RAU’s IAS हादसा: CBI की क्लोजर रिपोर्ट, वरिष्ठ MCD अधिकारियों के खिलाफ नहीं मिले आपराधिक लापरवाही के सबूत
दिल्ली दर्पण ब्यूरो | नई दिल्ली | 13 जुलाई 2026
राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित RAU’s IAS स्टडी सर्कल के बेसमेंट में पानी भरने से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत के चर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में अपनी सप्लीमेंट्री क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। जांच एजेंसी ने कहा है कि विस्तृत जांच के बावजूद ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे नगर निगम (MCD) के वरिष्ठ अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही या पद के दुरुपयोग को साबित किया जा सके।
क्या कहा CBI ने?
जाँच में CBI के अनुसार, मामले की जांच के दौरान MCD के रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट, निर्माण संबंधी दस्तावेज, जलभराव से जुड़े तकनीकी पहलुओं और कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी तथ्यों की जांच के बाद एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने योग्य पर्याप्त कानूनी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत में उनके संबंध में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
दर्दनाक हादसा 27 जुलाई 2024 को हुआ था
यह हादसा 27 जुलाई 2024 को उस समय हुआ था, जब भारी बारिश के दौरान RAU’s IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में अचानक पानी भर गया। इस दुर्घटना में तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की जान चली गई।
मृतकों में शामिल थे—
- श्रेया यादव (25) – उत्तर प्रदेश
- तान्या सोनी (25) – तेलंगाना
- नेविन डेल्विन (24) – केरल
घटना के बाद पूरे देश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, बेसमेंट के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई थी।
हाई कोर्ट ने CBI को सौंपी थी जांच
हादसे के बाद छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच दिल्ली पुलिस से लेकर CBI को सौंप दी थी। अदालत ने एजेंसी को यह पता लगाने के निर्देश दिए थे कि क्या किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही, भ्रष्टाचार या कर्तव्य में चूक इस हादसे के लिए जिम्मेदार थी।
रिपोर्ट का क्या मतलब है?
CBI की क्लोजर रिपोर्ट का अर्थ यह नहीं है कि हादसे की जिम्मेदारी समाप्त हो गई है। एजेंसी ने केवल इतना कहा है कि वरिष्ठ MCD अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
कानून के अनुसार किसी भी सरकारी अधिकारी पर केवल आशंका या आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए ठोस दस्तावेजी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों का होना आवश्यक है।
अब अदालत करेगी अंतिम फैसला
मामले में अंतिम निर्णय अब अदालत के हाथ में है। न्यायालय CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर सकता है, उसे खारिज कर सकता है या जरूरत पड़ने पर आगे की जांच के आदेश भी दे सकता है।
हादसे के बाद बदले थे कई नियम
इस दर्दनाक घटना के बाद दिल्ली में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाया गया। कई संस्थानों के बेसमेंट सील किए गए, फायर सेफ्टी और भवन निर्माण नियमों की समीक्षा हुई तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को नोटिस जारी किए गए। प्रशासन ने अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की।