Saturday, February 14, 2026
spot_img
Homeदिल्लीदिल्ली में फ्लाईओवर देरी मामला: ACB की कार्रवाई, गड़बड़ घोटाले का खुलासा

दिल्ली में फ्लाईओवर देरी मामला: ACB की कार्रवाई, गड़बड़ घोटाले का खुलासा

Delhi Flyover Scam: बारापुला फ्लाईओवर फेज-3 में देरी पर ACB की कार्रवाई, अज्ञात अधिकारियों और ठेकेदार पर FIR

देश की राजधानी दिल्ली में फ्लाईओवर निर्माण में देरी और लागत बढ़ोतरी को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने बारापुला फ्लाईओवर फेज-3 के निर्माण में असामान्य देरी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में FIR दर्ज की है। यह FIR अज्ञात सरकारी अधिकारियों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ दर्ज की गई है।

ACB ने प्रारंभिक जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 के तहत मामला दर्ज किया है। इस आर्टिकल में जानिए पूरा मामला और जांच में अब तक क्या सामने आया है।

LG के निर्देश पर शुरू हुई जांच

जांच में सामने आया है कि फ्लाईओवर परियोजना में अनुचित और असामान्य देरी हुई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले की जांच के आदेश दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने अक्टूबर 2025 में दिए थे।

ACB ने परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है और निर्माण में हुई देरी के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

PWD को सौंपने होंगे सभी रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर LG ने इस मामले का संज्ञान लिया था। 28 जुलाई 2025 को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

EFC ने गैर-सक्षम अधिकारियों द्वारा मध्यस्थता स्वीकार किए जाने और परियोजना में देरी को लेकर विस्तृत जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) को ACB को सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश दिए गए।

2011 में मिली थी परियोजना को मंजूरी

बारापुला फ्लाईओवर फेज-3 परियोजना के तहत लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा, चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाना है, जो सराय काले खां में मौजूदा बारापुला फ्लाईओवर से जुड़ेगा।

इस परियोजना को वर्ष 2011 में मंजूरी मिली थी। दिसंबर 2014 में इसके लिए 1,260.63 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। अप्रैल 2015 में निर्माण कार्य का ठेका L&T को दिया गया और परियोजना को अक्तूबर 2017 तक पूरा किया जाना था।

देरी और बढ़ी लागत पर उठे सवाल

परियोजना तय समय पर पूरी नहीं हो सकी। अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण, पेड़ कटाई की अनुमति में देरी और विभागीय लापरवाही के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।

अब इस परियोजना के जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब तक इस पर 1,238.68 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि इसकी नई अनुमानित लागत 1,330 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

ACB का कहना है कि जांच के दौरान अगर किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला दिल्ली में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/mcd-action-drug-mafaya-alak-avadh-samrajya-on-chal-baldjar-parvar-par-57-kas/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments