Saturday, May 9, 2026
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कर्मचारियों ने दिए दिल्ली के तीनों एमसीडी एक करने का सुझाव, होगी 1000 करोड़ रुपये की बचत

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली। राजधानी के तीनों नगर निगम की खराब आर्थिक के कारण उनके कर्मचारियों को वेतन काफी विलंब से मिलने के कारण उनके यूनियन ने एक सुझाव की रिपोर्ट तैयार की है। कन्फेडेरेशन ऑफ एमसीडी एम्पलाइज यूनियंस द्वारा बनाई रिपोर्ट के अनुसार अगर तीनों निगम का वित्त विभाग एक कर दिया जाए तो उससे 1000 करोड़ रुपये की बचत की जा सकती है।

कर्मचारियों के यूनियांस का कहना है कि ऐसा निगमों की हालत को देखते हुए किया गया है।  राजधानी दिल्ली के तीनों नगर निगम आर्थिक समस्या के दौर से गुजर रहे हैं। आलम यह है कि कर्मचारियों का पांच से छह माह देरी से वेतन मिलता है। इतना ही नहीं पेंशन के लिए आठ-आठ माह का समय लग जाता है। ऐसे में इस बदहाल व्यवस्था को दूर करने के लिए अगर, उपराज्यपाल इस सुझाव को मान लें तो एक आदेश से तीनों निगम की न केवल आर्थिक बदहाली दूर हो जाएगी, बल्कि पांच-पांच सौ करोड़ रुपये की बचत भी होगी।

रिपोर्ट के अनुसार तीनों निगम के वित्त विभाग को एक करने से निगम के खर्चे भी कम होंगे साथ ही विकास कार्यों को भी गति मिल सकेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के मुद्दे का भी समाधान हो जाएगा। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि तीनों निगम की जो भी आय होगी उसे 1ः1ः 6 के अनुपात में तीनों निगम में वितरित किया जाएगा।

उत्तरी निगम के पास इस समय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन बकाया के साथ लोन के साथ कर्मचारियों के एरियर का करीब 8750 करोड़ रुपये की देनदारी है। ऐसे में तीनों निगम की आंतरिक आय और दिल्ली सरकार से मिलने वाले अनुदान को समाहित कर दिया जाए तो 10 हजार 48 करोड़ बैठता है। अगर, 8750 रुपये का भुगदान भी कर दिया जाए तो उत्तरी और दक्षिणी निगम को विकास कार्य के लिए 467-467 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं पूर्वी निगम को 282 करोड़ रुपये मिलेंगे।

तीनों निगम में कई ऐसे विभाग हैं तो अलग-अलग न करके एक ही तरह से काम करते हैं। इसमें सबसे पहले टोल टैक्स हैं। तीनों निगमों के क्षेत्राधिकार में करीब 126 टोल नाके हैं। इन टोल नाकों से टोल वसूली के लिए दक्षिणी निगम टेंडर करता है। जो कंपनी टेंडर लेती है उसका भुगतान दक्षिणी निगम को कर दिया जाता है। फिर दक्षिणी निगम 1ः1ः6 के अनुपात में राशि को तीनों निगमों में बांट देता है। इसी तरह बहुत समय तक प्रेस एवं सूचना विभाग ने एक साथ कार्य किया है। वहीं, शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया भी दक्षिणी निगम तीनों निगमों के लिए करता है।

कन्फेडेरेशन का कहना कि उपराज्यपाल, निदेशक स्थानीय निकाय को आदेश देकर तीनों निगम का वित्त विभाग एक करा सकते हैं। इसके लिए विधानसभा या लोकसभा से निगम एक्ट में बदलाव करने की जरुरत नहीं है।

तलवार से घायल एसएचओ प्रदीप पालीवाल ने बताई आपबीती

राजेंद्र स्वामी, संवाददाता

दिल्ली।। कल सिंघु बॉर्डर पर घायल हुए अलीपुर थाना अध्यक्ष प्रदीप पालीवाल ने अपने साथ पूरी घटना का विवरण दिया है।

प्रदीप पालीवाल के अनुसार हमलावर किसानों को मारने दौड़ रहा था जिसे बचाने के प्रयास में जब वे आगे आए तो उसने उन्हीं पर तलवारों से तीन बार के इस बार में उनके हाथ पर तीन-तीन भाव हुए हैं यह सब देख कर गांव वालों ने उक्त हमलावर को पकड़ कर मारना शुरू कर दिया स्थिति को देख उन्होंने उस हमलावर को बचाने के लिए उसके ऊपर लेट गए।


प्रदीप पालीवाल के अनुसार् कुछ स्थानीय गाँव वाले किसानों को रास्ता बंद होने से होनी वाली समस्याओं से अवगत कराने आये थे, बात पर किसान और गाँव वालो में बहस हो गयी, कुछ किसानों के हाथ में हथियार थे, तभी अचानक एक शख्स तलवार लेकर गांव वालों को मारने दौड़ा और जब उसने रोकने की कोशिश की तो उसने तलवार से वार करने शुरू कर । 

अभी पालीवाल के अनुसार किसान मुख्य मार्ग के बजाय इधर-उधर से अचानक घटनास्थल पर पहुंच गए थे।

किसानों को महापंचायत ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

नेहा राठौड़, संवाददाता

नई दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसानों के प्रदर्शन को 2 महीने से ज्यादा हो गया है। इस आंदोलन के कारण बंद कुंडली बॉर्डर के आसपास के ग्रामिणों का संयम अब टूट चुका है। इस आंदोलन को लेकर शुक्रवार दोपहर को गांव मनौली में 40 गांवों के 800 लोग महापंचायत में शामिल हुए।

इस पंचायत में बॉर्डर पर आवागमन के लिए रास्ता खोलने के लिए किसानों को 48 घंटों का समय दिया गया है। ग्रामीणों ने पंचायत में पारित प्रस्ताव की एक प्रति किसानों के मंच पर पहुंचा दी है। अगर रविवार दोपहर तक उन्होंने रास्ता नहीं दिया तो 40 गांवों के हजारों लोग मिलकर बॉर्डर पर बनाए गए टेंट और मंच को हटा देंगे। इससे ग्रामीणों और किसानों में टकराव की आशंका बढ़ गई है। इस मामले पर प्रशासन नजर रखे हुए है।

कृषि कानूनों के विरोध में 2 महीने से दिल्ली सीमा पर डटे किसानों की वजह से राजधानी की सीमा पर तब से 40 गांवों के लोगों की आवागमन ठप हो गया है। लोग कई बार आने जाने के लिए रास्ता देने की मांग कर चुके हैं। उसके बावजूद किसानों ने रास्ता नहीं खोला है। सीमा बंद होने की वजह से इन गांवों से दूध-सब्जी व अन्य उत्पादन बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीणों ने परेशान होकर पंचायत बुलाई, जिसमें उन्होंने मांग की है कि सड़क की एक साईड खोल दी जाए और कॉलिनियों के गेट के सामने से ट्रोलियां हटा ली जाए। ग्रामीणों को जबरन आंदोलन में शामिल होने को मजबूर ना किया जाए। गांव वालों के मुताबिक, किसान आंदोलन के चलते श्रमिकों, ऑटो-टेंपो चालकों, बॉर्डर क्षेत्र में दुकानदारों और इस जगह फैक्ट्री चलाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांव की ज्यादातर दुकानों पर जरूरत का सामान नहीं मिल पा रहा है।

अवंतिका मार्किट के दुकानदार हुए पुलिस वालों से परेशान

मुकेश राणा, संवाददाता

दिल्ली।। राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा और उपद्रव मामले में जंहा दिल्ली पुलिस ने एक मिसाल कायम कर दिल्ली पुलिस का परचम बुलंद किया है वही कुछ ऐसे पुलिसकर्मी भी मौजूद है जो दिल्ली पुलिस की छवि को गंदा करने पर आमादा रहते है।

दिल्ली के रोहिणी अवंतिका मार्किट में पुलिसकर्मियों के द्वारा दुकानदारों से कानून का भय दिखाकर परेशान करने पर मार्किट एसोशिएशन ने अवंतिका मार्किट को बंद कर सड़क जाम कर दिया जिसके कारण रास्ते से आने जाने वाले लोगो को परेशानी हुई साथ ही मार्किट में खरीदार भी मुसीबत से 2, 4 हुए दरसल मार्किट एसोशिएशन का आरोप है कि मार्किट बिट में तैनात पुलिसकर्मी खुलेआम दुकानदारो को कानून का भय दिखकर परेशान करते है।

दुकानदारों ने पुलिसकर्मियों के रवैये की जानकारी मार्किट के प्रधान तक पहुचाई जिसके बाद प्रधान ने भी पुलिस के आलाधिकारी तक को शिकायत देकर अवगत करा दिया मगर पुलिस के द्वारा कोई एक्शन न होने के कारण अवंतिका मार्किट एसोशिएशन के दुकानदारों ने शटर डाउन कर धरने पर बैठ गए।

जिसके बाद थाने के इंस्पेक्टर ओर पुलिसकर्मियों समस्या के समाधान के लिए एसोशिएशन के साथ मिटिग फिक्स करने की बात कहकर मार्किट के लोगो से सड़क खोलने का आग्रह किया जिसके कुछ देर बाद मार्किट के लोगो ने सड़क से हटकर दुकाने खोल दी।

नरेला विधायक का दावा, भाजपा कार्यकर्ता कर रहे आंदोलन का विरोध

अंशुल त्यागी, संवाददाता

आंदोलन वाली दिल्ली अब उबल रही है, कहीं किसानों का प्रदर्शन चल रहा है तो कही किसानों के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है, इसी कड़ी में शुक्रवार को उस समय ये विरोध और उग्र हो गया जब नरेला जोन में गांव के कुछ लोग किसानों के टैंट उखाड़ने लगे और लोगों, किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।

सिंघु बॉर्डर पर पिछले साठ दिनों से चल रहे इस आंदोलन में शुक्रवार को जब बवाल हुआ तो नरेला क्षेत्र से आमआदमी पार्टी विधायक शरद चौहान ने ये दावा किया है किसानों के खिलाफ खड़े हुए ये कोई गांव वाले नहीं बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता हैं।

शरद चौहान ने कहा कि उन्होनें खुद मौके पर जाकर जायज़ा लिया और इसलिए वो आश्वस्थ है कि उधम कर रहे लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं और पुलिस ने उन्हें इसलिए आराम से वहां जाने दिया। नकारी के लिए आपको बता दें कि सिंघु बॉर्डर नरेला विधानसभा क्षेत्र में ही है..