RSS का ढांचा कैसे काम करता है? पंजीकरण से लेकर फंडिंग तक पूरी प्रक्रिया समझिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक बार फिर पंजीकरण और फंडिंग को लेकर चर्चा में है। संगठन का कहना है कि यह कोई पारंपरिक रजिस्टर्ड संस्था नहीं, बल्कि एक “Body of Individuals” के रूप में काम करने वाला वैचारिक संगठन है।

📌 पंजीकरण का मुद्दा

RSS का कोई औपचारिक रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही इसका कोई केंद्रीय पैन कार्ड या बैंक खाता है। संगठन की स्थापना 1925 में हुई थी, और उस समय रजिस्ट्रेशन की बाध्यता नहीं थी। बाद में इसे कानूनी रूप से “Body of Individuals” माना गया।

📌 संगठन कैसे चलता है?

RSS का संचालन किसी एक मुख्यालय से नहीं होता। इसकी ताकत देशभर में फैली “शाखाएं” हैं, जो खुले मैदानों में स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जाती हैं। यहां प्रशिक्षण, अनुशासन और सामाजिक गतिविधियों पर फोकस होता है।

📌 फंडिंग सिस्टम

RSS की फंडिंग मुख्य रूप से “गुरु दक्षिणा” से आती है, जो हर साल गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वयंसेवकों द्वारा स्वेच्छा से दी जाती है। यह योगदान प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये से शुरू होता है।

📌 कानूनी स्थिति

आयकर विभाग और अदालतों में इस ढांचे को लेकर समय-समय पर सवाल उठे, लेकिन इसे “Body of Individuals” मानकर इसकी स्थिति स्पष्ट की गई।

👉 कुल मिलाकर RSS का मॉडल पारंपरिक संगठनों से अलग, एक वैचारिक और शाखा-आधारित नेटवर्क सिस्टम पर चलता है।

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