Saturday, May 16, 2026
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Delhi High Court on Pollution: साफ हवा पर सवाल, एयर प्यूरीफायर के GST पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लगातार बने वायु प्रदूषण के गंभीर संकट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र और संबंधित एजेंसियों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति के बीच एयर प्यूरीफायर पर लगाए जा रहे 18 प्रतिशत जीएसटी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अधिकारी नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध नहीं करा सकते, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम किया जा सकता है।

यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण (मेडिकल डिवाइस) की श्रेणी में दोबारा शामिल करने और उस पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मौजूदा प्रदूषण हालात में एयर प्यूरीफायर एक लग्ज़री नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं।

‘जब लोग मर रहे हैं, तब समय-सीमा का क्या मतलब’

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा, “जब हजारों लोग प्रदूषण की वजह से बीमार हो रहे हैं और जान गंवा रहे हैं, तब समय-सीमा का क्या औचित्य है?” अदालत ने यह भी कहा कि हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार है, लेकिन प्रशासन इस बुनियादी जरूरत को पूरा करने में विफल रहा है।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकारें प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम हैं, तो कम से कम ऐसे उपाय किए जाने चाहिए जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सके। इसी संदर्भ में एयर प्यूरीफायर पर ऊंचे जीएसटी को लेकर सवाल उठाया गया।

केंद्र सरकार को फटकार

हाई कोर्ट ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी कदम न उठाने पर केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि हर साल दिल्ली और एनसीआर में यही स्थिति दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आती।

मामले में अदालत ने संकेत दिया कि यह सिर्फ कर नीति का सवाल नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। इस याचिका पर दोपहर 2:30 बजे फिर से सुनवाई होनी है।

बुधवार को कैसी रही दिल्ली की हवा?

इस बीच, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार दर्ज किया गया। मंगलवार को जहां AQI 415 था और यह ‘गंभीर’ श्रेणी में था, वहीं बुधवार सुबह AQI घटकर 336 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।

AQI मानकों के अनुसार 0–50 ‘अच्छा’, 51–100 ‘संतोषजनक’, 101–200 ‘मध्यम’, 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बेहद खराब’ और 401–500 ‘गंभीर’ माना जाता है।

हालांकि AQI में मामूली सुधार के बावजूद, दिल्ली की हवा अब भी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बनी हुई है। हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं

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Air Pollution Row: दिल्ली की खराब हवा पर कांग्रेस भड़की, देवेंद्र यादव ने BJP, AAP और LG को घेरा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने दिल्ली की खराब हवा को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), आम आदमी पार्टी (AAP) और उपराज्यपाल (LG) तीनों पर निशाना साधा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है, लेकिन जिम्मेदार संस्थाएं एक-दूसरे पर आरोप लगाने में लगी हुई हैं।

देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से इस पर सिर्फ राजनीति हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों ने मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से लेने में नाकामी दिखाई है। कांग्रेस नेता के मुताबिक, जब भी हवा खराब होती है, तब सिर्फ आपात कदम उठाए जाते हैं, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस नीति लागू नहीं की गई।

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि BJP शासित केंद्र सरकार और AAP की दिल्ली सरकार दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों से बच रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने में विफलता दिखाई, वहीं दिल्ली सरकार ने जमीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के वादों को लागू नहीं किया। देवेंद्र यादव ने कहा कि हर साल पराली, धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर वही बहाने दोहराए जाते हैं।

LG की भूमिका पर भी सवाल

देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि LG के पास प्रशासनिक अधिकार होने के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी पहल सामने नहीं आई है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र, राज्य और LG के बीच तालमेल की कमी का सीधा असर आम जनता की सेहत पर पड़ रहा है।

जनता भुगत रही है कीमत

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में सांस और आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारें सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब हर साल स्थिति बिगड़ती है, तो पहले से तैयारी क्यों नहीं की जाती।

कांग्रेस ने रखी मांग

देवेंद्र यादव ने मांग की कि प्रदूषण से निपटने के लिए सभी राजनीतिक दल मिलकर एक दीर्घकालिक और वैज्ञानिक योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली को राजनीति का अखाड़ा नहीं, बल्कि रहने लायक शहर बनाने की जरूरत है।

कुल मिलाकर, दिल्ली की खराब हवा ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस के तीखे हमलों के बीच अब देखना होगा कि BJP, AAP और LG इस पर क्या जवाब देते हैं और जनता को साफ हवा कब नसीब होती है।

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दिल्ली में christmas tree बनी आकर्षण का केंद्र, हर ओर उत्सव का माहौल

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में क्रिसमस की रौनक पूरी तरह से छा चुकी है। सर्द मौसम के बीच रंग-बिरंगी रोशनियों से सजे क्रिसमस ट्री लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बाजारों से लेकर चर्चों, मॉल और सार्वजनिक स्थलों तक क्रिसमस ट्री की सजावट ने शहर को उत्सव के रंग में रंग दिया है। हर तरफ खुशियों, उल्लास और भाईचारे का माहौल देखने को मिल रहा है।

दिल्ली के प्रमुख बाजारों—कनॉट प्लेस, साउथ एक्सटेंशन, लाजपत नगर, करोल बाग और चांदनी चौक—में क्रिसमस की तैयारियां जोरों पर हैं। दुकानों के बाहर सजे क्रिसमस ट्री, सांता क्लॉज की मूर्तियां, सितारे और झालरें ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, जो अपने पसंदीदा क्रिसमस ट्री, सजावटी गेंदें और स्टार खरीदते नजर आ रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि क्रिसमस से पहले बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई है।

वहीं, राजधानी के चर्चों में भी क्रिसमस ट्री विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सैकड़ो लाइटों, मोमबत्तियों और फूलों से सजे चर्च श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल, सेंट जेम्स चर्च और अन्य चर्चों में प्रार्थना सभाओं की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चर्च परिसरों में लगाए गए विशाल क्रिसमस ट्री न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि शांति और प्रेम का संदेश भी दे रहे हैं।

शॉपिंग मॉल और आवासीय सोसायटियों में भी क्रिसमस का उत्साह कम नहीं है। मॉल्स में खास थीम पर सजाए गए क्रिसमस ट्री, लाइव म्यूजिक और बच्चों के लिए सांता क्लॉज के साथ फोटो सेशन लोगों को खूब भा रहे हैं। कई सोसायटियों में सामूहिक रूप से क्रिसमस ट्री सजाने के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां बच्चे और बुजुर्ग मिलकर सजावट में हिस्सा ले रहे हैं।

क्रिसमस के अवसर पर शहर में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। विभिन्न संस्थाएं जरूरतमंदों के लिए उपहार वितरण और सामुदायिक भोज का आयोजन कर रही हैं। लोगों का कहना है कि क्रिसमस ट्री सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और उम्मीद का प्रतीक है।

कुल मिलाकर, दिल्ली में क्रिसमस ट्री इस त्योहार की आत्मा बनकर उभरी है। बाजारों की चहल-पहल हो या चर्चों की प्रार्थनाएं, हर जगह क्रिसमस ट्री के आसपास खुशियों का माहौल नजर आ रहा है, जो राजधानी की सांस्कृतिक विविधता और आपसी भाईचारे को खूबसूरती से दर्शाता है।

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New Year 2026: दिल्ली में जश्न के दौरान ‘धुरंधरों’ पर कड़ी नजर, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

नई दिल्ली: क्रिसमस और नए साल के जश्न को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अव्यवस्था से निपटने के लिए करीब 20,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कर्मियों की तैनाती पाली के आधार पर की जाएगी और सभी थाना प्रभारी (SHO) अपनी टीमों के साथ सड़कों पर मौजूद रहेंगे।

पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से बड़ी संख्या में लोगों के दिल्ली आने की संभावना को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राजधानी की सीमाओं पर अतिरिक्त नाके लगाए जाएंगे और अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित उपद्रव पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

ट्रैफिक और हुड़दंग पर खास नजर

अधिकारियों के मुताबिक, यातायात पुलिस और अर्धसैनिक बलों समेत लगभग 20,000 कर्मी गुंडागर्दी, हुड़दंग और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर नजर रखेंगे। शराब पीकर वाहन चलाने, तेज रफ्तार और बाइक स्टंट जैसी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। ट्रैफिक पुलिस की मदद के लिए विभिन्न थानों से अतिरिक्त बल भी तैनात किए जाएंगे।

चर्च और एंट्री प्वाइंट्स पर कड़ी सुरक्षा

क्रिसमस के मद्देनजर शहर के 10 से अधिक प्रमुख स्थानों पर पहले ही पुलिस बल तैनात किया जा चुका है। इसके अलावा, दिल्ली में प्रवेश करने वाले 15 से अधिक एंट्री प्वाइंट्स पर भी सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और वाहनों की सघन जांच की जाएगी।

SHO को सड़कों पर रहने के निर्देश

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर सभी थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी टीमों के साथ फील्ड में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी करें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।

दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे जश्न के दौरान नियमों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि सभी के लिए त्योहार सुरक्षित और शांतिपूर्ण रह सके।

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दिल्ली LG का ‘लेटर बम’, केजरीवाल को 15 पन्नों की चिट्ठी, 11 साल की लापरवाही पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सियासत एक बार फिर गरमा गई है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को 15 पन्नों का पत्र लिखकर न सिर्फ प्रदूषण के लिए जिम्मेदारी तय की है, बल्कि कई गंभीर आरोप और दावे भी किए हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर ‘चिट्ठी युद्ध’ छिड़ गया है।

एलजी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में प्रदूषण को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि अगर बीते 11 वर्षों में ठोस कदम उठाए गए होते, तो राजधानी की हवा इतनी जहरीली न होती।

प्रदूषण पर कथित बयान का जिक्र

पत्र में उपराज्यपाल ने एक चौंकाने वाला दावा भी किया है। उन्होंने लिखा कि जब वह मुख्यमंत्री रहते केजरीवाल से प्रदूषण पर चर्चा करते थे, तो जवाब मिलता था कि यह केवल 15–20 दिनों का मामला है और इसके बाद मीडिया व एनजीओ इसे भूल जाएंगे। एलजी ने इस रवैये को दिल्लीवासियों की सेहत के साथ खिलवाड़ बताया है।

हार के बाद संवाद बंद करने का आरोप

वीके सक्सेना ने पत्र में यह भी कहा कि चुनावी हार के बाद केजरीवाल ने संवाद के रास्ते बंद कर दिए। उनके मुताबिक, संस्थागत बातचीत और समन्वय के अभाव ने प्रशासनिक स्तर पर फैसलों को प्रभावित किया, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास कमजोर पड़े।

11 साल की लापरवाही का आरोप

एलजी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि दिल्ली में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति किसी एक मौसम या घटना का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों की लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने केजरीवाल पर 11 साल के शासन में प्रभावी नीतियां लागू न करने का आरोप लगाया।

फिलहाल, यह पत्र सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर एलजी ने जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की है, तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की ओर से जवाब आने की संभावना जताई जा रही है। वायु प्रदूषण के बीच शुरू हुआ यह सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।

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