Friday, May 15, 2026
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जल्द ही शुरु होगी नर्सरी दाखिले की प्रक्रिया

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वह जल्द ही नर्सरी कक्षा के दाखिले की प्रक्रिया शुरु करने वाले हैं। आपको बता दे कि हर साल जनवरी तक नर्सरी में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो जाती है लेकिन इस साल कोरोना के चलते हालात कुछ और है। जिसकी वजह से इस प्रक्रिया की शुरुआत भी अभी तक नहीं हो पाई है।

2 फरवरी को हुई सरकार और स्कूलों के प्रिंसिपल की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी चिंता प्रकट की। और कहा कि काफी समय से स्कूल बंद है और दाखिले की प्रक्रिया की भी शुरुआत नहीं हुई जिसकी वजह से स्कूल और बच्चों की पढ़ाई पर काफी गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

इसके बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि वह जल्द ही इसे खोलने पर विचार कर रहे हैं। और यह सरकार की ही जिम्मेदारी है कि वह कोई कदम उठाए जिससे सभी को इससे राहत मिल पाए और बच्चों की पढ़ाई भी इससे खराब ना हो। उनका कहना था कि कई देशों में स्कूल खोले गए जिसका अंजाम अच्छा नहीं रहा जिसकी वजह से लोगों को चिंता है कि अगर उन्होंने भी अपने बच्चों को स्कूल भेजा तो कही वो भी किसी बीमारी का शिकार ना हो जाए। इसलिए सभी बातों को ध्यान में रखते हे कदम उठाए जा रहे हैं जिसकी वजह से पहले 10वीं और 12वीं को छात्रों के लिए स्कूल खोले गए। उनका मानना है कि कोविड को ध्यान में रक कर सरकार सही समय पर सही कदम उठा रही है।

किसान आंदोलन की आड़ में नहीं बनना चाहिए एक और शाहीनबाग

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। कृषि कानून को लेकर किसान अभी भी विरोध जता रहे हैं उनका कहना है कि सरकार जितनी भी कोशिश कर ले पर वह काले कानूनों पर विरोध बंद नहीं करेंगे। कानून पर सियासी लड़ाई अभी भी जारी है। इसी बीच भाजपा के सांसद भुवनेश्वर कालीता ने कहा कि सभी कानून संसद में चर्चा के बाद ही पास होते है और इस कानून के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। तो किसानों को कृषि बिल पर आंदोलन की आड़ में इसे शाहीन बाग नहीं बनाना चाहिए।

सदन में बजट सत्र के दौरान विपक्षी पार्टियों का हंगामा जारी रहा। कृषि बिल पर बहस के दौरान भी वह कानून को वापस लेने की मांग पर डटे रहे। भाजपा का कहना है कि विपक्षी पार्टियां और किसान हिंसा होने के बाद भी बातचीत को तैयार नहीं है। वह अभी भी कानून वापसी की मांग पर डटे हैं।

किसानों ने 26 जनवरी को जो हिंसा की उससे राजधानी को काफी ज्यादा नुकसान पहुँचा है और लोगों को भी कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी थी। लेकिन विपक्षी दल इस घटना को नज़रअंदाज़ कर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। सरकार और किसानों की कानून पर कई बार बातचीत हो चुकी है और सरकार आगे भी इस पर बात करने को तैयार है। उनका कहना था कि लेकिन वह एक अपील करना चाहते हैं कि इस आंदोलन के जरिए एक और शाहीनबाग नहीं बनना चाहिए।

6 फरवरी को नहीं होगा चक्का जाम

काव्या बजाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि किसान दिल्ली में चक्का जाम नहीं करेंगे। आपको बता दें कि कुछ समय पहले ऐसा कहा गया था कि 6 फरवरी को किसान राजधानी में चक्का जाम करेंगे। लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत ने इस बात से साफ इंकार कर दिया। इसके साथ – साथ उनका कहना था कि आंदोलन किसी के दबाव में आने से ना ही खत्म हुआ है और ना ही आगे चल कर होगा।  

गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा पर उनका कहना था कि दिल्ली में जो हिंसा हुई उसमे किसानों का कोई दोष नहीं है। ऐसा करने वाले किसान कभी हो ही नहीं सकते। जिसकी वजह से उन्होंने घटना की निषपक्ष जाँच का मांग की। इसके आगे उनका कहना था कि जांच से पता लगाया जा सकता है कि किसान और हमारे सिख भाईयों को कौन बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।

राकेश टिकैत ने पुलिस और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दंगाईयों को कच्चे रास्तों से दिल्ली की सीमा के अंदर घुसा कर उन्हें फसाने की कोशिश की जा रही है। ताकि आंदोलन पर दबाव बना कर वह इसे खत्म कर सकें। लेकिन वह सरकार को उनकी मंशा में कामयाब नहीं होने देंगे। आंदोलन सिर्फ और सिर्फ उनकी मांगे पूरी होने पर ही खत्म होगा।

मिक्सोपैथी के विरोध में भूख हड़ताल पर एलोपैथी के डाक्टर


राजेंद्र स्वामी के साथ शिवानी मोरवाल


नई दिल्ली। देशभर के एलोपैथी डॉक्टर्स मिक्सोपैथी के विरोध में एक फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं। दिल्ली के अशोक विहार सेंट्रल मार्किट में भी दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने भूख हड़ताल का प्रदर्शन किया और सरकार को चेतावनी दी कि वे लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ न करें और अपना निर्णय वापस ले। इस प्रदर्शन में आईएमए और डीएमए के पदाधिकारी भी शामिल हुए। उनका कहना है कि चिकित्सक सर्जरी का हुनर सालों में सीखता है उसे सरकार केवल छह माह में कैसे सीखा सकती है? दिल्ली मेडिकल कौंसिल के रजिस्ट्रार डॉ गिरीश त्यागी ने सरकार में बैठे मंत्रियों से सवाल किया कि क्या वे खुद ऐसे डॉक्टर्स से ऑपरेशन करना पसदं करेंगे?


उल्लेखनीय है कि काफी समय से मिक्सोपैथी का विरोध कर रहे डॉक्टर्स अब सरकार से इस मुद्दे पर आर पार की लड़ाई पर उतर आयें हैं। उन्होंने 2 फरवरी को भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने देशभर में प्रदर्शन कर सरकार को आगाह किया की वह एलोपैथी में आयुर्वेद और होम्योपैथी को अतिक्रमण करने की अनुमति नहीं दें। देश की राजधानी दिल्ली में भी डॉक्टर्स इस मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल पर रहे। इस सिलसिले में दिल्ली के अशोक विहार सेंट्रल मार्किट में आईएमके के संयुक्त सचिव डॉ नरेश चावला के संयोजन में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के साथ प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन में पहुंचे डॉक्टर्स ने सरकार से सवाल किया कि सालों के अनुभव की बाद सर्जरी का हुनर सिखाने वाले डॉक्टर्स का विकल्प छह महीने का डिप्लोमा करने वाले सर्जरी के डॉक्टर्स कैसे हो सकता है? इसे एलोपैथी के डाक्टर ने मिक्सोपैथी का नाम दिया है। उनका कहना है कि वे किसी पद्धति का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि यह मांग कर रहे हैं कि अलग-अलग पद्धतियों में ही इलाज की व्यवस्था पहले जैसी रहे। इसी तरह से आईएमए के सचिव ने भी एलोपैथी के साथ आयुर्वेद को मिक्स करने का विराध जताया है।

गौरतलब है कि सरकार ने आयुर्वेद जैसी चिकित्सा पद्धति में काम कर रहे डॉक्टर्स को भी डिप्लोमा करने पर सर्जरी करने की छूट दे दी है। एलोपैथी के डॉक्टर्स की शीर्ष संस्था आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन इसका विरोध कर रही है। आईएमए ने इसके विरोध में एक फरवरी 2021 से 15 फरवरी तक भूख हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। दिल्ली के अशोक विहार सेंट्रल मार्किट में भी डॉक्टर्स भूख हड़ताल पर रहे और लोगों को भी जागरूक किया।

इस प्रदर्शन में आईएमए और डीएम के बड़े पदाधिकारी भी पहुंचे और सरकार को आड़े हाथों लिया। उनका कहना है कि आईएमए सरकार के इस निर्णय को कभी स्वीकार नहीं करेगी। दिल्ली मेडिक्डल कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार डॉ गिरीश त्यागी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए स्वास्थ्य सेवा के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। उनके जीवन से खिलवाड़ कर रही है।

आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि वह होम्योपैथी और आयुर्वेद के खिलाफ नहीं है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा पद्धति में मिक्सोपैथी का विकल्प नहीं हो सकती। बाकी दोनों पद्धतियां आधुनिक पद्धत्ति की जांच रिपोर्ट का इस्तेलम करें इसमें कोइ ऐतराज नहीं, लेकिन वह कुछ महीनों की ट्रेनिंग लेकर ऑपरेशन करे यह मंजूर नहीं। जाहिर है सरकार और डॉक्टर्स की यह तनातनी अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में यदि यह भूख हड़ताल सम्पूर्ण हड़ताल में बदल जाती है, तो सरकार के लिए के और परेशानी खड़ी हो सकती है। 

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दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बढ़ाया घायल पुलिस कर्मियों का हौसला

राजेन्द्र स्वामी, संवाददाता

नई दिल्ली।। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव आज आउटर जिला मुख्यालय में किसान आंदोलन में घायल हुए पुलिस कर्मियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे। पुलिस कमिश्नर ने कहा की किसान आंदोलन में पुलिस ने जो संयम, साहस और सूझबूझ के साथ काम किया वह बिलकुल थी है और आगे भी हमें अपने अफसरों का आर्डर मानना है। हालांकि माहौल को देखकर पुलिस आयुक्त ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें आगे बहुत तैयारियां करनी है। इस मौके पर घायल पुलिस कर्मियों ने संकोच के साथ की जो हुआ वह अच्छा नहीं हुआ। जो कमियां रह गई है उन पर ध्यान देना होगा ताकि दुबारा ऐसी घटना न हो।

दिल्ली में जब भी कोइ बड़ी हिंसा होती है तो देश की सबसे तेज़ तर्रार पुलिस दिल्ली पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में इसके शिकार होते है। 26 जनवरी को भी ऐसी ही तसवीरें देश ने देखी किसान आंदोलन में भी दिल्ली पुलिस के करीब 500 जवान घायल हुए है। आज दिल्ली पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव आउटर जिले में ऐसे घायल पुलिस कर्मियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे और उनके संयम और समझदारी की तारीफ करते हुए दिल्ली पुलिस के अहिंसा के निर्णय को सही करार दिया। इस मौके पर दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त सहित तमाम बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। सभी को सम्बोधित करते हुए पुलिस आयुक्त एस.ऍन श्रीवास्तव ने दिल्ली पुलिस के अनुशासित फ़ोर्स है। वह पक्षपात नहीं करती यह भी स्वीकार किया कि पुलिस को आगे बहुत ही रणनीति सोच के साथ काम करना होगा।

इस मौके पर आउटर जिले के बड़े अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। उनमें डीसीपी सुधांशु धामा भी मौजूद थे जिन्होंने अपने एक जवान को उग्र किसानों के चुंगल से छुड़ाया। पुलिस कमिश्नर के आने से पहले संयुक्त आयुक्त संजय सिंह सहित डीसीपी ने भी पुलिस कर्मियों के संयम और साहस की तारीफ़ की। हालांकि वहां बड़ी संख्या में बैठे घायल पुलिस कर्मियों ने कुछ भी बोलने से परहेज  किया, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव सांझा किये उन्होंने यह जरूर कहा की हमें अब तो सबक लेना चाहिए। इस पर विचार करना चाहिए की कहाँ कमी रह गयी और उसके बाद यह तय करें एसी घटना फिर न हो।

पत्रकार जानना चाहते थे की दिल्ली की सीमाओं पर कटीले तार – बैरिगेट्स, कीलें आदि पर सवाल हो। साथ ही दिल्ली की तेज़ तर्रार पुलिस क्यों आये दिन ऐसी हिंसा की शिकार होती रहती है। लेकिन ये तमाम सवाल केवल सवाल रह गए। सीपी साहब घायल पुलिस कर्मियों से मिले। उनकी तारीफ की और अपने दिल्ली पुलिस के काम काज को बहुत बेहतर बताकर चल दिए। हालांकि उन्होंने यह जरूर संकेत दिए की दिल्ली पुलिस को ऐसे हालातों से निपटे के लिए सोच विचार कर नयी रणनीति बनानी होगी। इस घायल पुलिस कर्मियों के साथ साथ तमाम पुलिस फ़ोर्स की नजर रहेगी।