Friday, March 6, 2026
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बीजेपी नेता के बयान पर सियासी घमासान, ‘हिंदी सीखो’ टिप्पणी के बाद दी सफाई

नई दिल्ली:
देश की राजधानी दिल्ली में एक बीजेपी पार्षद द्वारा अफ्रीकी मूल के एक नागरिक को हिंदी सीखने की चेतावनी देने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पटपड़गंज वार्ड संख्या 197 से बीजेपी पार्षद रेनू चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक विदेशी फुटबॉल कोच को एक महीने के भीतर हिंदी सीखने का अल्टीमेटम देती नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में रेनू चौधरी सार्वजनिक पार्क में मौजूद अफ्रीकी नागरिक से पूछती दिख रही हैं कि उसने अब तक हिंदी क्यों नहीं सीखी। वीडियो में वह कहती हैं, “अगर एक महीने के अंदर तुमने हिंदी नहीं सीखी, तो तुम्हें इस पार्क में घुसने नहीं दिया जाएगा।”
मौके पर मौजूद लोगों द्वारा इसे मज़ाक समझकर हंसने पर पार्षद ने कड़े लहजे में कहा कि वह पूरी तरह गंभीर हैं और आठ महीने पहले भी इस संबंध में चेतावनी दे चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारत में रहकर पैसा कमा रहा है, तो उसे देश की भाषा आनी चाहिए।

बताया जा रहा है कि संबंधित अफ्रीकी नागरिक पिछले करीब 15 वर्षों से भारत में रह रहा है और बच्चों को फुटबॉल की कोचिंग देता है।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूज़र्स ने बयान को अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया, जिसके बाद मामला और गर्मा गया।

पार्षद रेनू चौधरी ने दी सफाई

विवाद बढ़ने पर रेनू चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को धमकाना नहीं था, बल्कि भाषा के कारण होने वाली संवाद की समस्या को दूर करना था। पार्षद के अनुसार, पार्क की देखरेख करने वाले नगर निगम (MCD) के कर्मचारी अंग्रेजी नहीं समझते, जिससे कोच के साथ समन्वय में परेशानी आती है।

उन्होंने दावा किया कि यह एक सार्वजनिक पार्क है, जहां संबंधित कोच बच्चों से फीस लेकर फुटबॉल सिखाते हैं। आठ महीने पहले उनसे नगर निगम को राजस्व देने को कहा गया था, लेकिन भाषा न समझ पाने का हवाला देकर मामला टाल दिया गया।

ट्यूटर दिलाने की पेशकश का दावा

रेनू चौधरी ने यह भी कहा कि उन्होंने कोच को बेसिक हिंदी सिखाने के लिए ट्यूटर दिलाने की पेशकश की थी और उसका खर्च खुद उठाने की बात भी कही थी, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

“देश की भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं”

अपने बयान का बचाव करते हुए पार्षद ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत कहा है। हमारे देश में ज्यादातर लोग हिंदी बोलते हैं, इसलिए अगर कोई विदेशी यहां रह रहा है तो भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं है।”

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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