Thursday, May 7, 2026
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टिकैत और दर्शनपाल समेत 40 किसान नेताओं पर एफआइआर

काव्या बजाज,संवाददाता

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने राकेश टिकैत, दर्शन पाल और योगेंद्र यादव समेत 40 किसान नेताओं पर शिकंजा कसते हुए एफआइआर दर्ज किया है। एफआइआर में उनपर रैली में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही कोरोना के नियमों का उल्लंघन का आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक किसानों को ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्ण ढंग से निकालने के लिए रूट तय किए गए थे और उसका समय निर्धारित था। बावजूद इसके परेड आक्रामक रैली में तब्दील हो गई और उसने पुलिस के सारे नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते हुए हिंसा का रूप ले लिया था। रैली के दौरान नजारा कुछ और ही देखने को मिला। इस रैली में आंदोलनकारी किसान सरकारी संपत्ति के साथ तलवारें, लाठियां और डंडे से पुलिसकर्मियों पर वार करते रहे और पुलिस ने किसी तरह से अपना बचाव किया। आंदोलनकारियों के आक्रामक रवैये से  करीब 300 पुलिसकर्मी घायल हो गए है। जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाया गया।  मानहानि के मामले की वजह से भी 35 एफआइआर दर्ज की गई है।


दिल्ली पुलिस ने आइपीसी की धारा-395 (डकैती), 397 (डकैती, या डकैती, मौत या शिकायत पर चोट पहुंचाने की कोशिश), 120 इ (आपराधिक साजिश की सजा) और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने कहा है कि जांच के लिए एसआइटी गठित की जाएगी। दिल्ली दंगे की तरह किसान आंदोलन में हुए उपद्रव की भी जांच होगी। पुलिस सभी उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।


उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में ऐसे हालात देखने को मिलेंगे ऐसा शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा।  जितनी शांतिपूर्वक रैली की बात कही जा रही थी वह उतना ही उग्र था। इसे लेकर अधिकतर लोगों जहां देश को शर्मसार करने वाला कह, वहीं लोगों ने भारत पर हमला तक कह डाला।


दिल्ली के नांगलोई थाने में दर्ज किए गए एफआईआर में  न सिर्फ डकैती की धारा लगाई गई है, बल्कि उन 40 किसान नेताओं के नाम भी एफआईआर में शामिल हैं जो सरकार के साथ वार्ता के लिए विज्ञान भवन जाते थे। इसी एफआईआर में योगेंद्र यादव का भी नाम है। इस मामले में 30 और एफआइआर दर्ज होने की बात कही जा रही है। उपद्रवियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में किसान नेता राकेश टिकैत, बलजीत सिंह रजवाल, दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बूटा सिंह बुर्जगिल,  जोगिंदर उमराह, योगेंद्र यादव, गौतम सिंह चढूनी, सरवन सिंह पंधेर और सतनाम पन्नू समेत कई लोगों के नाम प्रमुख रुप से शामिल हैं। इन सभी किसान नेताओं पर ट्रैक्टर परेड के लिए तय किए गए नियम व शर्तों के उल्लंघन का आरोप है।


पूर्वी दिल्ली ट्रैक्टर परेड के दौरान हुए उपद्रव में गाजीपुर थाने में तीन और पांडव नगर में एक एफआईआर दर्ज हुई है। गाजीपुर थाने में जिन उपद्रवियों के खिलाफ केस दर्ज हुई है, उनमें किसान नेता राकेश टिकैत का नाम भी शामिल हैं। राकेश टिकैत के खिलाफ हत्या का प्रयास, दंगा, पुलिस पर हमला, सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित अन्य धाराएं लगाई गई है। किसानों के ट्रैक्टर परेड की आड़ में दिल्ली में उपद्रव करने के मामले  उपद्रव के दौरान 300 पुलिस कर्मी घायल हुए थे।

अब तक इस मामले में पुलिस 200 लोगो को हिरासत में ले चुकी है। ये वो हैं जो उपद्रव के दौरान घायल हुए थे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए थे। पुलिस इन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लेगी। किसी उपद्रव को रोकने के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है।  सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। जहां पर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा लाल किला पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यहां पर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

इतिहास में दर्ज हुआ देश के लिए काला दिवस

खुशबू काबरा, संवाददाता

नई दिल्ली।। एक तरफ जहां देश अपना 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तो वहीं दूसरी तरफ देश के अन्नदाता सड़को पर उतर आए। किसानों ने ऐसा उत्पाद मचाया जिसको दिल्ली हीं नहीं बल्कि पूरा देश देखता रह गया। आईए देखते हैं किसान रैली की छोटी सी झलक।

किसानों ने देश का झंड़ा लगा रखा था और दूसरी तरफ वह किसान संगठनों का झंड़ा लगाकर लगातार प्रर्दशन कर रहे थे। ऐसे में 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को लेकर किसान लगातार अपनी ज़िद पर अड़े हुए थे और इसी बीच पेच लगातार बना हुआ था जानकारी के मुताबिक ऐसा देखा जा रहा था कि ट्रैक्टर परेड में शामिल हुए किसानों के पास ना केवल अपनी मांगो को लेकर प्रर्दशन करने का मौका मिल रहा था बल्कि अपनी अमीरी का प्रदर्शन करने को मिल रहा था ऐसे में ये समझना काफी मुश्किल है कि किसान अपना प्रर्दशन मांगो को लेकर कर रहे थे या वह अपनी अमीरी का दिखावा कर रहे थे। कहीं मोडिफाई ट्रैक्टर तो कहीं मर्सिडीज कार। लेवल ये ही नहीं अगर आप ट्रैक्टरों के डिजाइन को देखेगें तो काप हक्का-बक्का रह जाएंगे। ट्रैक्टरों का रुप इस हद तक बदल डाला था कि उनपे बारिश होने का भी कोई असर नहीं पड़ेगा। इतना ही नहीं जब पुलिस वाटर कैनन का इस्तेमाल करेगी तो वह भी बेअसर साबित हो जाएगा।

ऐसा ही नजरीया हमें बहादुरगढ़ से सटे टीकरी बॉर्डर पर देखने को मिला जानकारी के मुताबिक आपको बता दें कि वहा मौजूद एक मोडिफाई ट्रैक्टर चर्चा का विषय बन चुका था। कहा जा रहा था कि इस ट्रैक्टर को मोडिफाई करने के लिए करीब 35 लाख रुपये की लागत आई है। यह ट्रैक्टर सुनील गुलिया का है। महिंद्रा के इस ट्रैक्टर में आगे और पीछे दोनों तरफ बड़े-बड़े दो पहिए लगाए गए हैं। ऐसा लगता है मानो यह ट्रैक्टर नहीं, बल्कि कोई रोड रोलर हो। ट्रैक्टर के पीछे लगी ट्रॉली भी उतनी ही आकर्षक है। ट्रॉली में बैठने के लिए आरामदायक सोफे बनाए गए हैं। ट्रैक्टर में गीत-संगीत का भी भरपूर इंतजाम है। इस ट्रैक्टर के इर्दगिर्द आने वाले लोग आंदोलन को भूल कर इसे निहारने लगे।

बताया जा रहा है कि एक ओर किसान कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन ट्रैक्टरों से यह कहीं नहीं लगता है कि ये किसान किसी भी तरह से कमजोर हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल आंदोलनकारी किसानों के बीच भी उठ रहा है कि क्या गरीब किसान इन बड़े किसानों के हाथों की कठपुतली तो नहीं बन रहे हैं।

वहीं, कुछ आंदोलनकारी किसान अमीरी के इस प्रदर्शन को सही नहीं ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से आंदोलन पर गलत असर पड़ रहा है। वहीं, इन ट्रैक्टरों को देखकर स्थानीय लोग भी अब यह कहने लगे हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में यहां अमीरी का प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसे में अंदाजा लगा सकते है कि ये सच्ची में आंदोलन कारी किसान हैं या उनके भेष में कोई और हैं।

राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर उच्च न्यायालय में याचिका

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज की जगह किसानों का झंडा लगाने से देशभर में बवाल मच गया है। जहां देश के लगों में इस घटना के खिलाफ रोष की भावना है। तो वही दूसरी तरफ इस मामले पर उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज कर दी गई है।

वकील विशाल तिवारी ने याचिका दर्ज कर मांग की है कि जिसने भी लाल किले पर झंडा लगाया है उसकी पहचान कर सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। ताकी आगे चल कर कोई भी व्यक्ति इस तरह से देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने से पहले सौ बार विचार करे। इसके साथ – साथ उन्होंने मांग की है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन के नाम पर किसानों ने जो हरकत करी है उसपर सरकार और कोर्ट दोनों ही जल्द से जल्द कोई कदम उठाएं और सभी दोषियों को सज़ा दें।

देश में जहां सभी लोग किसानों को हिंसा का दोषी मान रहे है तो वहीं एमएल शर्मा ने भी उच्च न्यायालय में एक याचिका दर्ज की है। लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की जगह वह प्रदर्शनकारियों के पक्ष में खड़े दिख रहें हैं। उनका कहना है कि कई लोग आंदोलनकारी किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है। जिसके साथ – साथ उन्होंने केंद्र सरकार और एक न्यूज़ चैनल पर आरोप लगाया। उनका कहना है कि किसानों के पास कोई हथियार नहीं थे तो 26 जनवरी को प्रदर्शनकारियों के पास हथियार कैसे आ गए। उन्होंने पुलिस और सरकार पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की है।

अन्नदाता के भेष में आतंकियों ने मचाया उत्पाद

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। जिस दिन भारत आपना 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा उस दिन किसान रैली के चलते एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली हंगामें की मिसाल बन गई। किसान रैली की वजह से राजधानी में कई जगह हंगामें हुए। जिसमें किसानों के साथ – साथ दिल्ली पुलिस की भी जान पर बन आई थी।

रैली में किसानों के लिए एक जगह तैय की गई थी। और इस निर्धारित जगह पर ही किसानों को रैली की अनुमति दी गई थी। लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए किसान दिल्ली की सीमाओं से अंदर आ गए जिसके चलते दंगों ने राजधानी को कई तरह से नुकसान पहुँचाया। सिर्फ यही नहीं प्रदर्शनकारी देश के राष्ट्र ध्वज का अपमान करने भी नहीं चूकें।

भारत के इतिहास में शायद ही ऐसा हुआ है कि प्रदर्शन की आड़ में किसी ने तिरंगे का अपमान किया है। देश और तिरंगे के अपमान के बाद भी प्रदर्शनकारी राजनीति करने से नहीं चूकें। उनका कहना है कि रैली में तिरंगे का अपमान करने वाला और कोई नहीं बल्कि भाजपा का कार्यकर्ता है।

ईन दंगों की वजह से आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी घबरा रहे थे। उनको डर था कि कहीं वह भी इस हिंसा का शिकार ना हो जाएं। रैली के चलते राजधानी में इंटरनेट सेवा भी स्तघित कर दी गई थी।

जब हमने इस पर लोगों से राय लेने की कोशिश की तो उनका कहना था कि गणतंत्र दिवस के दिन ऐसी घटना दिल्ली ही नहीं पूरे देश के लिए अपमान की बात है। राष्ट्र ध्वज का अपमान करने का हक किसी को नहीं है और ना भविष्य में कभी होगा। और ऐसा करने वालों को डूब के मर जाना चाहिए।

दंगो में दिल्ली पुलिस के कई लोग घायल भी हो गए थे। जिसपर कई लोगों का मानना है दंगे करने वाले देश के अन्न दाता हो ही नहीं सकते। उनका कहना है कि किसानों के भेष यह खालिस्तानी आतंकी है। जिन्होंने रैली की आड़ में दंगों को अंजाम दिया। और इन पर सरकार को जल्द ही सख्त से सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।

गणतंत्र दिवस, किसान, झंडा और यह नई कहानी

अंशुल त्यागी, संवाददाता

नई दिल्ली। मेट्रो में चर्चा हो रही थी कुछ व्यक्ति की जो बात कर रहे थे कि दुष्टों ने 26 जनवरी को जो किया वो सही नहीं था, कुछ 56 इंच को गलत बता रहे थे, कुछ आम आदमी को तो कुछ खाकी की खामिया गिना रहे थे पर एक कहानी जिससे पूरा देश जुड़ा उसे आपको सुनाते हैं।

कई बरस पहले जब शंहशाह ने उस किले को बनाया तो कभई सोचा नहीं होगा कि जिस देश में वो रहते हैं उसके अलावा किसी और का प्रतिबिंब भी उनके किले पर नजर आएग। लेकिन देश के इतिहास से चले आ रहे सबसे बड़े दिन ऐसा हुआ, जिस दिन संविधान को लिखने पर गर्व महसूस होना था उसी दिन संविधान को तार-तार करने की कबायद करते कुछठ दुष्ट उस किले को भेद गए, जिस किले में घुसने से पहले सेना से भिड़ना पड़ता था, जिस किले में घुसने के लिए एक आम आदमी 10 बार सोचता था, जिस किले को देश के लोग लाल किला कहते हैं।

5 रुपये के नोट पर 2 छोटे और 2 बड़े पहियों के साथ देश की जमीन को उपजाऊ बनाने वाले ट्रैक्ट्रर ने जब सड़क पर रफ्तार भरी तो उपजाऊ भूमि को बंजर बना दिया, हरे भरी राजधानी को काला बना दिया और किले के लाल रंग पर पीला निशान लगा दिया।

आइये अब कहीन पर आतें हैं..

ये उन दुष्टों की कहानी है, ये उन बुद्धीहीनों की कहानी है, ये उन चरित्रहिनों की कहानी है कहते हैं कुछ मान्यताएं, कुछ मुग़ालते बनी रहें तो ठीक ही होता है, क्योंकि भ्रम टूटता है तो दर्द बहुत होता है, हम किसान को किसान समझ रहे थे और देश को देश परंतु ऐसा लगता है कि हम गलत थे।

कुछ तस्वीरों से रुबरू करवाते हैं आपको, ये देखिए 50 साल में बिना किसी अतिथी के हुई बेहतरीन परेड की तस्वीर, इतिहास में पहली बार देश की पहली महिला फाइटर पायलेट की परेड में शामिल होने की तस्वीर, पहली बार बांग्लादेश के 122 जवानों के परेड मार्च की तस्वीर, पहली बार परेड़ में राफेल की गड़गड़ाहट की तस्वीर, सालों के इंतजार के बाद परेड में निकली राम मंदिर को भगवान वाल्मिकी की तस्वीर, तिरंगे पर बैठे मोर की तस्वीर,

ये तस्वीरें जिन्होनें भारत का सर गर्व से उठा दिया और अब वो तस्वीरें जिन्होनें देश को शर्म से झुका दिया। किसान का बेटा हुं, सैनिक होने की कीमत चुका रहा हुं, संविधान की सौंगध ली है, वर्दी में हुं इसलिए दुष्टों की मार खा रहा हुं।

पुलिस वालों के लालकिले से नीचे गिरने की तस्वीर, बिजनौर से फायर कर ट्रैक्टर रैली निकालने की तस्वीर, लाल किले पर चढ़े निशान लगाने वाले की तस्वीर…ट्रैक्टर पर सैंकड़ों किसाने के बैठे और हुड़दंग करने की तस्वीर।

ट्रैक्टर पलटकर जिंदगी गवां देने की तस्वीर, ट्रैक्टर से खेल करने की तस्वीर, पुलिसवालों को इंसान न समझने की तस्वीर, सड़क पर ट्रैक्टर को रफाल समझने की तस्वीर, पुलिस के पड़ते डंडो की तस्वीर, पुलिस के बैरिकेड तोड़ने की तस्वीर, पुलिस को धमकाने की तस्वीर, सड़क पर भीड़तंत्र की तस्वीर, महिला पुलिस पर डंडे बरसाने की तस्वीर, हथियारों वाले किसानों की तस्वीर, झुंड में आते देश पर दाग लगाने वालों की तस्वीर, देश के स्तम्ब पर कब्जा कर लेने की तस्वीर, धर्म के देश पर हावी हो जाने की तस्वीर, नेता की अपने लोगों को भड़काने की तस्वीर।

इतिहास में पहली बार गणतंत्र, लोकतंत्र और भीड़तंत्र का एक साथ होना और पहली बार इतने पावन दिन को काले दिवस के रूप में मनाया किसी का अपान करना और करवाना ये परेशान कर रहा है और आगे भी परेशान करता रहेगा. किताबों में पढ़ेगें इस काले इतिहास को तो बच्चों का दिल भी दुखेगा और याद करेंगे जब इन यादों को तो आंखे हमारी भी नम होंगी।