Thursday, May 28, 2026
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“दिल्ली भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा के हाथ, ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार में गुटबाजी पर लगाम लगाना होगी सबसे बड़ी चुनौती”

पूजा नगर ,दिल्ली दर्पण ब्यूरो,

नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में 28 साल बाद ऐतिहासिक सत्ता वापसी करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन के स्तर पर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के निर्देश पर केंद्रीय राज्य मंत्री और पूर्वी दिल्ली से सांसद हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह वीरेंद्र सचदेवा की जगह कमान संभालेंगे।

दिल्ली में अब एमसीडी, राज्य सरकार और केंद्र तीनों ही स्तरों पर भाजपा की सरकार (ट्रिपल इंजन सरकार) है। ऐसे में हर्ष मल्होत्रा की नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब उनके सामने विपक्ष से लड़ने से ज्यादा, सत्ता में आई पार्टी के भीतर की आंतरिक गुटबाजी और खींचतान को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

जमीनी स्तर से केंद्रीय मंत्री और अब प्रदेश ‘कप्तान’ का सफर
62 वर्षीय हर्ष मल्होत्रा दिल्ली भाजपा के एक मंझे हुए संगठनात्मक चेहरा हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से शिक्षा प्राप्त और कानून के जानकार मल्होत्रा ने साल 2012 में नगर निगम चुनाव से अपने सफर की शुरुआत की थी। साल 2015 में वह पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) के मेयर रहे और बाद में प्रदेश भाजपा में महासचिव की भूमिका भी निभाई। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली से भारी मतों से जीत दर्ज करने के बाद उन्हें केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। अब पार्टी आलाकमान ने उन पर भरोसा जताते हुए दिल्ली संगठन की कमान भी सौंप दी है।

‘ट्रिपल इंजन’ सरकार में मल्होत्रा के सामने ‘कांटों का ताज’
भले ही भाजपा ने दिल्ली की सत्ता पर काबिज होकर इतिहास रच दिया हो, लेकिन हर्ष मल्होत्रा के लिए आगे की राह आसान नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार आने के बाद संगठन के भीतर जो चुनौतियां खड़ी हुई हैं, वे उनके लिए असली परीक्षा साबित होंगी:

  1. सत्ता के गलियारों में ‘मलाईदार’ पदों के लिए खींचतान
    अब जबकि दिल्ली में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बन चुकी है, संगठन के भीतर विभिन्न गुटों और धड़ों में महत्वपूर्ण मंत्रालयों, कमेटियों, निगम बोर्डों और राजनीतिक नियुक्तियों (Political Appointments) के लिए लॉबिंग तेज हो गई है। दिल्ली भाजपा के पारंपरिक पंजाबी-वैश्य धड़े और तेजी से उभरे पूर्वांचली धड़े के बीच संतुलन स्थापित करना मल्होत्रा के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी होगी।
  2. ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ कार्यकर्ताओं का असंतोष
    पार्टी के भीतर लंबे समय से दरी बिछाने वाले और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में यह डर रहता है कि सत्ता आते ही वीआईपी चेहरों या अन्य दलों से आए नेताओं को मलाईदार पद मिल सकते हैं। हर्ष मल्होत्रा खुद एक जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए पुराने कार्यकर्ताओं की उम्मीदें उनसे बहुत ज्यादा हैं।
  3. ‘जवाबदेही’ का दबाव: अब बहानेबाजी की गुंजाइश नहीं
    अब तक भाजपा दिल्ली के स्थानीय मुद्दों (जैसे जलभराव, टूटी सड़कें, प्रदूषण और सफाई) के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार पर ठीकरा फोड़ती आई है। लेकिन अब केंद्र, राज्य और एमसीडी तीनों जगह भाजपा है। जनता की उम्मीदें आसमान पर हैं। अगर आंतरिक गुटबाजी के कारण मंत्रियों, विधायकों और पार्षदों में आपसी तालमेल नहीं रहा और काम प्रभावित हुआ, तो जनता की नाराजगी सीधे ‘ट्रिपल इंजन’ पर भारी पड़ सकती है।
  4. बड़े नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को संभालना
    दिल्ली भाजपा में कई ऐसे कद्दावर चेहरे हैं जो खुद को शीर्ष पदों का दावेदार मानते रहे हैं। एक केंद्रीय मंत्री और सांसद होने के नाते हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली के इन तमाम सीनियर नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं (Political Ambitions) का सम्मान करते हुए सबको एक मंच पर साथ लेकर चलना होगा, ताकि सरकार और संगठन में कोई टकराव न दिखे। राजनीतिक गलियारों से: पार्टी सूत्रों का कहना है कि हर्ष मल्होत्रा को संगठन और निगम प्रशासन का लंबा अनुभव है, जिससे वह सरकार और संगठन के बीच एक बेहतर पुल का काम कर सकते हैं। हालांकि, सत्ता मिलने के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं में आने वाले ‘आत्मसंतोष’ को दूर रखना और अनुशासन का डंडा चलाना नए अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।

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