नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से सामान निकालते नजर आए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कार्रवाई से पहले इलाके की पानी और बिजली आपूर्ति प्रभावित कर दी गई। इसके बाद बुलडोजर के जरिए चिन्हित मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कई परिवार अपने घरों से घरेलू सामान, फर्नीचर और अन्य जरूरी वस्तुएं निकालकर सड़क किनारे रखने को मजबूर हो गए।
लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान केवल गरीब परिवारों के मकानों को निशाना बनाया गया, जबकि कुछ प्रभावशाली लोगों के निर्माण को नहीं छुआ गया। स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि प्रशासन ने सभी लोगों के साथ समान व्यवहार नहीं किया।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की व्यवस्था को लेकर है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पुनर्वास या वैकल्पिक आवास के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। महिलाओं और बच्चों को खुले आसमान के नीचे समय बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के बीच अभियान को पूरा किया गया।
इस बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, पुनर्वास की व्यवस्था और कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, अधिकारियों की ओर से अभियान को सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
यमुना बाजार में हुई इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर अतिक्रमण, पुनर्वास और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।
