इटली में एक 12 वर्षीय बच्ची की आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बच्ची के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर लगातार दिखाए जा रहे आत्म-नुकसान और अवसाद से जुड़े कंटेंट ने उनकी बेटी को मानसिक रूप से प्रभावित किया, जिसके चलते उसने अपनी जान दे दी।
मामला इटली की रहने वाली 12 वर्षीय रोसेला रोजेरो उगुएस से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, पिछले कुछ समय से उसके व्यवहार में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा था। बाद में जांच करने पर पता चला कि वह सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में डिप्रेशन और सेल्फ-हार्म से जुड़ा कंटेंट देख रही थी।
फेक अकाउंट से करती थी सोशल मीडिया का इस्तेमाल
बेटी की मौत के बाद जब परिवार ने उसका मोबाइल और लैपटॉप खंगाला, तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। रोसेला ने सोशल मीडिया पर एक फेक अकाउंट बनाया हुआ था, जिसके जरिए वह मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-नुकसान से जुड़े कंटेंट लगातार देख रही थी।
एल्गोरिदम पर उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम ने बच्ची को बार-बार इसी तरह का कंटेंट दिखाया, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और बिगड़ती चली गई। इस मामले ने बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद माता-पिता ने संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर निगरानी, सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील कंटेंट पर कड़ी मॉनिटरिंग की आवश्यकता है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला दुनिया भर में बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।