Saturday, May 2, 2026
spot_img
Homeब्रेकिंग न्यूज़आंखों देखी: दिल्ली अग्निकांड में सीढ़ी होती तो बच जाती 4 जिंदगियां,...

आंखों देखी: दिल्ली अग्निकांड में सीढ़ी होती तो बच जाती 4 जिंदगियां, बच्चे को 3 मंजिल से फेंककर बचाया

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के पालम इलाके के साध नगर बाजार में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक रिहायशी मकान में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के 9 लोगों की जान ले ली, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अगर फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक सीढ़ी समय पर काम कर जाती, तो कम से कम 3 से 4 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

धुएं में फंसा पूरा परिवार, मदद का इंतजार करता रहा

घटना के वक्त मकान मालिक राजेंद्र कश्यप घर पर मौजूद नहीं थे, वे किसी काम से गोवा गए हुए थे। आग लगने के बाद पूरा परिवार तीसरी मंजिल पर फंस गया था और नीचे घना काला धुआं भर चुका था। साध नगर मार्केट एसोसिएशन के महासचिव मुकेश वर्मा के मुताबिक, फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन हाइड्रोलिक सीढ़ी समय पर नहीं खुल पाई, जिससे राहत कार्य में देरी हो गई।

बचने की कोशिश में कूदे लोग, बच्चे को नीचे फेंका गया

हालात इतने भयावह थे कि परिवार के लोग अपनी जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूदने को मजबूर हो गए। एक बच्चा हाथ से फिसलकर नीचे गिर गया, जिससे उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया, वहीं एक अन्य युवक ने कूदकर जान बचाने की कोशिश की और घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बच्चे को नीचे खड़े लोगों की ओर फेंका गया, जिसे बचाने की कोशिश में नीचे मौजूद लोग भी घायल हो गए।

‘सीढ़ी छोटी थी, बिल्डिंग ऊंची’ – प्रत्यक्षदर्शी

एक अन्य चश्मदीद शशांक ने बताया कि फायर ब्रिगेड की सीढ़ी बिल्डिंग की ऊंचाई के मुकाबले छोटी थी। करीब 30 मिनट तक परिवार मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन उचित संसाधनों की कमी के कारण उन्हें समय पर बचाया नहीं जा सका।

बेसमेंट से शुरू हुई आग, मिनटों में फैली

स्थानीय लोगों के अनुसार, आग की शुरुआत बेसमेंट से हुई, जहां भारी मात्रा में सामान रखा हुआ था। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। शाम करीब साढ़े छह बजे फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया, लेकिन तब तक आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच चुकी थी।

कौन थे राजेंद्र कश्यप?

राजेंद्र कश्यप साध नगर राम चौक मार्केट एसोसिएशन के प्रधान थे और हाल ही में दूसरी बार इस पद पर चुने गए थे। उनका परिवार बड़ा था—पांच बेटे और एक बेटी। घटना के समय परिवार के कुछ सदस्य शिमला में भी थे। उनकी पत्नी की बहन बाला ने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार के कौन-कौन सदस्य बचे हैं।

बाजार की संरचना और सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली के घनी आबादी वाले बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साध नगर बाजार संकरी गलियों में बसा है, जहां हाई वोल्टेज तारों का जाल फैला हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर दुकान, उसके नीचे बेसमेंट, ऊपर गोदाम और फिर रिहायशी मंजिलें—ऐसी संरचना ने आग को तेजी से फैलने में मदद की।

जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों और व्यापारियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही उपकरण और व्यवस्था होती, तो इतनी बड़ी जान-माल की हानि टाली जा सकती थी। अब सवाल उठ रहा है कि इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/the-publics-protest-got-buried-in-the-mcds-file-after-the-construction-of-the-palm-springs-mission-building-in-6-acres/

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments