Friday, January 16, 2026
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एंजेल चकमा हत्याकांड पर उबाल: दिल्ली के छात्रों का आक्रोश, जंतर-मंतर पर NSUI का कैंडल मार्च

नई दिल्ली | Angel Chakma Murder Case

देहरादून में नस्लीय घृणा से जुड़ी हिंसा की घटना के खिलाफ राजधानी दिल्ली में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकाला गया, जहां छात्रों ने पीड़ित छात्र एंजेल चकमा को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। हाथों में मोमबत्तियां लेकर उन्होंने नस्लवाद और घृणा अपराधों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि एंजेल चकमा के साथ हुई हिंसा सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि नफरत और असहिष्णुता किस हद तक बढ़ती जा रही है।

पहचान के आधार पर बनाया गया निशाना
छात्रों का आरोप है कि उत्तर-पूर्व से आने वाले एंजेल चकमा को उसकी पहचान और शक्ल-सूरत के कारण निशाना बनाया गया। हमलावरों द्वारा नस्लीय गालियां देने और “चीनी” जैसे अपमानजनक शब्द कहने की बात सामने आई है। एनएसयूआई का कहना है कि यह घटना बताती है कि नस्लीय सोच आज भी समाज में गहराई से मौजूद है और इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कार्रवाई में देरी पर सरकार से सवाल
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड की भाजपा शासित सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए। छात्रों ने कहा कि घटना के करीब 20 दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और आरोपी खुलेआम घूमते रहे। उनका कहना था कि अंजेल की मौत के बाद ही एफआईआर दर्ज होना प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

एनएसयूआई का आरोप—नफरत के माहौल का नतीजा
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि यह घटना कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ते नफरत और विभाजन के माहौल का परिणाम है। संगठन का आरोप है कि ऐसी सोच अपराधियों को बेखौफ बनाती है और उन्हें दंडमुक्ति का भरोसा देती है।

कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि एंजेल चकमा की हत्या नफरत की सोच का नतीजा है, लेकिन न्याय की हत्या सरकार की चुप्पी ने की। उन्होंने सवाल उठाया कि 20 दिनों तक कोई कार्रवाई न होना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मिलीभगत की आशंका भी पैदा करता है।

संविधान और समानता का संदेश
एनएसयूआई ने संविधान के मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि भारत हर भारतीय का है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या समुदाय से हो। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी को भी उसकी पहचान या रूप-रंग के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

कैंडल मार्च के जरिए एनएसयूआई ने साफ संदेश दिया कि नस्लवाद, घृणा अपराध और हिंसा के खिलाफ उसका संघर्ष जारी रहेगा और एंजेल चकमा को न्याय मिलने तक आंदोलन थमेगा नहीं।

यह भी पढ़ें- https://delhidarpantv.com/dalal-in-fake-salt-factor-to-be-fucked-by-the-big-business/

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