Saturday, May 16, 2026
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द्वारका में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, बीमा किस्तों के नाम पर ठगी, महिला समेत 10 गिरफ्तार

Delhi News | द्वारका में बीमा किस्तों के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़, महिला समेत 10 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में बीमा पॉलिसी की बकाया किस्तों और मैच्योरिटी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। द्वारका जिला पुलिस की थाना द्वारका साउथ टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही ठगी के लिए चलाए जा रहे एक सक्रिय कॉल सेंटर को भी सील कर दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में जमा 20 लाख रुपये से अधिक की राशि फ्रीज की गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बनाकर करीब एक करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है।

फर्जी नोटिस और सरकारी लोगो से करते थे ठगी

पुलिस ने बताया कि आरोपी RBI, दिल्ली हाईकोर्ट, IRDA, NPCI और काउंसिल फॉर इंश्योरेंस ओम्बुड्समैन के फर्जी नोटिस और लोगो का इस्तेमाल करते थे। खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर वे बंद या लैप्स पॉलिसी की रकम वापस दिलाने के नाम पर पीड़ितों से पैसे वसूलते थे।

NCRP पोर्टल से मिला अहम सुराग

साइबर अपराध पर रोक लगाने के तहत I4C के NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया गया। जांच में पंजाब एंड सिंध बैंक, सेक्टर-6 द्वारका के एक खाते से जुड़ी संदिग्ध नकद निकासी सामने आई, जो एक साइबर फ्रॉड केस से जुड़ी थी। इसी खाते के जरिए पूरे गिरोह तक पुलिस पहुंच सकी।

बैंक से शुरू हुई गिरफ्तारी की कड़ी

जांच के दौरान खाते के धारक निशांत चौहान को बैंक से दो लाख रुपये निकालने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह कमीशन के बदले ठगी की रकम अपने और अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर करवाता था। इसके बाद पुलिस ने सेक्टर-6 द्वारका मिनी मार्केट से साहिल बेरी को उसकी क्रेटा कार समेत गिरफ्तार किया। साहिल के पास से सात मोबाइल फोन बरामद हुए।

सागरपुर में कॉल सेंटर पर छापा

साहिल की निशानदेही पर पुलिस ने सागरपुर इलाके में चल रहे एक कॉल सेंटर पर छापा मारा, जहां से किशन, दमन, सुमित समेत अन्य स्टाफ को गिरफ्तार किया गया। मौके से हजारों बीमा पॉलिसियों का डेटा, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए गए। बाद में बुराड़ी से विनय मल्होत्रा और पांडव नगर से अजय बाजपेयी को भी पुलिस ने दबोच लिया।

70 लाख की ठगी का मामला भी उजागर

जांच में कई पीड़ितों की शिकायतें सामने आई हैं। उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी एक व्यक्ति से करीब 70 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया है। आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा से कई बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं।

ऐसे करते थे लोगों को शिकार

आरोपी बीमा कंपनी के कर्मचारी बनकर लोगों को फोन करते थे और पॉलिसी मैच्योरिटी, NOC या बकाया किस्त के नाम पर रकम जमा कराने को कहते थे। यह रकम म्यूल अकाउंट्स में डलवाई जाती थी, जिसे बाद में नकद निकाल लिया जाता था। खाते उपलब्ध कराने वालों को 1.5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 18 मोबाइल फोन, 4 हार्ड ड्राइव, 2 लैपटॉप, एक क्रेटा कार, बीमा कंपनियों और बैंकों के फर्जी दस्तावेज, RBI और दिल्ली हाईकोर्ट की नकली मुहरें व पत्र भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

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दिल्ली मार्केट में क्रिसमस पर हंगामा, सांता टोपी पहनने पर महिलाओं से बदसलूकी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

Delhi News | क्रिसमस से पहले दिल्ली में विवाद, पैम्प्लेट बांट रहीं महिलाओं का विरोध, वीडियो वायरल

क्रिसमस 2025 से पहले ही राजधानी दिल्ली में त्योहार को लेकर विवाद सामने आया है। ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके की एक मार्केट में क्रिसमस से जुड़ी जानकारी वाले पैम्प्लेट बांट रही महिलाओं और बच्चों का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना सोमवार, 22 दिसंबर की शाम करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, करीब 12 महिलाएं और कुछ बच्चे सांता क्लॉज की लाल टोपी पहनकर दुकानदारों और राहगीरों को “मैं क्रिसमस क्यों मनाऊं?” शीर्षक वाले पैम्प्लेट बांट रहे थे। इसी दौरान मार्केट में मौजूद कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और महिलाओं से वहां से जाने को कहा।

सड़क जाम और बिना अनुमति प्रचार का आरोप

विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि महिलाएं सड़क के बीच खड़े होकर पैम्प्लेट बांट रही थीं, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। उनका आरोप है कि इस गतिविधि के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी और मौके पर धार्मिक गीत भी बजाए जा रहे थे। लोगों का कहना है कि अगर किसी भी तरह का आयोजन या प्रचार करना है तो इसके लिए पहले अनुमति जरूरी होती है।

दिल्ली मार्केट में क्रिसमस पर हंगामा, सांता टोपी पहनने पर महिलाओं से बदसलूकी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि किसी को अपने घर या निजी दायरे में त्योहार मनाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों से अव्यवस्था फैलती है। उनका तर्क है कि जब शोभायात्रा या अन्य धार्मिक कार्यक्रम निकाले जाते हैं, तब भी पहले पुलिस प्रशासन से इजाजत ली जाती है।

सौरभ भारद्वाज ने शेयर किया वीडियो

इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ बदतमीज़ी की गई और इसे नफरत फैलाने की मानसिकता करार दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने कुछ लोगों पर धर्म के नाम पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

स्थानीय लोग बोले—राजनीति की जा रही है

हालांकि, मार्केट में मौजूद कुछ लोग सौरभ भारद्वाज के आरोपों से असहमत नजर आए। उनका कहना है कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उनका विरोध धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि बिना अनुमति सड़क जाम करने और अव्यवस्था फैलाने को लेकर था।

फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्रिसमस से पहले सामने आए इस विवाद ने राजधानी में धार्मिक प्रचार, सार्वजनिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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बीजेपी नेता के बयान पर सियासी घमासान, ‘हिंदी सीखो’ टिप्पणी के बाद दी सफाई

नई दिल्ली:
देश की राजधानी दिल्ली में एक बीजेपी पार्षद द्वारा अफ्रीकी मूल के एक नागरिक को हिंदी सीखने की चेतावनी देने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पटपड़गंज वार्ड संख्या 197 से बीजेपी पार्षद रेनू चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक विदेशी फुटबॉल कोच को एक महीने के भीतर हिंदी सीखने का अल्टीमेटम देती नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में रेनू चौधरी सार्वजनिक पार्क में मौजूद अफ्रीकी नागरिक से पूछती दिख रही हैं कि उसने अब तक हिंदी क्यों नहीं सीखी। वीडियो में वह कहती हैं, “अगर एक महीने के अंदर तुमने हिंदी नहीं सीखी, तो तुम्हें इस पार्क में घुसने नहीं दिया जाएगा।”
मौके पर मौजूद लोगों द्वारा इसे मज़ाक समझकर हंसने पर पार्षद ने कड़े लहजे में कहा कि वह पूरी तरह गंभीर हैं और आठ महीने पहले भी इस संबंध में चेतावनी दे चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारत में रहकर पैसा कमा रहा है, तो उसे देश की भाषा आनी चाहिए।

बताया जा रहा है कि संबंधित अफ्रीकी नागरिक पिछले करीब 15 वर्षों से भारत में रह रहा है और बच्चों को फुटबॉल की कोचिंग देता है।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूज़र्स ने बयान को अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया, जिसके बाद मामला और गर्मा गया।

पार्षद रेनू चौधरी ने दी सफाई

विवाद बढ़ने पर रेनू चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को धमकाना नहीं था, बल्कि भाषा के कारण होने वाली संवाद की समस्या को दूर करना था। पार्षद के अनुसार, पार्क की देखरेख करने वाले नगर निगम (MCD) के कर्मचारी अंग्रेजी नहीं समझते, जिससे कोच के साथ समन्वय में परेशानी आती है।

उन्होंने दावा किया कि यह एक सार्वजनिक पार्क है, जहां संबंधित कोच बच्चों से फीस लेकर फुटबॉल सिखाते हैं। आठ महीने पहले उनसे नगर निगम को राजस्व देने को कहा गया था, लेकिन भाषा न समझ पाने का हवाला देकर मामला टाल दिया गया।

ट्यूटर दिलाने की पेशकश का दावा

रेनू चौधरी ने यह भी कहा कि उन्होंने कोच को बेसिक हिंदी सिखाने के लिए ट्यूटर दिलाने की पेशकश की थी और उसका खर्च खुद उठाने की बात भी कही थी, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

“देश की भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं”

अपने बयान का बचाव करते हुए पार्षद ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत कहा है। हमारे देश में ज्यादातर लोग हिंदी बोलते हैं, इसलिए अगर कोई विदेशी यहां रह रहा है तो भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं है।”

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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दिल्ली से बड़ी खबर: बांग्लादेश हाई कमीशन ने वीज़ा व कांसुलर सेवाओं पर लगाई अस्थायी रोक

नई दिल्ली:
बांग्लादेश में लगातार बिगड़ते हालात के बीच दिल्ली से एक अहम खबर सामने आई है। राजधानी में स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर एक आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है, जिसमें बताया गया है कि सभी कांसुलर और वीज़ा सेवाएं अगले आदेश तक अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं

हाई कमीशन द्वारा लगाए गए नोटिस में लिखा है, “कुछ आवश्यक कारणों से, नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन से सभी कांसुलर और वीज़ा सेवाएं अगले आदेश तक अस्थायी रूप से निलंबित की जाती हैं।” हालांकि नोटिस में सेवाएं बंद किए जाने के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया गया है।

बांग्लादेश में हिंसा से हालात तनावपूर्ण

बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा और विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है। बांग्लादेश पुलिस ने मामले में जानकारी देते हुए कहा है कि मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद के ठिकाने के बारे में फिलहाल कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है, हालांकि उसकी तलाश लगातार जारी है।

हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने के आरोप

हादी की मौत के बाद जमात-ए-इस्लामी से जुड़े कट्टरपंथी तत्वों के सक्रिय होने की खबरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि हिंदू समुदाय के लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। पश्चिमी बांग्लादेश के झेनाइदह जिले में गोविंदा बिस्वास नामक व्यक्ति को हाथ में कलावा होने के कारण कथित तौर पर निशाना बनाया गया।

ढाका में विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा की मांग

इसी बीच, हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को जिंदा जलाए जाने की घटना के विरोध में देशभर में आक्रोश देखा जा रहा है। ढाका स्थित ऐतिहासिक ढाकेश्वरी मंदिर में हिंदू समुदाय के लोग एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दीपू के हत्यारों को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

भारत में भी विरोध, कोलकाता में प्रदर्शन

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर भारत में भी विरोध देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया। वहीं, राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी अन्य भाजपा नेताओं के साथ बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन कर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

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“धर्म के नाम पर हिंसा नहीं”: बांग्लादेश लिंचिंग पर चीफ इमाम इलियासी की कड़ी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य घटना को लेकर देश-विदेश में आक्रोश है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस वारदात पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “इंसानियत को शर्मसार करने वाला अपराध” बताया है।

डॉ. इलियासी ने कहा कि जिस बर्बरता के साथ एक मासूम युवक की जान ली गई, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “यह बेहद अफसोसनाक है। जिस तरह से उस बच्चे की हत्या की गई और फिर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यह इंसानियत का कत्ल है।” उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने बांग्लादेशी समाज से भी सवाल पूछे। डॉ. इलियासी ने कहा कि भारत ने हमेशा बांग्लादेश का साथ दिया—चाहे बुनियादी ढांचा हो या आर्थिक मदद—फिर भी वहां अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार बेहद पीड़ादायक हैं। उनके शब्दों में, “क्या बांग्लादेशी यह भूल गए हैं कि भारत हर मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा रहा?”

मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवाल
चीफ इमाम ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम संगठनों की खामोशी पर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “कहां हैं वे संगठन जो मानवाधिकारों की बात करते हैं? आज जब इतनी बर्बरता के साथ हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, तब उनकी आवाज़ क्यों नहीं सुनाई दे रही?”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से बांग्लादेश में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। इस्लाम की शिक्षाओं का हवाला देते हुए डॉ. इलियासी ने कहा कि इस्लाम जीवन की रक्षा, क्षमा और करुणा का संदेश देता है, न कि हिंसा का। “जो लोग इस तरह की हिंसा कर रहे हैं, वे इस्लाम के सिद्धांतों का पालन नहीं कर सकते,” उन्होंने कहा।

भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग
डॉ. इलियासी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी अपील की कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें, ताकि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।

यह घटना एक बार फिर दुनिया के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मानवता, धर्म और मानवाधिकारों के नाम पर किए जाने वाले वादे केवल शब्दों तक सीमित रह गए हैं।

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