Friday, May 15, 2026
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कहां कैसे होंगे इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग प्वाइंट

खुशबू काबरा, संवाददाता
नई दिल्ली।।
राजधानी को प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। दिल्ली सरकार ने कदम उठाते हुए 100  चार्जिंग प्वाइंट स्टेशन नेटवर्क लगाने का फैसला ले लिया है। चार्जिंग स्टेशनों का टेंडर पास कर दिया गया है।

अगले 12 महीनों में 500 ई–वाहनों के लिए यहां एक साथ चार्जिंग करने की सुविधा उपल्बध होगी। अधिकतर स्टेशन डीएमआरसी और डीटीसी डिपो पर बनाए जाने हैं। ऐसे में सभी वाहनों की जरुरत पूरी करने के चार्जिंग स्टेशनों पर 20 प्रतिशत स्लो चार्जर और 10 प्रतिशत हाई स्पीड चार्जर अनिवार्य हैं।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार ने देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन का टेंडर जारी किया है। इस योजना के तैयार होने के बाद लोगों को घर से बाहर निकलने के बाद चार्जिंग सुविधा उपल्बध होगी और वह इस फैसीलिटी का लाभ उठा पाएंगे। इस बारे में स्वास्थ्य मेंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि ये चार्जिंग प्वाइंट सभी लोगों को उपल्बध रहेंगें और वह चाहते है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदें और चार्जिंग को लेकर बिलकुल भी परेशान नहीं हों।

आपको बता दे कि ई – वाहनों के लिए अलग से चार्जिंग स्टोशन बनाया जाएगा। यह बसें अलग से आती हैं और वह कन्वर्ट नहीं होती हैं, तो वहीं 100 चार्जिंग स्टेशनों पर यात्रियों से सामान्य शुल्क लिया जाएगा। डीएमआरसी ने पहले से ही 4-5 रुपये प्रति यूनिट शुल्क तय कर रखा है। उसी के अनुसार शुल्क लिया जाएगा।  लगाए जाने प्वाइंट इस प्रकार हैं —

 ·    दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 71

·         दिल्ली ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन 11

·         ट्रांसपोर्ट विभाग 4

·         बीएसईएस राजधानी 3

·         बीएसईएस यमुना 3

·         टाटा पॉवर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन 3

·         डीएसआईआईडीसी 3

·         दिल्ली जल बोर्ड 1

·         सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण 

एमसीडी के रिटायर 25 हजार कर्मचारियों को 6 माह से पेंशन नहीं

पत्रिका संवाददाता
नई दिल्ली।।
राजधानी में एमसीडी के  25 हज़ार पूर्व कर्मचारियों को 6 महीने से पेंशन नहीं मिला है। पेंशन पर गुजारा करने वाले परिवार में तनाव का महौल। कईयों ने बीमारी में दम तोड़ दिया और कई के इलाज और तिमारदारी के लिए पैसे नहीं हैं। सरकार बेखबर बेपरवाह बनी हुई है।


ऐसे ही एक पेंशनधारी  कर्मचारी रोते हुए बताया कि उसका बेटा मर गया है। उसने बताया कि उसे कैशलेस हेल्थ कार्ड मिला हुआ है, जिसका कोई फायदा नहीं है। प्राइवेट अस्पताल  कैशलेस कार्ड नहीं मानते हैं। उन्हें कैश चाहिए। उन्होंने बीमारी और पेंशन का कागज देखते हुए कहा अब हम हम एफआईआर दर्ज़ कराएंगे। कोर्ट जाएंगे। मुकदमा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि बीमारी में पेंशनधारी के बच्चों की नौकरियां  भी चली गई हैं। इस कारण परिवार की हालत बहुत ही दयनीय हो चुकी है। इसके अलावा अधिकतर कर्मचारियों की राजीरोटी पेंशन पर ही चलती है। वह भी नहीं मिली रही है। पेंशन की मांग को लेकर कर्मचारी प्रदर्शन भी कर चुके हैं। थक गए हैं। अब और हड़ताल करने की क्षमता नहीं है। लिहाज़ा अब उन्होने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही वे अब एमसीडी कमिश्नर पर एफआईआर दर्ज़ करवाने की तयारी में हैं।  इन रिटायर्ड कर्मचारियों ने दिल्ली दर्पण टीवी  के माध्यम से अपना दर्ज़ साझा किया। अपनी समस्या बताते—बताते कई कर्मचारी रो पड़े।

कोर्ट तक जा पहुँचा इंटरनेट बैन का मामला

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। राजधानी के तीन बॉर्डर पर किसान आंदोलनों के चलते इंटरनेट की सेवा बैन करने का मामला कोर्ट तक जा पहुंचा है। गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा की वजह से बार्डर पर इंटरनेट की सेवा बंद कर दी गई थी। जिसपर किसान और कई लोगों ने भी इसका विरोध जताया है। अमेरिकी पॉप स्टार रिहाना ने भी एक आर्टिकल शेयर कर ट्वीट किया था, जिसकी वजह से देशभर में बवाल मच गया।

आपको बता दें कि यह याचिका वकील संप्रीत सिंह अजमानी और पुष्पिंदर सिंह ने दर्ज की है। जिसमें बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेट देश के लोगों का अधिकार है, जिसे कोई जनता से नहीं छीन सकता। बावजूद इसके अब जहां किसान आंदोलन चल रहा है वहां इंटरनेट बैन करना कहां तक सही है?

याचिका के जरिए अपनी बात रखते हुए उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि इस निलंबन को जल्द से जल्द हटाया जाए, ताकि किसानों को जो परेशानियां हो रही हैं उससे उन्हें छुटकारा मिल सके। इसके साथ – साथ याचिका में आरोप लगाया गया है कि गणतंत्र दिवस के दिन हुई एक प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस के द्वारा चलाई गई गोली से हुई है। जिसपर उन्होंने कोर्ट से न्याय की मांग की है।

यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जा पहुँचा है। देश और विदेश की जानी मानी हस्तियां भी किसान आंदोलन को अपना समर्थन दे चुकी है। जिसपर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह भारत का मामला है। और वह खुद इससे निपटने की क्षमता रखता है।

इमर्जेंसी ऐप लॉन्च करने की तैयारी में किसान सोशल आर्मी

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली। बॉर्डर पर किसानों को हो रही इंटरनेट की समस्या की वजह से किसान सोशल आर्मी एक इमर्जेंसी ऐप लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा कि यह ऐप काफी कम एमबी का होगा जिसे धीमे इंटरनेट से भी काफी आसानी से चलाया जा सकेगा।

ऐप लॉन्च की जानकारी मिलने के बाद कहा जा रहा है कि पहले इस ऐप को लेकर एक बैठक की जाएगी। जिसमें ऐप के सभी फायदे और नुकसान देखे जाएंगे। जानकारी के अनुसार इसमें लोकेशन और आसपास में हुई सभी घटनाओं की जानकारी इसके जरिए दी जाएगी।

बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा की वजह से किसान काफी परेशान हो रहे हैं। कुछ लोगों के फोन में इंटरनेट चलता है तो कुछ लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। जिसकी वजह से यह कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। ताकि सभी किसान अपने घर परिवार और आपस में बातचीत कर सकें। सबसे पहले इसे टीकरी बॉर्डर पर लॉन्च किया जाएगा और अगर यह सफल साबित हुआ तो इसे सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर पर भी लॉन्च किया जाएगा ।

दिल्ली में चक्का जाम का बेअसर, सिर्फ जेएनयू के कुछ छात्रों ने दिखाया दम

शिवानी मोरवाल, संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली में शनिवार को किसान आंदोलनकरियों द्वारा नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर दूसारी बार चक्क जाम किया। इससे पहले भी वह 8 जनवरी को भारत बंद करवा चुकी है। इस बार का माहौल बदला हुआ था। कारण 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस इस बार पूरी तरह से मुस्तैद दिखी। इस को लेकर जब दिल्ली दर्पण की टीम ने दिल्ली की सड़को का जायजा लिया तो तस्वीरें कुछ और ही बयां कर रही थी। आपको बता दें कि दिल्ली के बड़े-बड़े चौरहे पर किसी प्रकार का कोई प्रभाव देखने को नहीं था।  साथ ही कही भी जाम की स्थित देखने को नहीं मिली।

जब इस बारे में लोगों से पूछा गया कि कैसा है दिल्ली की सड़को का हाल तो उनका कहना था कि दिल्ली में भी फिलहाल कहीं भी चक्का जाम की स्थित नहीं देखने को मिली।  आपको बता दे की चक्का जाम के लिए किसानों को दोपहर 12बजें से लेकर 3बजें तक का समय था।

किसान नेताओं ने दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं किया। क्योंकि सरकार की तरफ से मीटिंग के लिए कभी भी बुलाए जाने की उम्मीद थी। पर गुरुग्राम, अमृतसर जैसे कई राज्यों में चक्का जाम का असर दिखा। साथ ही किसानों का जत्था सड़को पर भी उतर आया।
दिल्ली-एनसीआर में किसानों के चक्का जाम का बेहद मामूली के बावजूद  कुछ छिटपुट प्रदर्शनकारी नजर आए। हालांकि वे कहीं भी चक्का जाम करने में कामयाब नहीं हुए। इस बीच आइटीओ से लाल किला की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित शहीदी पार्क के सामने दोपहर एक बजकर 27 मिनट पर JNU से जुड़े लेफ्ट विंग SFI के करीब आठ स्टूडेंट अचानक पोस्टर-बैनर लेकर वहां आ गए और नारेबाजी करने लगे। दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

वहीं, किसान संगठनों द्वारा दिल्ली में चक्का जाम नहीं करने के  एलान के बावजूद कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया है। 50,000 सुरक्षा कर्मी सड़कों पर  हैं। इस बीच केंद्रीय सचिवालय, जामा मस्जिद, लाल किला, जनपथ और विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं।


बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत पूरे देश में चक्का जाम का एलान किया था। वहीं, 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के मद्देनजर उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस भी हाई अलर्ट पर थी।  किसान संगठनों की ओर से बुलाए गए चक्का जाम को लेकर दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने कमर कस ली थी। क्योंकि दिल्ली-हरियाणा के 2 बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा के किसान जमा हैं।