दिल्ली एनसीआर।। फरीदाबाद में किसानों ने 6 फरवरी को समय 12:00 बजे से 3:00 बजे तक चक्का जाम करने के लिए किए गए आह्वान को लेकर फरीदाबाद पुलिस पूर्णता अलर्ट पर है। पुलिस ने प्रत्येक परिस्थिति से निपटने के लिए अपने सभी प्रबंध पुख्ता कर लिए हैं।
इस दौरान फरीदाबाद शहर में करीब 3500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इतना ही नहीं शहर के अलग-अलग चौराहे पर पुलिस द्वारा लोगों पर सीसीटीवी कैमरा से भी निगाह रखी जाएगी। सभी पुलिस उपायुक्त को अपने-अपने जोन में टियर गैस, एंटी राइट्स व्हीकल, एंबुलेंस, क्रेन और फायर ब्रिगेड से लैस रहने के निर्देश दिए गए हैं साथ ही केजीपी टोल टैक्स पर पुलिस रिजर्व बल तैनात किया गया है।
मोती नगर विधानसभा। मोती नगर विधानसभा के विधायक शिवचरण गोयल का जन्मदिन शनिवार 6 जनवरी 2021 को विधायक कार्यालय समुदाय भवन बी-ब्लॉक न्यू मोती नगर में बढ़ी ही धूम-धाम से मनाया गया। जिसमे क्षेत्र के सभी गणमान्य लोगों ने विधायक को फूल-माला व गुलदस्ता देकर उनके लम्बी उम्र की कामना की।
सैकड़ों लोगों ने विधायक कार्यालय में केक काटकर गोयल को बधाई। इसी क्रम में अपने जन्मदिन पर विधायक जी ने DDA ऑफिस के सामने लक्कड़ मंडी से चूनाभट्टी तक बनी RCC सड़क का उद्घाटन नारियल अर्पण कर के किया। जिसमे थाना कीर्ति नगर के SHO देवेन्दर यादव भी उपस्थित थे। साथ ही कीर्ति में बस रुट को वन-बे कराने पर सभी क्षेत्र वासियों ने उनका आभार परगट किया।
तत्पश्चात विधायक कार्यालय में हवन, व सुन्दर कांड के पाठ का कार्यक्रम भी रखा गया। जिसमे मोती नगर विधानसभा के सभी कर्मठ कार्यकर्ता मौजूद थे।
नई दिल्ली। दिल्ली में कोरोना के स्तर को कम होते देख दिल्ली सरकार ने छह अस्पतालों को कोविड अस्पताल की श्रेणी से हटा दिया है। उनमें गुरु तेग बहादुर अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय, डीसीबी हॉस्पिटल, सर गंगा राम अस्पताल, एएसपीजी अस्पताल, दीपचंद बंधु और एसआरसी अस्पताल का नाम शुमार है। इन अस्पतालों में अब दिल्ली की जनता ओपीडी की सेवाओं का लाभ उठा पाएगी।
आपको बता दें कि कोरोना के शुरुआती दौर में इसका काफी ज्यादा कहर देखने को मिल रहा था, जिसकी वजह से सरकार ने कई अस्पतालों में ओपीडी की सेवाएं बंद कर दी गई थी। को बंद कर के उसे कोविड अस्पताल घोषित कर दिया था। तो वहीं दूसरे बड़े कोविड अस्पतालों में बेड की क्षमता को घटा कर पहले से काफी कम कर दिया गया है।
महामारी के दौरान आपीडी बंद होने से लोगों को काफी दुविधाएं झेलनी पड़ रही थी। महामारी की वजह से कई लोगों की नौकरीया चली गई थी। कोई कमाई का साधन ना होने की वजह से लोग ना तो सरकारी अस्पताल जा पा रहे थे और न ही प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने के पैसे इकट्ठा कर पा रहे थे। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार के ओपीडी खोलने के फैसले को देख कर लगता है कि इससे लोगों की समस्याओं पर विराम लग पाएगा।
नई दिल्ली।। दिल्ली सरकार 9वीं के छात्रों के लिए नई योजना लेकर आई है। योजना को तहत 9वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को 5000 रुपये तक की विज्ञान छात्रवृत्ति को देने की मंजूरी मिल चूकी है। ऐसे में कहा गया है कि बुद्धिमान और विद्वान छात्रों के लिए ये काफी महत्वपर्ण कदम हैं। ऐसी योजनाओं को तहत छात्र अपनी प्रतिभाशाली से देश को आगे बढ़ाएंगे और वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर,आर्किटेक्ट इत्यादि बनके देश में पूर्ण विकास करेंगे।
आपको बता दे कि माध्यमिक कक्षाओं में स्कूली स्तर पर छात्रवृत्ति मिलने से विज्ञान शिक्षा को बढावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली सरकार बच्चों में उत्कृष्टता और वैज्ञानिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में 8वीं कक्षा के एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग वर्ग के 50 फिसदी पाने वाले बच्चें इसमे भाग ले सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि शिक्षा को डिजीटल बनाने के लिए सभी साहता देने को प्रतिबद्ध हैं। डिजीटलीकरण के लिए सभी चीजे सुनियोजित होगी। अब से शिक्षक, प्रधानाचार्य, अधिकारी गुणवत्ता शिक्षा पर फोकस करेगा।
दिल्ली के शिक्षा विभाग ने अब विद्यालयों व दफ्तरों में प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह डिजिटाइजेशन करने का फैसला ले लिया है इसके तहत शिक्षा विभाग अपने विभिन्न कार्यालयों में दैनिक कार्यों के लिए 1200 कंप्यूटर, 1200 एमएफपी प्रिंटर व 1200 यूपीएस भी लगाए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने इस योजना के लिए 10.85 करोड़ रुपये भी जारी किए हैं।
नई दिल्ली। कृषि कानूनों को रद्द करने पर अड़े किसानों को 75 दिनों से ज्यादा हो गए हैं। इस आंदोलन में भारतीय नेताओं के साथ-साथ अब विदेश से भी समर्थन मिल रहा है। इस पर अंतराष्ट्रीय मंच पर चर्चा होने लगी है, जबकि इसमें महज तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और आंशिक तौर पर उत्तर प्रदेश के किसान ही शामिल हैं। इस आंदोलन में विदेशी ऐक्टिविस्ट द्वारा किसानों को दिए जा रहे समर्थन में बार-बार नए औजार के रूप में ‘टूलकिट’ का नाम आ रहा है।
क्या है टूलकिट ? बता दें कि टूलकिट एक तरह का दस्तावेज है। आज के मौजूदा दौर में दुनिया के अलग- अलग हिस्सों में जो भी आंदोलन होते हैं, चाहे वह किसी भी चीज पर हो जैसे ब्लैक लाईव्स मैटर या अमेरिका का एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट हो, किसी पर भी हो। सभी जगह आंदोलन से जुड़े लोग कुछ ‘एक्शन पॉइंट्स’ तैयार करते हैं यानी कुछ ऐसी चीज़ों की योजना बनाते है जो आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मदद कर सके। इन ‘एक्शन पॉइंट्स’ को कागजों पर तैयार किया जाता है इसे ही टूलकिट कहते है।
टूलकिट का उद्देश्य
टूलकिट शब्द का इस्तेमाल सोशल मीडिया में ज्यादा किया जाता है। इस दस्तावेज में सोशल मीडिया की रणनीति के अलावा भौतिक रूप से सामूहिक प्रदर्शन करने की जानकारी भी दी जाती है। इस टूलकिट को ज्यादातर उन लोगों के बीच शेयर किया जाता है, जिनकी मौजूदगी से आंदोलन के प्रभाव को बढ़ाने में मदद मिले। ऐसे में इस दस्तावेज को किसी आंदोलन की रणनीति का अहम हिस्सा कहना गलत नहीं होगा। इसे आप दीवारों पर लगाये जाने वाले पोस्टर का परिष्कृत और आधुनिक रूप भी कह सकते हैं, जिसका इस्तेमाल सालों से आंदोलन करने वाले लोग अपील या आह्वान करने के लिए करते रहे हैं।
इस दस्तावेज का मुख्य उद्देशय लोगों को आंदोलन में शामिल करना और इसे कैसे आगे बढ़ाना है इसकी जानकारी लोगों को देना। टूलकिट में आमतौर पर यह बताया जाता है कि लोग क्या लिख सकते हैं, कौन से हैशटैग इस्तेमाल कर सकते हैं, किस वक़्त से किस वक़्त के बीच ट्वीट या पोस्ट करने से फ़ायदा होगा और किन्हें ट्वीट्स या फ़ेसबुक पोस्ट्स में शामिल करने से फ़ायदा होगा।
पुलिस ने की एफआईआर
यह शब्द टूलकिट देश में चल रहे किसान आंदोलन में भी सुनने को मिल रहा है। हाल हीं में किसानों के समर्थन में उतरी अमेरिका पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रटा थनबर्ग ने टूलकिट को अपने ट्वीटर पर शेयर किया और डिलिट कर दिया था बाद में उन्होंने बताया की वह पुराना था। दिल्ली पुलिस इस टूलकिट को लिखने वालों की तलाश कर रही है। पुलिस ने इसे लिखने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा-124ए, 153ए, 153, 120बी को तहत केस दर्ज किया है, लेकिन फिलहाल इस एफआईआर में किसी का नाम शामिल नहीं किया गया है। गौरतलब है कि पुलिस गूगल को एक पत्र लिखाने वाली है ताकि इस टूलकिट को बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले लोगों का आईपी एड्रेस निकाला जा सके।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर प्रवीर रंजन के अनुसार हाल के दिनों में लगभग 300 सोशल मीडिया हैंडल पाये गए हैं, जिनका इस्तेमाल घृणित और निंदनीय कंटेंट फैलाने के लिए किया जा रहा हैं। कुछ वेस्टर्न इंटरेस्ट ऑर्गनाइजेशन द्वारा इनका इस्तेमाल किया जा रहा है, जो किसान आंदोलन के नाम पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ ग़लत प्रचार कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने 4 फरवरी को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेस में कहा था कि “ये टूलकिट खालिस्तानी समर्थक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के द्वारा बनाया गया है। इसे पहले अपलोड किया गया और फिर कुछ दिन बाद इसे डिलीट कर दिया गया।”
क्या है इस टूलकिट में
4 फरवरी को ग्रेटा ने दूसरी बार किसानों के समर्थन में ट्वीट किया था। इसी के साथ उन्होंने एक टूलकिट भी शेयर किया था, जिसके साथ उन्होंने लिखा, ‘ये नई टूलकिट है जिसे उन लोगों ने बनाया है जो इस समय भारत में ज़मीन पर काम कर रहे हैं। इसके ज़रिये आप चाहें तो उनकी मदद कर सकते हैं।‘
यह टूलकिट तीन पेजों का है। इसमें सबसे ऊपर एक नोट लिखा हुआ है, जिसके अनुसार यह एक दस्तावेज़ है जो भारत में चल रहे किसान आंदोलन से अपरिचित लोगों को कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और किसानों के हालिया प्रदर्शनों के बारे में जानकारी देता है।
नोट में लिखा है कि “इस टूलकिट का मक़सद लोगों को यह बताना है कि वो कैसे अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए किसानों का समर्थन कर सकते हैं.” इसमें लिखा है कि आप इस आंदोलन को समर्थन किस तरह दे सकते है जैसे इसमें सुझाव दिया गया है कि लोग #FarmersProtest और #StandWithFarmers हैशटैग्स का इस्तेमाल करते हुए, किसानों के समर्थन में ट्वीट कर सकते हैं.” और “लोग अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को मेल कर सकते हैं, उन्हें कॉल कर सकते हैं और उनसे पूछ सकते हैं कि वो किसानों के मामले में क्या एक्शन ले रहे हैं.”
समर्थन में ऑनलाइन-पिटीशन इस टूलकिट में किसानों के समर्थन में कुछ ऑनलाइन-पिटीशन साइन करने की भी अपील की गई है, जिनमें से एक ऑनलाइन-पिटीशन तीनों कृषि बिल वापस लेने की है। टूलकिट में लोगों से आह्वान किया गया है कि “वो संगठित होकर, 13-14 फ़रवरी को पास के भारतीय दूतावासों, मीडिया संस्थानों और सरकारी दफ़्तरों के बाहर प्रदर्शन करें और अपनी तस्वीरें #FarmersProtest और #StandWithFarmers के साथ सोशल मीडिया पर डालें।”
टूलकिट में लोगों से किसानों के समर्थन में वीडियो बनाने, फ़ोटो शेयर करने और अपने संदेश लिखने को कहा गया है। इसमें लोगों को सुझाव दिया गया है कि वो किसानों के समर्थन में जो भी पोस्ट करें, उसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कृषि मंत्री और अन्य सरकारी संस्थानों के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को शामिल करें।
इस टूलकिट में दिल्ली की सीमाओं से शहर की ओर किसानों की एक परेड या मार्च निकालने का भी ज़िक्र है और लोगों से उसमें शामिल होने की अपील की गई है। मगर इसमें कहीं भी लाल क़िले का ज़िक्र नहीं है और ना ही किसी को हिंसा करने के लिए उकसाने जैसा कुछ है। पुलिस को अभी तक इस बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। इसकी जांच जारी है।