- अंशु ठाकुर, दिल्ली दर्पण टीवी
दिल्ली में वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो बनाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने 24 मई 2025 को एक मेमोरेंडम जारी कर सभी जिलों और यूनिट्स को निर्देश दिए कि ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जाए, जो वर्दी में रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं। इस कदम का उद्देश्य पुलिस की छवि को बनाए रखना और अनुशासन सुनिश्चित करना है।
पुलिस की वर्दी एक सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के साथ कई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान वर्दी में रील्स बनाकर इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर कर रहे हैं। इन रील्स में अक्सर फिल्मी गाने, डांस, या डायलॉग शामिल होते हैं, जो पुलिस की गरिमा को प्रभावित करते हैं। आयुक्त ने इसे पुलिस मैनुअल और कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन माना है। 24 अगस्त 2023 को जारी 16 बिंदुओं की सोशल मीडिया नीति में स्पष्ट रूप से वर्दी, हथियार, बैरिकेड, या सरकारी संसाधनों के साथ रील्स बनाने पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद, कई पुलिसकर्मी इन नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।
संजय अरोड़ा ने सभी डीसीपी को निर्देश दिए हैं कि वे अपने मातहत कर्मचारियों को इस बारे में जागरूक करें और 15 जून 2025 तक हेडक्वार्टर को कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपें। इस नीति के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा, अश्लील सामग्री, या अपमानजनक कंटेंट शेयर करने पर भी सख्त कार्रवाई होगी। पहले भी कई मामलों में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 2025 में पांच महिला पुलिसकर्मियों के खिलाफ वर्दी में रील्स बनाने के लिए विभागीय जांच शुरू की गई थी।
सोशल मीडिया पर वर्दी का दुरुपयोग न केवल पुलिस की छवि को धूमिल करता है, बल्कि जनता के बीच विश्वास को भी कमजोर करता है। दिल्ली पुलिस ने 2022 में भी इस संबंध में एक स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया था, जिसमें वर्दी में रील्स बनाने, सरकारी गाड़ियों का उपयोग, या संवेदनशील जानकारी साझा करने पर रोक लगाई गई थी। हाल के दिनों में, बिहार के मोतिहारी में एक महिला दारोगा को वर्दी में रील्स बनाने के लिए निलंबित किया गया, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
दिल्ली पुलिस की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण हो सकती है। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता के लिए वर्दी का गलत इस्तेमाल न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह कानूनी कार्रवाई को भी आमंत्रित कर सकता है। दिल्लीवासियों से अपील है कि वे ऐसी गतिविधियों की शिकायत करें, ताकि पुलिस का सम्मान और विश्वसनीयता बनी रहे। इस अभियान से उम्मीद है कि पुलिसकर्मी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देंगे और दिल्ली को सुरक्षित बनाने में योगदान करेंगे।

