Monday, January 26, 2026
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कपास पर 50% टैरिफ न लगाने को लेकर अरविंद केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला

नई दिल्ली, 28 अगस्त — आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस बार उनका निशाना अमेरिका से आने वाले कपास (Cotton Import) पर लगने वाले शुल्क को लेकर है। केजरीवाल का कहना है कि सरकार को अमेरिकी कपास पर कम से कम 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना चाहिए था, लेकिन केंद्र ने ऐसा नहीं किया, जिसके कारण भारतीय किसानों और घरेलू उद्योग को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों की कमाई पर असर

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां हमेशा से बड़े उद्योगपतियों और विदेशी कंपनियों के पक्ष में रहती हैं। उनका कहना है कि अमेरिका से सस्ता कपास आयात करने की अनुमति देकर मोदी सरकार ने देश के कपास उत्पादक किसानों के हितों को अनदेखा कर दिया। “अगर आयातित कपास पर ऊंचा शुल्क लगाया जाता, तो भारतीय किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलता। लेकिन सरकार ने उल्टा रास्ता चुना और विदेशी कंपनियों को फायदा पहुँचाया,” केजरीवाल ने कहा।

उन्होंने आगे दावा किया कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के किसान कपास की अच्छी पैदावार कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से आने वाला सस्ता कपास उनके मेहनत की कीमत गिरा देता है। किसानों को उचित समर्थन मूल्य तो मिलता ही नहीं, ऊपर से बाज़ार में विदेशी कपास की भरमार से उनकी हालत और खराब हो जाती है।

घरेलू उद्योग पर भी पड़ रहा बोझ

केजरीवाल ने कहा कि केवल किसान ही नहीं, बल्कि कपड़ा उद्योग से जुड़े छोटे कारोबारी और बुनकर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि भारत का टेक्सटाइल उद्योग कपास पर आधारित है और यदि आयात सस्ता हो गया तो घरेलू उद्योग टिक नहीं पाएगा। “मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ की बात करती है लेकिन असलियत में वह नीतियां लागू करती है जो ‘इम्पोर्ट इन इंडिया’ को बढ़ावा देती हैं,” उन्होंने तंज कसा।

मोदी सरकार पर विशेष आरोप

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार हर आर्थिक निर्णय विदेशी दबाव और चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लेती है। उनका कहना था कि अगर सही मायने में देशहित और किसानों के हित की चिंता होती, तो कपास पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से सरकार पीछे नहीं हटती।

केजरीवाल ने कहा, “हमारे किसान देश की रीढ़ हैं। उनकी उपज ही हमारे उद्योगों और रोज़गार का आधार है। लेकिन जब किसानों की फसल के दाम गिर रहे हैं, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं, तब केंद्र सरकार अमेरिका को खुश करने में लगी है। यह सीधा-सीधा अन्याय है।”

विपक्ष का समर्थन

AAP नेता के इस बयान को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी कहा है कि मोदी सरकार को कपास और अन्य कृषि उत्पादों पर विदेशी आयात को रोकने के लिए सख्त टैरिफ नीतियां बनानी चाहिए। उनका मानना है कि WTO (विश्व व्यापार संगठन) की शर्तों का हवाला देकर भारतीय किसानों का नुकसान करना उचित नहीं है।

किसानों की मांग

कई किसान संगठनों ने पहले भी मांग की थी कि कपास पर ऊंचा टैरिफ लगाया जाए ताकि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिले। उनका कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में से एक है, फिर भी किसान कर्ज़ के बोझ तले दबे रहते हैं। ऐसे में अगर सरकार सही नीति बनाए तो किसानों को राहत मिल सकती है और भारत का टेक्सटाइल उद्योग भी और मजबूत होगा।

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