– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): वैश्विक शांति को खतरे में देखते हुए, ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक औपचारिक पत्र लिखकर संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। काउंसिल के अध्यक्ष राजीव अग्निहोत्री ने चेतावनी दी है कि दुनिया इस विनाशकारी मंजर को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की रक्षा को सैन्य उग्रता पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि इस संघर्ष के कारण होने वाली भारी जान-माल की हानि और वैश्विक अस्थिरता को समय रहते रोका जा सके।
इस संकट की जड़ें 28 फरवरी 2026 की उन सैन्य कार्रवाइयों में हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला ख़ामेनेई और प्रमुख सैन्य अधिकारियों की मृत्यु के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। जवाब में ईरान द्वारा इज़राइली क्षेत्रों और अमेरिकी बलों पर किए गए मिसाइल हमलों ने इस टकराव को एक पूर्ण युद्ध का रूप दे दिया है। ज्यूडिशियल काउंसिल ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन बताते हुए स्पष्ट किया है कि बिना सुरक्षा परिषद की अनुमति के बल प्रयोग वैश्विक कानूनी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर सकता है।
काउंसिल ने अपने पत्र में न केवल कानूनी बल्कि गंभीर नैतिक तर्कों को भी रेखांकित किया है, जिसमें हजारों नागरिकों के हताहत होने और बुनियादी ढांचे के विनाश पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। सचिव संजय अरोड़ा ने सुरक्षा परिषद से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करने का आग्रह करते हुए कहा कि इतिहास हमें आज के निर्णयों के आधार पर परखेगा। परिषद ने मांग की है कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को रोकने के लिए तुरंत प्रभावी युद्धविराम लागू किया जाए और वार्ता के मार्ग को पुनः स्थापित किया जाए ताकि मानवता को अनियंत्रित युद्ध की विभीषिका से बचाया जा सके।

