कुछ शहर अपनी साफ़ हवा, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपनी जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण के लिए चर्चा में आ जाते हैं। लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी होती हैं, जहां खूबसूरती और प्रदूषण दोनों साथ-साथ चलते हैं—और समय के साथ यह संतुलन लगातार बिगड़ता जाता है।
पूर्वोत्तर भारत, जो अपनी प्राकृतिक वादियों और स्वच्छ वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण को लेकर चर्चा में रहा है। इसी क्षेत्र में स्थित असम-मेघालय सीमा पर बसा बर्नीहाट (Byrnihat) हाल ही में वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आ गया था।
दो साल पहले स्विस संस्था IQAir ने अपनी रिपोर्ट में बर्नीहाट को दुनिया का सबसे प्रदूषित मेट्रोपॉलिटन एरिया बताया था। संस्था के अनुसार वर्ष 2024 में यहां PM 2.5 का वार्षिक औसत स्तर 128.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय सुरक्षित सीमा से लगभग 25 गुना अधिक है।
PM 2.5 वे अत्यंत सूक्ष्म प्रदूषित कण होते हैं, जो सांस के माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश कर फेफड़ों और रक्त तक पहुंच सकते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय स्तर पर अब हालात को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक गतिविधियों और लगातार बढ़ते प्रदूषण स्रोतों पर सख्त नियंत्रण के बिना स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।
फिलहाल बर्नीहाट एक ऐसा उदाहरण बना हुआ है, जहां प्राकृतिक सुंदरता के बीच प्रदूषण की चुनौती लगातार लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।

