Monday, May 4, 2026
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टीकाकरण अभियान की शुरुआत, कांग्रेस ने उठाए सवाल

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोरोना के खिलाफ विश्‍व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत की और कहा कि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के मेड इन इंडिया टीकों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही इसके उपयोग की अनुमति दी गई है। अभियान की शुरुआत से पहले राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि टीके की दो खुराक लेनी बहुत जरूरी है और इन दोनों के बीच लगभग एक महीने का अंतर होना चाहिए।

उधर कांग्रेस ने टीकाकरण के पहले दिन ही सवाल खड़े किए हैं। पूछा है कि जब वैक्सीन इतनी ही सुरक्षित है तो सरकार में किसी ने क्यों नहीं लगवाई।मालूम हो कि पहले चरण के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इसके लिए कुल 3006 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। पहले दिन तीन लाख से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड 19 के टीके की खुराक दी जाएगी।         

करोड़ों लोगों को सालभर से वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार था। भारत में कोरोना के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। हालांकि टीकाकरण के शुरू होने के महज कुछ ही घंटों में कांग्रेस ने अभियान पर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि कई जाने माने डॉक्टरों ने कोवैक्सीन के प्रभावी होने पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, पूरी दुनिया में कई नेताओं ने आगे आकर खुद टीका लगवाया है लेकिन भारत में सरकार से जुड़े किसी नेता ने ऐसा नहीं किया। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने वैक्सीन्स के इस्तेमाल की मंजूरी की प्रकिया पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि टीकों की इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी देने के लिए कोई नीतिगत ढांचा नहीं है।मनीष तिवारी ने कहा कि कई प्रख्यात डॉक्टरों ने सरकार के सामने कोवैक्सीन के प्रभावी और सुरक्षा के संबंध में सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि वे नहीं चुन सकेंगे कि उन्हें कौन सी वैक्सीन लेनी है। यह सहमति के पूरे सिद्धांत के खिलाफ जाता है।उन्होंने आगे कहा कि अगर वैक्सी12`न इतनी सुरक्षित और विश्वसनीय है और इसकी एफिकेसी सवाल से परे है तो फिर यह कैसे हो सकता है कि सरकार से जुड़ा कोई भी खुद के टीकाकरण के लिए आगे नहीं आया जबकि दुनिया के अन्य देशों में ऐसा ही हुआ है।

बता दें कि देश में सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को टीका लगाया जा रहा है। आज तीन लाख स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लग जाएगा। आम जनता को टीका लगने से पहले बुजुर्गों को लगाया जाएगा। इसी तरह टीकाकरण में नेताओं को किसी भी तरह की प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। पीएम मोदी ने भी पिछले दिनों सभी सांसदों और विधायकों को प्राथमिकता से कोरोना का टीका दिलाने की मांग को साफ न कह दिया था।

उन्होंने कहा था कि इससे जनता में गलत संदेश जाएगा।कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कोवैक्सीन पर कुछ समय पहले भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि कोविड 19 वैक्सीन कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण अभी बाकी है। ऐसे में इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी चिंता बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय कोई गिनी पिग नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि जब कोवैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है तो यह इसकी प्रभावकारिता पर सवाल तो उठता ही है।

डीटीसी के बेड़े में 1000 नई बसें शामिल होंगी

काव्या बजाज
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने डीटीसी के बेड़े में  1000 नई बसें लाने की घोषणा की है। अभी दिल्ली में कुल 3760 लो फ्लोर बसें हैं। जिनका लाभ दिल्ली की जनता उठा रही है।दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि काफी समय जद्दोजहद करने के बाद अब बसों की संख्या बढाने का आदेश दिया गया है।

केजरीवाल का मानना है कि इससे वह दिल्ली को प्रदूषण मुक्त दिल्ली बनाना चाहते हैं। वहीं, दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि कुछ समय से डीटीसी को बंद करने की अफवाहों ने जोर पकड़ा रखा था लेकिन आम आदमी पार्टी के इस फैसले के बाद इन अफवाहों पर भी रोक लग गई है।डीटीसी को परिवहन की रीड़ की हड्डी बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से इसे और ज्यादा कामयाब बनाने की कोशिश करती आई है। 

आपको बता दें कि 1000 में से 700 बसें जेबीएम कंपनी से खरीदी जाएंगी जबकि बाकी 300 बसें टाटा कंपनी द्वारा बनाई जाएंगी।आदेश जारी करने के बाद ऐसा बताया गया कि मात्र 16 सप्ताह के भीतर 80 बसें शामिल होंगी जबकि बाकी बसें 20 सितंबर 2021 तक शामिल हो पाएंगी। जिसके बाद 4760 बसों के साथ डीटीसी पहले से भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

SDMC में कोरोना योद्धाओं के लिए आयोजित हुआ ऊर्जा सत्र

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डिम्पल भारद्वाज, संवाददाता

सीविक सेंटर, नॉर्थ दिल्ली ||SDMC  के सभी कोरोना योद्धाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए बीती 15 जनवरी के दिन को दोपहर 2 बजे केदारनाथ साहनी सभागार, सिविक सेंटर में ‘ऊर्जा सत्र’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऊर्जा सत्र के दौरान साउथ एमसीडी के सभी कोरोना योद्धाओं के साथ अन्य सभी निगम कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया था।

कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य कोरोना योद्धा की भुमिका निभा रहे निगम कर्मचारियों में ऊर्जा का संचार करना था । जिससे उनका आत्मबल बना रहे। और आगे भी यह लोग निगम के कामों को पूरी निष्ठा और लगन से करें। बता दें की सभी का मनोबल बढाने के लिए प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास पहुंचे थे जिन्होंने अपनी कविकाओं और हास्य पदों के ज़रिये सभी के मन की चिंता को कम करने का काम किया। इतना ही नहीं कुमार विश्वास ने इस दौरान राम के चरित्र का वर्णन भी किया।

जिसका मक्सद राम के चरित्र के द्वारा मानव जाती में मानवता और शिष्टाचार भरना रहा। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही की जिन लोगों ने कोरोना काल में अपने परिजनों को खोया है। उन्हें साउथ एमसीडी ने निगम में नौकरी देकर मरहम लगाने का काम किया है।

हांलकि इससे उनके खोए परिजन वापिस तो नहीं मिल सकेंगे पर उनका जीवन कुछ सरल ज़रुर हो सकता है। हमने बात की साउथ  की मेयर अनामिका मितलेश सिंह से जिन्होंने बताया की जब भी में निगम के कर्मचारियों से मिलती थी उनके अंदर एक उदासीनता और टूटी हुई हिम्मत दिखाई देती थी यही वजह है की उनके मनोबल को एक बार फिर स्थापित करने के लिय़े उनमें ऊर्जा भरना ज़रुरी था। जो इस ऊर्जा सत्र के दौरान सफल भी रहा। 

करोल बाग उपायुक्त कार्यालय पर निगम कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

डिम्पल भारद्वाज, संवाददाता

नई दिल्ली।। दिल्ली नगर निगम में कर्मचारी अपने वेतन के लिए पिछले 7 जनवरी से हड़ताल कर रहे हैं। इस हड़ताल में निगम के सभी महकमें के कर्मी शामिल हैं फिर चाहे वह सफाई कर्मचारी हो, टीचर्स या फिर मलेरिया विभाग के सीएफडब्यू कर्मचारी हो, इतना नहीं हड़ताल का समर्थन करने के लिये नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर्स और पेशन धारक भी शामिल हैं। सभी का आक्रोश है की नगर निगम राजनीति करने लिए हमारी तनख्वाह के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

बता दें की इस तरह की हड़ताल समूची दिल्ली में देखने को मिल रही है। कुछ ऐसा ही नज़ारा उत्तरी दिल्ली के उपायुक्त कार्यालय करोल बाग क्षेत्र में भी देखने को मिला जहा लगभग सभी यूनियन के लोगों ने पहुंच कर उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया और नारेबाज़ी भी की।

नारेबाजी कर रहे कर्मचारियों में सबसे ज्यादा उदासीनता मलेरिया विभाग के cfw ( CONTRACTUAL FIELD WORKER ) कर्मचारियों में देखने को मिली cfw के कर्मचारियों में डर है की इनका वेतन तो समय से मिल ही नहीं रहा है पर कहीं इनकी अब नौकरी भी इनके हाथ से ना छीन जाए। लेकिन ऐसा क्यों है इसकी वजह यह कर्मचारी खुल कर बता नहीं पाए। लेकिन नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना उनके मन में साफ दिख रही थी ।

बता दें की यह कर्मचारी ना केवल अपने वेतन के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं बल्कि इनकी लड़ाई अपने अस्तित्व के लिए भी है।

वहीं अन्य विभाग के कर्मचारियों ने कहा की हम सिर्फ वेतन नहीं बल्कि नियमित वेतन चाहते हैं। क्योंकि लगभग हर साल हमें इसी तरह अपने वेतन के लिये धरना प्रदर्शन करना पड़ता है। जो हमारे हौंसले को तोड़ कर रख देता है। ऐसे में हमें कोई उम्मीद की किरण और सहारा भी नज़र नहीं आ रहा है। जो हमारे दुख और तकलीफ को कम कर सके। 

आजादपुर मंडी के कारोबारियों का कष्ट

संवाददाता, दिल्ली दर्पण टीवी

नई दिल्ली।। एशिया की सबसे बड़ी फल, सब्जी मंडी में अव्यवस्था और अराजकता का ऐसा माहौल है कि यहां कोई भी कारोबारी सुरक्षित नहीं हैं। न जान से न माल से उनकी कोई सुरक्षा है। आज व्यापारी कन्हैया चौधरी के साथ हुई मारपीट की वारदात से कारोबारियों की सुरक्षा की पोल खुल गई। व्यापारियों के अनुसार उन्हें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

जहां तक माल खरीदने और बेचने का सवाल है, किसान फोन करके भाव पता करता है कि किस मंडी में माल भेजना है। आढती को नकद या बैंक से भुगतान करना पड़ता है लेकिन माल उधार बेचना पड़ता है। यह उनकी मजबूरी है। सरकार इन्हें दलाल, बिचैलिया कहती है, यह अलग उनके लिए कष्टकारी है। व्यापारियों के अनुसार उधार दिए गए माल का अगर पेमेंट नहीं आता तो व्यापारी के पास पैसा निकलवाने का कोई तरीका नहीं है।

बेईमानी, गुंडागर्दी से कोई पैसा न देना चाहे तो किसी भी हालत में पैसा निकलवाया नहीं जा सकता। आज हुई कन्हैया चौधरी से मारपीट का मामला भी कुछ ऐसा ही है। ऐसे मामलों में पुलिस भी उनकी कोई मदद नहीं करती। पुलिस शिकायत तक दर्ज नहीं करती। कोरोना काल में वैसे ही मार्केट संकट से जूझ रहे हैं। सब्जी मार्केट बर्बाद हो रहे हैं और फिर पैसे अटक जाने से व्यापारियों की हालत और बदतर हो रही है।

कारोबारियों का कहना है कि वैसे मंडी में विवाद समिति बनी हुई है लेकिन विवादों को निपटाने में वह भी लाचार है।मालूम हो कि यहां 2800 लाइसेंसधारी आढती हैं। 1430 दुकानें हैं। इनमें से 438 बड़ी दुकानें हैं। बाकी छोटी हैं। इनमें फू्रट मंडी भी है। माशाखोर भी बैठते हैं जो आढतियों से माल लेकर बेचते हैं। मंडी में 150 होटल सप्लायर हैं। लोडिंग और बीचक 150 के करीब हैं। इस तरह से इन व्यापारियों की तादाद काफी है।यहां से पूरे उत्तर भारत में माल जाता है। सब्जी, फल के इन सैंकड़ों व्यापारियों के भुगतान संबंधी कोई नियामक एजेंसी नहीं है। ऐसे में इन्हें भारी संकट का सामना करना पड़ता है। अपना बेचे हुए माल का पैसा चसूलना उनके लिए कठिन साबित हो रहा है।