नई दिल्ली। इंद्रलोक इलाके में 29 जनवरी की सुबह प्लास्टिक के खिलौने बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लग गई। आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गयी। इसकी सूचना मिलते ही तत्काल 15 दमकल गाड़ियां वहां पहुंची । जिसके बाद आग पर बड़ी मुश्किल से काबू पाया जा सका।
आग लगने की वजह पता नहीं चल पाई थी। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है. दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल ठाकुर ने कहा, ‘आग की चपेट में आकर फैक्ट्री की दूसरी और तीसरी मंजिल पर रखी पैकेजिंग सामग्री, कार्डबोर्ड, प्लास्टिक के खिलौने जलकर खाक हो गए.’
आग बुझाने के लिए मौके पर पंद्रह फायर टेंडर भेजे गए थे। और सुबह करीब 9.15 बजे आग बुझाने का काम शुरू किया गया था.
नई दिल्ली। दिल्ली में नार्थ एमसीडी के सफाई और अस्पताल की नर्सों और डॉक्टर्स के वेतन मिलने पर मेयर ने हड़ताल खत्म करने के लिए कहा है। नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश के अनुसार सफाई कर्मचारियों के तीन महीने का बकाया वेतन जारी किया जा चुका है। इसी तरह स्वास्थ्य कर्मियों का भी तीन माह अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के बकाया वेतन मिल चुका है। वेतन मिलने के बाद मेयर उन्हें काम पर लौटने को कहा है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों का कुछ महीनों का बकाया वेतन मिल गया है और अब उन्हें काम पर लौट जाना चाहिए। अगर इसके बाद भी वे काम पर नहीं लौटते, तो उनके खिलाफ सख्ती की जा सकती है।
मेयर के अनुसार सफाई कर्मचारियों का अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का बकाया वेतन के लिए 228 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। ग्रुप-डी के बाकी कर्मचारी का सितंबर महीने का बकाया वेतन 43 करोड़ रुपये जारी किया गया है। इसी तरह से ग्रुप-सी में कार्यरत पैरा-मेडिकल स्टाफ (हॉस्पिटल) का अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का 8.07 करोड़ रुपये बकाया वेतन दिया गया है। ग्रुप-सी में दूसरे कर्मचारी हैं, उनका सितंबर माह का बकाया 18.23 करोड़ रुपये जारी कर दिया है।
हॉस्पिटल नर्सों का भी तीन महीने का बकाया वेतन 24.69 करोड़ रुपये और डॉक्टरों का नवंबर का 6.18 करोड़ रुपये जारी किया जा चुका है। सभी कर्मचारियों को मिलाकर करीब 516 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया वेतन बुधवार को जारी किया गया। इसके बाद भी अगर कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तो यह ज्यादती है और ऐसा माना जाएगा कि वे काम करना ही नहीं चाहते। इसलिए उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जा सकता है।
उधर, इस मामले में कॉन्फेडरेशन ऑफ एमसीडी एम्प्लॉइज यूनियन के पदाधिकारी ए.पी. खान और नगर निगम शिक्षक संघ के रामनिवास सोलंकी ने कर्मचारियों के बकाया वेतन देने में भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि किसी भी ग्रुप के कर्मचारी को अभी भी पूरा वेतन नहीं मिला है। हॉस्पिटल में कार्यरत नर्सों का तो सारा बकाया वेतन दे दिया गया है, लेकिन जो डिस्पेंसरी और दूसरी जगहों पर कार्यरत नर्से हैं, उनका वेतन पूरा नहीं मिला है।
इसी तरह से फील्ड में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों का पूरा वेतन मिल चुका है। लेकिन जो सफाई कर्मचारी स्कूल, डिस्पेंसरियों और हॉस्पिटल में काम करते हैं, उनका पूरा वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा उनकी बाकी मांगें भी अभी अधूरी है। जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
नई दिल्ली। शुक्रवार की शाम विजय चैक पर बीटींग रिट्रीट एवं राजधानी के सिंघु बोर्डर पर किसानों आंदोलन, स्थानीय लोग और पुलिस के बीच जारी झड़प के बीच दिल्ली में स्थित इस्रायली दूतावास के पास एक बम विस्फोट हुआ है। यह दूतावास विजय चैक के नजदीक इस्रायली दूतावास डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग पर स्थित है। जब यह धमाका हुआ तब यहां बीटिंग रिट्रीट का समारोह चल रहा था। धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गईं और इस इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। घटनास्थल पर दमकल की गांड़ियां पहुंच गई ।
यह हादसा उस समय हुआ जब राजधानी में विजय चैक पर गणतंत्र दिवस समारोह के समापन के लिए बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया गया है। इस समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, लोक सभा अध्यक्ष और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी उपस्थित थे।
पुलिस के अनुसार शाम को 5ः5 पर दूतावास के पास यह धमाका हुआ था। फिलहाल इसमें किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। इस धमाके में वहां खड़ी पांच गाड़ियों के शीशे टुटने की खबर है। राहत दल और विशेष अतिरिक्त सुरक्षा बल भी घटनास्थल पर तैनात कर दिए गए हैं। पुलिस इसे कम तीव्रता का विस्फोट बता रही है। अभी इस धमाके में उपयोग किए गए विस्फोटक का पता नहीं लगाया जा सका है इसकी जांच जारी है।
नई दिल्ली। रेल की यात्रा के दौरान हमेशा अपनी और सामान के सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। खासकर अगर ट्रेन टूरिस्ट की हो तब तो यह चिंता और भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए आईआरसीटीसी के यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्राइवेट गार्ड बहाल करने की योजना बनाई है। ऐसे में सफर करने वाले सुरक्षित महसूस करेंगे। गार्ड की मौजूदगी से न केवल लोग अपनी यात्रा सही ढंग से तरह कर पाएंगे, बल्कि चैन की नींद भी सो पाएंगे। गार्ड यात्रियों के साथ – साथ सामान की भी रखवाली करेंगे। कोविड – 19 का कहर कम होने से आईआरसीटीसी के ट्रेनों को चलाने का सिलसिला शुरु कर दिया है। पर्यटन उद्योग के उत्साह को देखते हुए केरल गोवा, कश्मीर, अंडमान, गुजरात में कच्छ का रण और उत्तर पूर्व क्षेत्र के लिए टूरिस्ट ट्रेनें चलेंगी। इसके साथ ही ज्योतिर्लिंग और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के साथ ही पधारो हमारे देश राजस्थान के लिए डीलक्स जैसी टूरिस्ट ट्रेन चलेगी।
आपको बता दें कि ये नई ट्रेन दिखने में राज घराने की लुक और सुविधाओं जैसी या स्वर्ग से कम नहीं जैसे हैं।
नई ट्रेन में दो भोजनयान
एक आधुनिक रसोईघर वह कोच स्नानागार में शॉवर
सेंसर आधारित वॉशरूम फंक्शन
पैरों के मसाज की सुविधा भी होगी
यात्रियों की सुरक्षा आईआरसीटीसी के लिए सबसे पहले है, जिसके लिए निजी गार्ड तैनात किए गए हैं। इसी बीच डीलक्स ट्रेन भी चलाई जाएंगी। 3 फरवरी को चंडीगढ़ से चलने वाली ट्रेन जो न केवल ज्योतिर्लिंग के लिए होगी बल्कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए भी होगी। आपको बता दे कि ये ट्रेन ज्योतिर्लिंगए महाकालेश्वरए ओंकारेश्वर मंदिरों के साथ – साथ गुजरात में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ऊँची प्रतिमा तक भी जाएगी। ऐसे में बोर्डिंग के लिए तीन जगह निर्धारित कि गई हैं जिसमे दिल्ली सफ़दरजंग आगरा और ग्वालियर का नाम है। पधारो म्हारे देश, राजस्थान ट्रेन 12 फरवरी को दिल्ली के सफदरजंग से चलेगी।
जानकारी के अनुसार रात 4 बजे से दिन के 5 बजे तक टूर में जैसलमेर में ग्रेट थार रेगिस्तान किले, जैन मंदिर, राजपूत विरासत का भ्रमण कराया जाएगा। देखो अपना देश नाम के टूर पैक के लिए ज्योतिर्लिंग एवं स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए प्रति व्यक्ति 26,790 रुपया और पधारों म्हारे राजस्थान के लिए 22,830 रुपया प्रति व्यक्ति खर्च करना होगा। एलटीसी की सुविधा का भी लाभ यात्री उठा सकेंगे।
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के दिन किसान आंदोलनकारियों की हरकतों के बाद किसान संगठनों पर सख्ती दिखाते हुए दिल्ली पुलिस ने उनके नेताओं पर कई एफआईआर के बाद लगा कि किसान आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा। सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि छह पत्रकारों के खिलाफ भी राजद्रोह का केस दर्ज किया गया और पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर से किसानों को हटाने के प्रयास भी किए। बिजली, पानी और अस्थाई टायलेट की व्यवस्था तक हटा ली गई। किंतु राकेश टिकैत के आह्वान पर लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश से और किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए चल पड़ थे। 28 जनवरी की रात दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच गाजीपुर बॉर्डर से किसानों को हटाने की पुलिस और प्रशासन ने पूरी कोशिश की। वहां बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। किसान नेताओं को उस जगह को खाली करने का नोटिस दिया गया करीब 10,000 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया। हालांकि किसान धरने पर डटे रहे। किसानों ने रात टेंट में नहीं सड़क पर ही गुजारी।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत टेलीविजन पर बोलते बोलते रो पड़े और यह दृश्य देख कर उत्तर प्रदेश से और बड़ी संख्या में किसान उनका साथ देने दिल्ली के लिए निकल पड़े। अगले दिन 29 जनवरी की सुबह होते-होते गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों और उनके समर्थकों की भीड़ बढ़ गई। मजबूर हो कर पुलिसकर्मियों को वहां से हटा लिया गया। प्राप्त जनकारी के अनुसार उनका साथ देने के लिए उत्तराखंड और हरयाणा से भी कई किसान गाजीपुर बॉर्डर की तरफ निकल पड़े। किसान संगठनों ने आंदोलन को जबरन खत्म करने के सरकार के इस प्रयास की निंदा की और कहा कि आंदोलन अभी भी जारी है।
किसान आंदोलन कमजोर नहीं हुआ है यह साबित करने के लिए सिंघु बॉर्डर पर करीब 15 किलोमीटर लंबी सद्भावना रैली निकाली गई.। हालांकि वहां भारी संख्या में पुलिस और अर्ध-सैनिक बलों को तैनात कर दिया गया है। विपक्षी राजनीतिक पार्टियां भी किसानों को समर्थन दे रही हैं। राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चैधरी राकेश टिकैत का साथ देने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ गाजीपुर बॉर्डर जा पहुंचे हैं। आम आदमी पार्टी भी किसान आंदोलन को समर्थन की घोषणा कर चुकी है और पार्टी के कई नेता आज अलग अलग बॉर्डरों पर जा कर किसानों को अपने समर्थन का प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। किसानों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए कम से कम 16 पार्टियों ने को संसद में हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया।
दूसरी तरफ 26 जनवरी को किसान परेड के दौरान हुई हिंसा के संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा के एक थाने में कांग्रेस सांसद शशि थरूर और कम से कम छह पत्रकारों के खिलाफ राजद्रोह और अन्य आरोपों के तहत मामले दर्ज किए हैं. इन पत्रकारों में राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे, जफर आगा, परेश नाथ, अनंत नाथ और विनोद जोस शामिल है। पुलिस का कहना है कि इन सभी के खिलाफ भ्रामक खबरें फैलाने की शिकायत मिली थी।इन सभी के खिलाफ सिर्फ नोएडा में ही नहीं, बल्कि भोपाल में भी एक एफआईआर दर्ज की गई है. एडिटर्स गिल्ड ने इन एफआईआरों की निंदा की है और इन्हें स्वतंत्र मीडिया को डराने, परेशान करने और दबाने की कोशिश बताया है.
तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों की रद करने की मांग को लेकर जहां सिंघु बॉर्डर पर 29 जनवरी को किसानों का विरोध प्रदर्शन 65वें दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं, दिल्ली से सटे नोएडा में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति ने नरेश टिकैत को अपना नैतिक समर्थन दिया है। साथ ही कहा है कि किसान आंदोलन के लिए अगले आदेश का इंतजार करें। कभी भी संगठन की ओर से नया आदेश जारी हो सकता है। दिल्ली में बवाल के बाद छिजारसी टोल प्लाजा पर पुलिस की मुस्तैदी बढ़ा दी गई । यूपी बार्डर की तरफ जा रहे किसानों को पुलिस द्वारा रोका गया और उनका नाम-पता रजिस्टर में अंकित करने के बाद उन्हें उनके गृह क्षेत्र में लौटा दिया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई।
विपक्षी दलों ने दिया आंदोलन का साथ
सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन व दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा को आंदोलन स्थल पर जाने से पुलिस ने रोक लिया। इससे वहां पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। वहीं, दिल्ली सरकार द्वारा पानी आपूर्ति करने पर राकेश टिकैत ने शुक्रिया अदा किया है। वहीं, यूपी गेट पहुंचे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सिख कौम कट्टर देशभक्त है और उसे बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी की सुविधा रात को ही उपलब्ध करवा दी गई थी। साथ ही कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा की जांच की जानी चाहिए। भाजपा के लोग किसानों को बदनाम कर रहे हैं। पुलिस को जांच करनी चाहिए कि 26 जनवरी को किसानों को किसने भड़काया? मनीष सिसोदिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार किसानों के साथ है। जो लोग किसानों का विरोध कर रहे हैं वह भाजपा के लोग हैं।
वहीं यूपी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है और वह किसानों के साथ धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार को जारी धरने के बीच राकेश टिकैत ने अहम बयान में कहा है कि हम यह जगह खाली नहीं करेंगे। हम अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से बात करेंगे और अपना पक्ष रखेंगे। साथ ही राकेश टिकैत ने लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें। इसी बीच राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व सांसद जयंत चैधरी भी गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने राकेश टिकैत से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि प्रशासन पर किसानों का हटाने के लिए दबाव है, लेकिन प्रदर्शनकारी जगह खाली नहीं करेंगे। इस मुद्दे को संसद में उठाया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों के मुद्दे पर बोलना चाहिए। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग ने सुबह गाजीपुर बॉर्डर पर जमा किसानों के लिए बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से यह चुपचाप किया गया है। पिछले 2 महीने से भी अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन के चलते दिल्ली-एनसीआर के 60,000 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान हो चुका है। कई लोगों की नौकरी जा चुकी है।