नई दिल्ली: अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला संक्रमण के मामलों में तेजी को देखते हुए भारत सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है। सरकार ने अपने नागरिकों को स्पष्ट रूप से इन देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
सरकारी एडवाइजरी में बताया गया है कि रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और साउथ सूडान में संक्रमण का जोखिम बढ़ा हुआ है। यह कदम तब उठाया गया जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को स्थिति को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC)” घोषित किया।
इसके अलावा, अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी इन क्षेत्रों में संक्रमण के फैलाव को गंभीर मानते हुए आपात स्थिति घोषित की है। भारत सरकार का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के संपर्क में रहकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सरकार की सलाह क्या है?
सरकार ने विदेश में रह रहे या यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे स्थानीय स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करें, भीड़भाड़ से बचें, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
इबोला क्या है?
इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो Bundibugyo वायरस सहित इबोला वायरस परिवार से फैलती है। यह बीमारी अत्यंत संक्रामक मानी जाती है और संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलती है, जैसे—
- खून
- उल्टी
- पसीना
- वीर्य
- मल या अन्य शारीरिक स्राव
यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद तेजी से असर करता है और समय पर इलाज न मिलने पर घातक साबित हो सकता है।
यह बीमारी कितनी खतरनाक है?
इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसकी तेज़ी से फैलने की क्षमता और उच्च मृत्यु दर है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। इसलिए आइसोलेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद जरूरी होते हैं।
भारत में स्थिति
सरकारी बयान के अनुसार, भारत में अब तक Bundibugyo वायरस से जुड़े इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारी कर रही है।
इबोला के प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार
- गंभीर कमजोरी
- मांसपेशियों में दर्द
- लगातार उल्टी और दस्त
- गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव
- शरीर में डिहाइड्रेशन और अंगों का फेल होना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

