Monday, February 16, 2026
spot_img
Homedelhi crime newsस्पा की आड़ में चल रहा था सेक्स रैकेट, ‘Say Help’ ऐप...

स्पा की आड़ में चल रहा था सेक्स रैकेट, ‘Say Help’ ऐप से मिला सुराग — पुलिस ने छुड़ाई 6 महिलाएं

दिल्ली के एक पॉश इलाके में, जहां लोग सुकून की तलाश में स्‍पा सेंटर आते थे, वहां अंदर कुछ और ही कहानी चल रही थी — दर्द, डर और जबरन बंधी हुई ज़िंदगियों की।
पुलिस को जब ‘Say Help’ ऐप के ज़रिए एक अलर्ट मिला, तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि उस छोटे-से नोटिफिकेशन के पीछे छह औरतों की टूटी हुई पुकारें छुपी होंगी।

एक अलर्ट जिसने सब बदल दिया

‘Say Help’ ऐप पर आई उस गुमनाम शिकायत में बस इतना लिखा था यहां कुछ लड़कियों को जबरन काम करवाया जा रहा है, कृपया मदद करें।” पुलिस ने बिना वक्त गँवाए तुरंत जांच शुरू की। टीम ने लोकेशन ट्रेस की और फिर बिना किसी हो-हल्ले के वहां छापा मारा।
जो नज़ारा सामने था, उसने हर किसी को झकझोर दिया।

स्‍पा सेंटर नहीं, एक कैदखाना था

बाहर से सब कुछ बेहद खूबसूरत दिख रहा था — दीवारों पर सुगंधित मोमबत्तियाँ, हल्की म्यूज़िक, और रिसेप्शन पर मुस्कुराती तस्वीरें।
लेकिन अंदर… अंदर वो सब था जो इंसानियत के लिए शर्म की बात है।

कमरों के अंदर कई महिलाएं थीं — कुछ डरी हुई, कुछ रोती हुई, और कुछ ऐसी जिनके चेहरे पर अब कोई भाव ही नहीं बचा था।
उन्हें बताया गया था कि वे यहां “जॉब” करने आई हैं, पर धीरे-धीरे उन्हें पता चला कि ये जॉब नहीं, एक जाल है — ऐसा जाल जिसमें से निकलना नामुमकिन था।

छह महिलाओं की आज़ादी की सुबह

पुलिस ने तुरंत सभी कमरों की तलाशी ली और छह महिलाओं को वहां से मुक्त कराया।
किसी ने चुपचाप सिर झुका लिया, किसी की आँखों से बस आँसू बह निकले।
उनमें से कुछ महिलाएं दूसरे राज्यों से थीं, जिन्हें नौकरी और अच्छे जीवन के सपनों में फँसाया गया था।

पुलिस ने स्‍पा के मालिक और मैनेजर को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था — रोज़ाना हजारों रुपये का धंधा, और बदले में इन लड़कियों की टूटी हुई अस्मिता।

‘Say Help’ ऐप बना मसीहा

इस पूरी घटना में जो चीज़ सबसे ज़्यादा उम्मीद देती है, वो है ‘Say Help’ ऐप
यह वही ऐप है जिसने वो आवाज़ उठाई, जो इन महिलाओं की जुबान पर नहीं आ सकती थी।
एक गुमनाम मैसेज ने छह ज़िंदगियों को नर्क से बाहर निकाला — ये साबित करता है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ सुविधाओं के लिए नहीं, इंसानियत के लिए भी काम आ सकती है।

अब नई शुरुआत की ओर

छुड़ाई गई महिलाओं को फिलहाल संरक्षण गृह भेजा गया है। वहाँ उन्हें काउंसलिंग, मेडिकल मदद और मानसिक सहारा दिया जा रहा है।
पुलिस और सामाजिक संगठन मिलकर उनके परिवारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
हो सकता है इनकी ज़िंदगियाँ अभी भी घावों से भरी हों, लेकिन कम से कम अब उन्हें फिर से जीने का मौका मिला है।

हम सबकी ज़िम्मेदारी

यह कहानी सिर्फ पुलिस या ऐप की नहीं है — यह हम सबके लिए एक आईना है।
कभी किसी जगह कुछ अजीब लगे, कोई चीख सुनाई दे जो बाकी दुनिया को नहीं सुनाई दे रही — तो नज़रअंदाज़ मत कीजिए।
शायद वही एक कदम किसी की ज़िंदगी बदल दे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments