Saturday, June 13, 2026
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10 मिनट की डिलीवरी पर लगाम: कैट की वर्षों पुरानी मुहिम पर सरकार की मुहर

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म द्वारा दी जा रही 10 मिनट की अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी सेवा पर रोक लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस कदम का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लिया गया एक मानवीय और दूरदर्शी फैसला बताया है। कैट के अनुसार, यह निर्णय डिलीवरी कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाला है, जो अब तक इन प्लेटफॉर्म के अव्यावहारिक समय के दबाव में अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे। कैट ने इसे संगठन द्वारा वर्षों से की जा रही मांग और संघर्ष की बड़ी जीत करार दिया है।

संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे को उठाने वाले कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यह कार्रवाई उस मुहिम का परिणाम है जो मानसून सत्र 2024 में शुरू हुई थी। उस दौरान उन्होंने संसद में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश कर डार्क स्टोर्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और क्विक कॉमर्स के अनियंत्रित विस्तार पर लगाम लगाने की मांग की थी। खंडेलवाल ने बार-बार सरकार को आगाह किया था कि 10 मिनट का मॉडल न केवल शहरी नियोजन को बिगाड़ रहा है, बल्कि छोटे व्यापारियों को खत्म कर डिलीवरी कर्मियों पर असहनीय मानसिक और शारीरिक दबाव बना रहा है। इस संबंध में 22 अप्रैल 2025 को एक राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ई-कॉमर्स की ‘डार्क रियलिटी’ को देश के सामने उजागर किया गया था।

कैट ने अक्टूबर 2025 में भी केंद्र सरकार को एक विस्तृत पत्र भेजकर श्रम कानूनों के उल्लंघन और डिलीवरी कर्मियों के शोषण की विस्तृत जानकारी साझा की थी। श्री खंडेलवाल का मानना है कि आज की गई यह कार्रवाई इस बात की पुष्टि करती है कि क्विक कॉमर्स के इकोसिस्टम को केवल सतही सुधारों की नहीं, बल्कि बड़े संरचनात्मक बदलावों की आवश्यकता है। कैट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई कंपनियां हादसों के बाद जिम्मेदारी लेने से कतराती रही हैं, जिस पर अब लगाम लगेगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में भी देश में एक न्यायसंगत, पारदर्शी और कानून सम्मत डिजिटल व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करते रहेंगे।

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आस्था की अटूट शक्ति: तिमारपुर में गिरे मंदिर के मलबे से उपजी सामाजिक एकता की नई मिसाल

दिल्ली दर्पण ब्यूरो
तिमारपुर, दिल्ली:
कभी-कभी आपदाएँ केवल विनाश लेकर नहीं आतीं, बल्कि वे समाज के सोए हुए संकल्प और आपसी प्रेम को जगाने का माध्यम भी बन जाती हैं। तिमारपुर के बुद्ध बाज़ार रोड स्थित उस प्राचीन मंदिर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहाँ प्रकृति के एक प्रहार ने श्रद्धालुओं के दिलों को तो झकझोरा, लेकिन उनकी आस्था को और अधिक सुदृढ़ कर दिया।

जब आस्था की दीवारें गिरीं, तो फफक पड़े श्रद्धालु
कुछ दिन पहले जब एक विशालकाय पुराना पेड़ अचानक इस प्राचीन मंदिर पर गिरा, तो वह न केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा था जो ढहा, बल्कि हज़ारों श्रद्धालुओं की स्मृतियाँ और भावनाएँ भी मलबे में दब गईं। यह मंदिर दशकों से क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र था। हादसे के बाद मंदिर की क्षतिग्रस्त स्थिति को देखकर कई बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों की आँखें नम थीं। ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उनके घर का ही कोई हिस्सा छीन लिया हो।


संकट में दिखी एकजुटता की अलख
लेकिन शोक की यह घड़ी अधिक लंबी नहीं चली। दुख ने तिमारपुर के निवासियों को बांटने के बजाय एक सूत्र में पिरो दिया। बिना किसी सरकारी मदद का इंतज़ार किए, स्थानीय लोग खुद फावड़े और टोकरियाँ लेकर निकल पड़े। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं—सभी ने मिलकर मलबे को साफ किया। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एक लक्ष्य के लिए खड़ा होता है, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।


मकर संक्रांति: नई शुरुआत का पावन संकल्प
आज, 14 जनवरी को जब पूरा देश मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव मना रहा है, तिमारपुर के इस मंदिर प्रांगण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। विधिवत मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ मंदिर के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया गया।
श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने श्रम और सामर्थ्य से इस मंदिर को पहले से भी भव्य रूप देंगे। वहां उपस्थित एक बुजुर्ग ने भावुक होते हुए कहा, “पेड़ ने मंदिर की छत तोड़ी है, हमारी आस्था नहीं। हम इसे फिर से खड़ा करेंगे, और इस बार यह ईंटों से ज्यादा हमारे आपसी प्रेम से बना होगा।”
एकता की प्रेरणादायक मिसाल
तिमारपुर की यह घटना केवल एक मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी नहीं है; यह कहानी है उस अजेय मानवीय भावना की, जो आपदा को अवसर में बदलना जानती है। आज बुद्ध बाज़ार रोड से गुजरने वाला हर व्यक्ति उस जगह को देखकर गौरवान्वित महसूस कर रहा है, जहाँ मलबे के बीच से सामाजिक समरसता की एक नई इबारत लिखी जा रही है।

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मेहरौली के सेंट जॉन्स स्कूल में नागरिक जागरूकता कार्यक्रम: खेल-खेल में सीखीं लोकतंत्र की बारीकियां

-उज्जवल प्रताप , दिल्ली दर्पण ब्यूरो
मेहरौली, नई दिल्ली:
छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना जगाने के उद्देश्य से सेंट जॉन्स स्कूल, मेहरौली में एक विशेष सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पहल मेहरौली पुलिस स्टेशन और ‘आजाद हिंद सोशल बॉडी’ के साझा सहयोग से पूरी हुई।
इस एक दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “पावर एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी गेम” रहा। इसमें 14 से 15 वर्ष की आयु के छात्रों ने हिस्सा लिया और यह समझा कि सत्ता और जिम्मेदारी एक-दूसरे के पूरक कैसे हैं।
रोल रिवर्सल से बढ़ाया आत्मविश्वास
कार्यक्रम के प्रथम चरण में छात्रों ने ‘रोल रिवर्सल’ गतिविधि के तहत स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षक और वक्ता की भूमिकाएं निभाईं। “देश के लिए मेरा योगदान” विषय पर बोलते हुए नन्हे नेतृत्वकर्ताओं ने अपनी भविष्य की योजनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी पर बेबाक विचार रखे।
वोट से बढ़कर है संवाद


दूसरे चरण में आयोजित “वोट या आवाज़” गतिविधि ने छात्रों को लोकतंत्र की गहराई से रूबरू कराया। मतदान और उसके बाद हुई खुली चर्चा के माध्यम से बच्चों को यह सिखाया गया कि लोकतंत्र केवल वोट देने का नाम नहीं है, बल्कि तर्कसंगत संवाद और विचार-विमर्श ही इसकी असली बुनियाद है।
जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख
समारोह के समापन पर उपस्थित पुलिस प्रतिनिधियों और आयोजकों ने छात्रों को कानून के प्रति सम्मान दिखाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। स्कूल प्रबंधन ने इस आयोजन को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक सार्थक मंच बताया।

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10 मिनट डिलीवरी पर रोक! ब्लिंकइट, स्विगी, जोमैटो, जेप्टो पर लगा ब्रेक, राघव चड्ढा बोले – हम जीत गए

दिल्ली दर्पण ब्यूरो|नई दिल्ली:- क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट, स्विगी, जोमैटो और जेप्टो की ‘10 मिनट डिलीवरी’ ब्रांडिंग हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद राघव चड्ढा ने इसे जनता और गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा, “सत्यमेव जयते। साथ मिलकर हमने यह लड़ाई जीती है।”

राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक समय पर लिया गया, निर्णायक और मानवीय कदम है। उन्होंने कहा कि जब डिलीवरी राइडर्स की जैकेट, टी-शर्ट और बैग पर ‘10 मिनट’ लिखा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता है, तो इसका दबाव वास्तविक, लगातार और बेहद खतरनाक होता है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला डिलीवरी राइडर्स के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

गिग वर्कर्स पर था असहनीय दबाव

राघव चड्ढा ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर्स से बातचीत की है। कई राइडर्स ने बताया कि वे ज्यादा काम करते हैं, कम पैसे पाते हैं और एक अवास्तविक वादे को पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

उन्होंने कहा,
“अगर एक मिनट भी देर हो जाए, तो उन्हें ऐप से लॉग आउट कर दिया जाता है, इंसेंटिव कट जाता है और ग्राहकों की गालियां सुननी पड़ती हैं। यह सिस्टम अमानवीय है।”

गिग वर्कर्स की हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर

एक इंटरव्यू में राघव चड्ढा ने कहा कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, जेप्टो, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स जिन लोगों के दम पर यूनिकॉर्न बने हैं, वही गिग वर्कर्स सबसे ज्यादा शोषित हैं।

उन्होंने कहा,
“ये लोग रोज़ 14 से 16 घंटे काम करते हैं। न कोई फिक्स वेतन, न पीएफ, न जॉब सिक्योरिटी, न पेड लीव। इनकी हालत दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर है।”

खतरनाक ड्राइविंग और मानसिक तनाव

राघव चड्ढा ने कहा कि 10 मिनट में डिलीवरी करने के दबाव में राइडर्स तेज और खतरनाक ड्राइविंग करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही वे लगातार मानसिक तनाव, एंग्जायटी और दिल की धड़कन की समस्याओं से जूझते हैं।

उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स के लिए

  • न्यूनतम वेतन
  • अधिकतम काम के घंटे
  • सामाजिक सुरक्षा
    जैसी बुनियादी सुविधाएं तय की जानी चाहिए।

जनता और गिग वर्कर्स को धन्यवाद

राघव चड्ढा ने उन सभी नागरिकों का धन्यवाद किया जो इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा,
“आपने इंसानी जान, सुरक्षा और गरिमा के पक्ष में मजबूती से आवाज उठाई।”

गिग वर्कर्स को संदेश देते हुए उन्होंने कहा,
“आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं।”

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वसंत पंचमी पर जीवंत होगा महाराजा अग्रसेन और माता माधवी का दिव्य विवाह प्रसंग : नंदकिशोर अग्रवाल

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– दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

ऐतिहासिक पहल और महत्व दिल्ली अग्रोहा विकास ट्रस्ट द्वारा भारतीय संस्कृति और वैश्य समाज की गौरवशाली परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक अद्वितीय आयोजन किया जा रहा है । ट्रस्ट के चेयरमैन श्री नंदकिशोर अग्रवाल और अध्यक्ष श्री बी.पी. गर्ग ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार महाराजा अग्रसेन का विवाह नागवंश की राजकुमारी माता माधवी से वसंत पंचमी के पावन दिन संपन्न हुआ था । यह आयोजन इतिहास में पहली बार इतने भव्य और सांस्कृतिक रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है । ट्रस्ट का मानना है कि यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति का पुनर्जागरण है । 

नागलोक से गहरा नाता ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, माता माधवी सम्राट महाराजा महीधर की सुपुत्री थीं, जिनका ‘नागलोक’ राज्य तत्कालीन समय में वर्तमान के मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड तक विस्तृत था । यही कारण है कि आज भी वैश्य समाज नागलोक को अपनी ननिहाल के रूप में श्रद्धा के साथ याद करता है । इस दिव्य विवाह के मंचन के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को उनके समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है । महामंत्री डॉ. जयकिशन गर्ग ने इसे एक अद्वितीय और ऐतिहासिक अवसर बताया है

सांस्कृतिक कार्यक्रम और आकर्षणयह भव्य आयोजन 22 जनवरी 2026 को सायं 4:30 बजे से शाह ऑडिटोरियम, सिविल लाइंस में होगा । महिला अध्यक्षा श्रीमती गीता गुप्ता ने बताया कि मंचन में माता माधवी द्वारा मां पार्वती की आराधना और गणगौर पूजा के प्रारंभ की कथा भी दिखाई जाएगी । इसके साथ ही युवाओं के लिए प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ और महिलाओं के लिए रचनात्मक प्रतियोगिताएं भी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होंगी । ट्रस्ट ने संपूर्ण वैश्य समाज से इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने हेतु अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया है ।​

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