Saturday, June 13, 2026
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दिल्ली दहली: पश्चिम विहार में रोहित खत्री की जिम पर फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा

दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली:- दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित एक जिम पर फायरिंग की घटना को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े रणदीप मलिक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में जिम मालिक रोहित खत्री को सीधे तौर पर धमकी दी गई है।

रणदीप मलिक ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पश्चिम विहार स्थित आरके फिटनेस जिम पर हुई फायरिंग उसी और उसके साथी अनिल पंडित (यूएसए) के कहने पर करवाई गई है। उसने दावा किया कि उसने पहले रोहित खत्री को फोन किया था, लेकिन कॉल इग्नोर किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

पोस्ट में चेतावनी देते हुए लिखा गया है कि अगर अगली बार कॉल रिसीव नहीं की गई तो अंजाम और गंभीर होगा। धमकी भरे अंदाज में कहा गया, “अगर अगली बार कॉल नहीं उठाई, तो तुझे धरती से उठा दूंगा।”

रणदीप ने आगे लिखा कि वह सिर्फ बातें करने में नहीं बल्कि करके दिखाने में विश्वास रखता है। पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेते हुए कहा गया कि जो भी उनके दुश्मन हैं, वे जीवनभर दुश्मन ही रहेंगे।

पुलिस जांच में जुटी

इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और सोशल मीडिया पोस्ट की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फायरिंग की घटना वास्तव में कब और कैसे हुई तथा इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

अमेरिका में गैंगवार का असर?

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दो गैंगस्टरों की मौत की खबर सामने आई थी। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ भारतीय मूल के दो गैंगों के बीच हुई थी। इस गैंगवार में दो लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है।

इस घटना की जिम्मेदारी विरोधी गैंग बलजोत और जस्सा ने ली है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आगे और हमलों की धमकी भी दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका में हुई इस गैंगवार के बाद गैंगों के बीच टकराव और तेज हो गया है, जिसका असर अब भारत में भी दिखने लगा है।

फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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राष्ट्रीय युवा दिवस पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद का संदेश: “युथ पावर ही नेशन पावर”

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली। आज 12 जनवरी, राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में नॉर्थ जोन की नेशनल स्कूल बैंड प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस मौके पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने प्रतिभागियों और शिक्षकगणों को संबोधित करते हुए अपने प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यह दिन स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और उनके आदर्शों को याद करने का है, जिन्होंने हमें यह सिखाया कि “युथ पावर ही नेशन पावर है।”

श्री सूद ने बैंड प्रतियोगिता को केवल संगीत और मार्च पास्ट तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, बैंड में कदम और हाथ, धुन और ताल का सामंजस्य केवल दृश्यात्मक सुंदरता या धुन की उत्कृष्टता ही नहीं दिखाता, बल्कि यह प्रतिभागियों में आत्म-अनुशासन, टीम भावना और समर्पण का विकास भी करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पल की लापरवाही या अनुशासनहीनता पूरे बैंड की मेहनत और रिदम को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि बैंड प्रतियोगिता युवाओं को जीवन के महत्वपूर्ण गुण सिखाने का एक आदर्श माध्यम है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बैंड में शामिल होना केवल संगीत का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक साथ काम करने, सामूहिक जिम्मेदारी निभाने और समय का महत्व समझने की कला भी है। उन्होंने प्रतिभागियों को फोकस, धैर्य और नियंत्रण बनाए रखने की सलाह दी, क्योंकि यही गुण जीवन में सफलता दिलाने में भी सहायक होते हैं।

इस अवसर पर श्री सूद ने न केवल प्रतिभागियों की मेहनत की सराहना की, बल्कि उनके राज्य के शिक्षकगणों को भी बधाई दी, जिन्होंने उन्हें प्रतियोगिता के लिए तैयार किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करें और सफलता को केवल मेडल तक सीमित न समझें। उनका कहना था कि असली सफलता टीम स्पिरिट, अनुशासन और व्यक्तिगत विकास में है।

श्री सूद ने अंत में सभी से आग्रह किया कि इस राष्ट्रीय युवा दिवस और आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सभी मिलकर अपने देश में सकारात्मक माहौल बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि जैसे बैंड में सामंजस्य और अनुशासन जरूरी है, वैसे ही समाज में भी सहयोग, एकजुटता और जिम्मेदारी निभाना अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रकार नेशनल स्कूल बैंड प्रतियोगिता न केवल संगीत और प्रदर्शन का मंच है, बल्कि यह युवाओं के जीवन में अनुशासन, समर्पण, टीम भावना और नेतृत्व जैसी विशेषताओं को विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती है। शिक्षा मंत्री के प्रेरक संदेश ने इस कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण और उत्साहवर्धक बना दिया।

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ईस्ट दिल्ली पार्क विवाद: कैमरे, निगरानी और नागरिकों की निजता

East Delhi News: पूर्वी दिल्ली के एक पार्क से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का कारण बना हुआ है। वीडियो में कोहली वार्ड की बीजेपी पार्षद मुनेष डेढ़ा अपने समर्थकों के साथ देर रात पार्क में मौजूद युवाओं से पूछताछ करती नजर आ रही हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति, सार्वजनिक नैतिकता और नागरिक स्वतंत्रता के बीच टकराव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

वायरल वीडियो में पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखती। पार्षद खुद पार्क में बैठे युवक-युवतियों से उनके रहने की जगह, पहचान और वहां मौजूद होने के कारणों पर सवाल करती दिखाई देती हैं। एक बेंच पर बैठे कपल से पहचान पत्र दिखाने को कहा जाता है और यह जानने के बाद कि दोनों अशोक नगर के निवासी हैं, उनसे देर रात पार्क में मौजूद रहने पर सवाल उठाए जाते हैं।

चेतावनी और उम्र पर टिप्पणी

वीडियो में पार्षद यह कहते हुए भी सुनाई देती हैं कि यदि पार्क में कोई आपत्तिजनक गतिविधि पाई गई तो मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी। जब युवक-युवती खुद को 18 वर्ष का बताते हैं, तो इस पर भी सख्त टिप्पणी की जाती है। इसके बाद अन्य जोड़ों से भी इसी तरह पूछताछ होती दिखाई देती है।

पार्षद का पक्ष

विवाद बढ़ने पर मुनेष डेढ़ा ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि वे किसी प्रकार की नैतिक पहरेदारी के इरादे से नहीं, बल्कि निरीक्षण के लिए पार्क गई थीं। उनका कहना है कि स्थानीय निवासियों ने पार्क में नशाखोरी और देर रात तक भीड़ जुटने की शिकायत की थी। साथ ही, रोशनी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही थी।

देर रात घर से बाहर रहने पर सवाल

पार्षद ने यह भी दावा किया कि पार्क में मौजूद कुछ लड़कियां काफी देर से घर से बाहर थीं। उन्होंने एक अभिभावक का हवाला देते हुए कहा कि उनकी बेटी कई दिनों से लापता थी। पार्षद के अनुसार, किसी के साथ बैठने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब पूर्वी दिल्ली में जनप्रतिनिधियों की ऐसी भूमिका पर सवाल उठे हों। इससे पहले पटपड़गंज इलाके में बीजेपी की एक अन्य पार्षद का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक अफ्रीकी मूल के फुटबॉल कोच को भाषा को लेकर चेतावनी दी थी। इन घटनाओं ने नगर निगम स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सीमाओं और जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।

निजता बनाम सार्वजनिक नैतिकता

यह पूरा मामला एक बुनियादी सवाल खड़ा करता है—क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों को सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की निजी स्वतंत्रता में दखल देने का अधिकार है? एक ओर सुरक्षा और स्थानीय शिकायतों का तर्क दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर इस वीडियो को नैतिक पुलिसिंग और युवाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया जा रहा है।

फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां कुछ लोग पार्षद की कार्रवाई को सुरक्षा के नजरिए से सही ठहरा रहे हैं, वहीं कई इसे नागरिक स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप मानते हुए कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

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दिल्ली मेट्रो अलर्ट: केबल चोरी के चलते धौला कुआं–शिवाजी स्टेडियम के बीच ट्रेनों की रफ्तार कम

नई दिल्ली:
दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर रविवार सुबह धौला कुआं और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों के बीच सिग्नलिंग केबल काटे जाने की घटना सामने आई है। शरारती तत्वों द्वारा लगभग 800 मीटर केबल काटी गई, हालांकि केबल चोरी नहीं हो सकी। कटी हुई केबल मेट्रो पिलर नंबर-09 के पास बरामद हुई।

डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन) के अनुसार इस घटना से सिग्नलिंग सिस्टम प्रभावित हुआ है, जिसके चलते नई दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों की गति 25 किमी प्रति घंटा कर दी गई है। हालांकि एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के अन्य हिस्सों में मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। आमतौर पर इस रूट पर ट्रेनें हर 10 मिनट के अंतराल पर चलती हैं।

रात में किया जाएगा मरम्मत कार्य

डीएमआरसी ने बताया कि दिन के समय केबल बदलने से यात्रियों को अधिक परेशानी हो सकती है, इसलिए मरम्मत का काम रात में मेट्रो सेवा समाप्त होने के बाद किया जाएगा। इसके लिए दिन में ही आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

यात्रियों को दी जा रही लगातार जानकारी

यात्रियों को स्थिति से अवगत कराने के लिए स्टेशनों और ट्रेनों में लगातार घोषणाएं की जा रही हैं। डीएमआरसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर यात्रा की योजना बनाएं

पुलिस के संपर्क में डीएमआरसी

डीएमआरसी ने इस असुविधा के लिए यात्रियों से खेद जताया है और कहा है कि मामले को लेकर पुलिस और कानून व्यवस्था एजेंसियों के संपर्क में हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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दिल्ली में साइबर माफिया का आतंक! बुजुर्ग दंपति को 2 हफ्ते डिजिटल अरेस्ट कर उड़ाए 14 करोड़

नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला अंजाम दिया है। साइबर ठगों ने NRI डॉक्टर दंपति को करीब दो सप्ताह से अधिक समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर उनसे 14 करोड़ 85 लाख रुपये की ठगी कर ली।

पीड़ित दंपति की पहचान डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है। दोनों करीब 48 वर्षों तक अमेरिका में रहकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में सेवा दे चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद वर्ष 2015 में वे भारत लौटे और तब से समाजसेवा से जुड़े हुए हैं।

फर्जी केस और अरेस्ट वारंट का डर

डॉक्टर दंपति को 24 दिसंबर को साइबर ठगों का फोन आया। कॉल करने वालों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज होने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही। ठगों ने उन्हें पीएमएलए (PMLA) और मनी लॉन्ड्रिंग कानून का हवाला देकर डराया और राष्ट्रीय सुरक्षा का नाम लेकर मानसिक दबाव बनाया।

इसके बाद ठगों ने 24 दिसंबर से 10 जनवरी तक डॉक्टर दंपति को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।

8 बैंक खातों में कराए पैसे ट्रांसफर

डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने डॉक्टर दंपति से आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए।
डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने बताया कि जब भी उन्हें घर से बाहर जाना होता या किसी से बात करनी होती, ठग उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल करके सब कुछ देखते-सुनते रहते थे, ताकि वे किसी को इस ठगी की जानकारी न दे सकें।

जब डॉक्टर इंदिरा पहली बार बैंक में बड़ी रकम ट्रांसफर करने पहुंचीं, तो बैंक मैनेजर ने भी उनसे कारण पूछा। लेकिन ठगों द्वारा सिखाई गई कहानी उन्होंने बैंक अधिकारी को बता दी, जिससे किसी को शक नहीं हुआ।

पुलिस स्टेशन तक भी पहुंचे ठग

10 जनवरी की सुबह ठगों ने दंपति से कहा कि अब पैसा आरबीआई द्वारा रिफंड किया जाएगा और इसके लिए उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन जाना होगा।
डॉक्टर इंदिरा जब थाने पहुंचीं, तब भी ठग वीडियो कॉल पर उनके साथ जुड़े रहे। उन्होंने थाने के SHO से भी ठगों की बात कराई। पीड़िता के मुताबिक ठग पुलिसकर्मियों से भी बदतमीजी से बात कर रहे थे।

इसी दौरान डॉक्टर इंदिरा तनेजा को पहली बार एहसास हुआ कि उनके साथ 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है।

स्पेशल सेल को सौंपी गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इसकी जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी है। पुलिस अब ठगों की पहचान, कॉल ट्रेसिंग और ट्रांजैक्शन डिटेल्स खंगालने में जुटी हुई है।

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