मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला मामले में आए फैसले के बाद हिंदू समाज में खुशी जशन और उत्साह का माहौल है। वर्षों लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद अब धार स्थित वाग्देवी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का रास्ता साफ हो गया है। फैसले के बाद भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं और आंदोलनकारियों ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया।
भोजशाला आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि इस संघर्ष में कई पीढ़ियों ने अपना जीवन लगा दिया। आंदोलनकारियों ने भावुक होकर कहा कि “भोजशाला के लिए कई लोगों ने अपनी जवानी खपा दी, कई ने जान तक गंवाई, बहोत सारे त्तयाग और तपस्या के बाद जाकर यह दिन देखने को मिला है।”
भोज उत्सव समिति के सदस्य राजेश शुक्ला ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धार के लोगों के वर्षों के संघर्ष का परिणाम आज सामने आया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रतीकात्मक रूप से मां वाग्देवी की पूजा की जा रही है, लेकिन वह दिन और ऐतिहासिक होगा जब मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से वापस लाकर यहां स्थापित की जाएगी।
वहीं हिंदू नेता अशोक जैन ने कहा कि भोजशाला के हर पत्थर और शिलालेख में मंदिर होने के प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को हमेशा भरोसा था कि सत्य की जीत होगी और वर्षों की कानूनी व सामाजिक लड़ाई के बाद यह फैसला आया है।
आंदोलनकारियों ने भोजशाला को “सरस्वती लोक” के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई है। फैसले के बाद भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर खुशी जाहिर की।

