- दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: अशोक विहार में धार्मिक आस्था और सद्भाव के लिए आयोजित ‘कलश यात्रा’ ने अचानक राजनीति का हिंसक मोड़ ले लिया है। वार्ड की निगम पार्षद वीना असीजा और विधायक की करीबी व बीजेपी की मंडल महामंत्री गीता चौहान के बीच एक ऐसा विवाद हुआ की मामला थाने तक जा पहुंचा है। निगम पार्षद वीना असीजा द्वारा धार्मिक आयोजन के दौरान शुरू हुआ यह विवाद अब विधायक पूनम भारद्वाज के पति अशोक भारद्वाज की सीधी एंट्री के बाद एक ‘सियासी महाभारत’ में बदल गया है।
मामले की शुरुआत सोमवार को हुई, जब पार्षद वीना असीजा ने अपने वार्ड में राम कथा के उपलक्ष्य में कलश यात्रा निकाली थी। पार्षद का आरोप है कि उन्हें यात्रा के दौरान हंगामा होने की खुफिया जानकारी थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण विरोधी पक्ष सफल नहीं हो सका। इसके बाद, गीता चौहान का पार्षद के घर जाना और फिर वहां से हंगामे के साथ बाहर निकलना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
आरोप-प्रत्यारोप: एक-दूसरे को घेरे में लिया
इस विवाद में तीनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं:
वीना असीजा (निगम पार्षद): पार्षद का आरोप है कि गीता चौहान ने मिलने के बहाने उनके घर पहुंचकर ‘स्टिंग ऑपरेशन’ करने की कोशिश की। वीना असीजा के मुताबिक, जब उन्होंने फोन की जांच करनी चाही, तो गीता चौहान ने हंगामा शुरू कर दिया। पार्षद ने विधायक पति अशोक भारद्वाज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “अशोक भारद्वाज ने पुलिस के सामने को जान से मारने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी है।”
गीता चौहान (मंडल महामंत्री): दूसरी ओर, गीता चौहान का कहना है कि वे पार्षद के बुलाने पर वहां गई थीं, जहां उनके साथ बदसलूकी की गई। गीता का आरोप है कि पार्षद वीना असीजा, उनके बेटे पुनीत असीजा और एक सहेली ने मिलकर उन्हें पीटा और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की।
अशोक भारद्वाज (विधायक पति): इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक भारद्वाज ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया है। उन्होंने कहा, “मंडल महामंत्री के साथ हुई मारपीट अस्वीकार्य है। पार्षद की मानसिकता क्या है, ये वही जानें। इस मामले को पार्टी के मंच पर रखा जाएगा।”
बीजेपी के लिए सिरदर्द बना ‘आंतरिक कलश’
इस घटना ने दिल्ली बीजेपी के भीतर चल रही गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया है। एक समय था जब विधायक परिवार और पार्षद के बीच काफी तालमेल था और खुद रेखा गुप्ता ने पार्षद की जीत के लिए मेहनत की थी। लेकिन अब पार्षद और विधायक परिवार के बीच की यह तल्खी पार्टी संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
अशोक विहार थाना पुलिस ने फिलहाल दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर धार्मिक आयोजन के पीछे कौन सी राजनीतिक साजिश छिपी थी। क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विवाद है या फिर इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रंजिश? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच और पार्टी के आलाकमान की कार्रवाई पर टिके हैं।
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