Saturday, May 2, 2026
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राजधानी में ‘खूनी’ पार्क: कहीं मासूम ओम की हत्या तो कहीं पुलिस मुठभेड़; क्या अब दिल्ली की सड़कों पर जान सस्ती हो गई है?

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली: देश की राजधानी अब अपराधियों के लिए खुली सैरगाह बनती जा रही है। पिछले 48 घंटों में दिल्ली के दो अलग-अलग इलाकों—सावन पार्क और रानी बाग—में हुई वारदातों ने पुलिस की मुस्तैदी और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज चंद रुपयों और मोबाइल के लिए सरेआम हत्या करना अब अपराधियों के लिए आम बात हो गई है, जिससे दिल्ली की जनता के बीच दहशत का माहौल है।

सावन पार्क: 15 साल के ओम की कहानी शुरू होने से पहले ही खत्म

अशोक विहार के सावन पार्क इलाके में 6 अप्रैल 2026 की शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। 15 साल का मासूम ओम गुप्ता, जो अपने 10वीं के रिजल्ट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था और भविष्य के सपने संजो रहा था, उसे मोबाइल स्नेचरों ने मौत के घाट उतार दिया।

ओम पार्क में खेलने गया था, तभी दो स्नेचरों ने उसका फोन छीनने की कोशिश की। जब ओम ने हिम्मत दिखाकर विरोध किया, तो स्नेचरों ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर दिए। खून से लथपथ ओम ने किसी तरह अपने परिजनों को सूचना दी, लेकिन अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए अगले दिन दोपहर 12 बजे उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने एक आरोपी को दबोच लिया है, लेकिन सवाल वही है—क्या दिल्ली के पार्क अब बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं रहे?

रानी बाग: हत्या के बाद पुलिस मुठभेड़, दो बदमाश गिरफ्तार

इधर सावन पार्क में मातम छाया था, उधर रानी बाग इलाके में एक और हत्या ने पुलिस के होश उड़ा दिए। रानी बाग एरिया में राजू नाम के युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।

एसीपी मुरारी लाल को सूचना मिली कि राजू की हत्या के आरोपी कुंदन और लालबाबू एक पार्क में छिपे हैं। एसएचओ रानी बाग इंस्पेक्टर प्रवीण के नेतृत्व में टीम ने जब आरोपियों को घेरा, तो उन्होंने सरेंडर करने के बजाय पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली बदमाशों के पैर में लगी, जिसके बाद उन्हें दबोच लिया गया। इनके पास से पिस्टल और कारतूस बरामद हुए हैं।

प्रशासन से तीखे सवाल: आखिर कब तक बहेगा बेगुनाहों का खून?

ये दो घटनाएं केवल क्राइम रिपोर्टिंग का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि दिल्ली पुलिस के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह हैं।

  • क्या दिल्ली पुलिस का खौफ अपराधियों के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है?
  • बीट पेट्रोलिंग और पार्कों की सुरक्षा के दावे धरातल पर क्यों नजर नहीं आते?
  • एक मां जिसने अपने बच्चे को लाड़-प्यार से पालकर 10वीं तक पहुंचाया, उसे मिले इस जख्म की भरपाई कौन करेगा?

दिल्ली पुलिस लगातार अपराध मुक्त शहर का दावा करती है, लेकिन जब तक सावन पार्क जैसी घटनाएं होती रहेंगी, ये दावे खोखले ही नजर आएंगे। अब समय आ गया है कि पुलिस केवल ‘मुठभेड़’ और ‘गिरफ्तारी’ तक सीमित न रहकर, अपराध को रोकने के लिए ठोस जमीनी रणनीति बनाए।

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