Wednesday, February 11, 2026
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अशोक विहार: बच्चों के पार्क पर कुत्तों का ‘कब्जा’, छिड़ा विवाद; राजधानी में गहराता आवारा कुत्तों का संकट

  • राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण ब्यूरो 
     नई दिल्ली | विशेष संवाददातादेश की राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों का आतंक अब एक जानलेवा सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। हर बीतते दिन के साथ दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कुत्तों के हमले और निवासियों के साथ बढ़ते टकराव की खबरें प्रशासन की विफलता को उजागर कर रही हैं। इसी गंभीर स्थिति का सबसे डरावना चेहरा अशोक विहार फेज-1 के एच-ब्लॉक में सामने आया है। यहाँ का ‘राज पाल छिकारा चिल्ड्रन पार्क’ अब बच्चों के खेलने की जगह के बजाय विवाद और दहशत का केंद्र बन गया है। दिल्ली दर्पण टीवी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या ने बच्चों और बुजुर्गों का घरों से निकलना दूभर कर दिया है, और अशोक विहार इसका एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है जहाँ मासूमों के हक को कुत्तों के आतंक ने छीन लिया है।

डॉग लवर्स बनाम RWA : ‘युद्ध’ जैसे हालातअशोक विहार में यह मुद्दा अब डॉग लवर्स और आरडब्ल्यूए (RWA) के बीच सीधी जंग में तब्दील हो चुका है। आरडब्ल्यूए पदाधिकारी और पूर्व सरकारी अधिकारी अनिल छिकारा ने बताया कि पार्क के भीतर अवैध तरीके से फीडिंग कराई जा रही है, जिससे कुत्तों का जमावड़ा और आक्रामकता बढ़ गई है। मामला तब और गंभीर हो जाता है जब सुरक्षा की मांग करने वाले निवासियों को ही डराया-धमकाया जाता है। निवासियों का आरोप है कि कुछ लोग ‘पशु प्रेम’ की आड़ में कानून हाथ में ले रहे हैं और विरोध करने पर झूठी एफआईआर (FIR) और कोर्ट केस की धमकियां देते हैं। फेडरेशन की कानूनी सलाहकार एडवोकेट रत्ना अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 2025 के कड़े आदेशों के बावजूद भी सार्वजनिक पार्कों में फीडिंग जारी है, जो सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना है।
प्रशासनिक सुस्ती और सुरक्षा की मांग – यह समस्या केवल एक इलाके की नहीं बल्कि पूरी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। फेडरेशन ऑफ अशोक विहार आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष डॉ. एच.सी. गुप्ता ने सभी संबंधित विभागों को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। निवासियों की स्पष्ट मांग है कि चिल्ड्रन पार्कों की अनिवार्य रूप से मजबूत फेंसिंग (घेराबंदी) की जाए और कुत्तों के लिए आबादी से दूर ‘डेजिग्नेटेड फीडिंग जोन’ बनाए जाएं। दिल्ली में जिस तरह से यह मामला हिंसक झड़पों की ओर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यदि प्रशासन और एमसीडी (MCD) ने तुरंत कोई ठोस नीति लागू नहीं की, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। अब यह केवल जानवरों के प्रति प्रेम का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और उनके बच्चों की सुरक्षा का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

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