अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर भारत पर दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों द्वारा एक सप्ताह में दो बार दाम बढ़ाने के बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 98 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। अगर यही हालात जारी रहे तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
भारत एक आयात-निर्भर देश है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पिछले कुछ महीनों में इसका असर भी देखने को मिला है।
जहां पहले आर्थिक वृद्धि दर के 7.6% रहने का अनुमान था, वहीं अब रिजर्व बैंक ने इसे घटाकर करीब 6.9% के आसपास रहने का अनुमान जताया है।
इसके साथ ही महंगाई दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नवंबर 2025 में जहां खुदरा महंगाई 0.7% थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 3.48% तक पहुंच गई है। इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा की जरूरतें और अधिक महंगी हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए चुनौती बन सकती हैं।

