Monday, May 4, 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट: ‘मीडिया की स्वतंत्रता और नाबालिग की गोपनीयता में संतुलन जरूरी’

नई दिल्ली | मुख्य संवाददाता

दिल्ली हाईकोर्ट ने द्वारका एसयूवी सड़क दुर्घटना मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए मीडिया को निर्देश दिया है कि वह आरोपी नाबालिग की पहचान किसी भी रूप में उजागर न करे। हालांकि, अदालत ने मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध (गैग ऑर्डर) लगाने से इनकार करते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को पूरी तरह दबाया नहीं जा सकता।

प्रमुख बिंदु:

  • पहचान की सुरक्षा: कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 74 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 17 वर्षीय आरोपी का नाम, चेहरा या ऐसी कोई भी जानकारी साझा न की जाए जिससे उसकी पहचान उजागर हो।
  • मीडिया ट्रायल पर चिंता: याचिकाकर्ता (नाबालिग के पिता) ने दलील दी थी कि मीडिया ट्रायल के कारण उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं और उनकी सुरक्षा खतरे में है।
  • नोटिस जारी: न्यायमूर्ति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
    अदालत की टिप्पणी
    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, “हम मीडिया पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकते, लेकिन कानून के दायरे में रहकर रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है।” कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर नाबालिग की निजता का उल्लंघन न हो।
    मामले की पृष्ठभूमि:
    यह मामला 3 फरवरी 2026 को द्वारका में हुई उस दुखद दुर्घटना से संबंधित है, जहाँ एक तेज रफ्तार एसयूवी की चपेट में आने से 23 वर्षीय युवक साहिल की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा है।

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AI समिट बवाल: दिल्ली कोर्ट ने यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

AI समिट हंगामा: पटियाला हाउस कोर्ट ने यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

नई दिल्ली। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान विरोध प्रदर्शन के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तारी के एक दिन बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस रिमांड की मांग स्वीकार कर ली।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार?

गिरफ्तार कार्यकर्ताओं में कृष्णा हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिम्हा यादव शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सभी को शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम से विरोध प्रदर्शन करते हुए हिरासत में लिया गया था।

पुलिस का पक्ष

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान देशविरोधी नारे लगाए गए। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने ऐसी जगह को चुना, जहां बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधि मौजूद थे। साथ ही आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं।

पुलिस ने अदालत से कहा कि मामले में यह जांच करना आवश्यक है कि कथित साजिश किसने रची और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान पहनी गई टी-शर्ट्स कहां छपवाई गईं, इसकी भी जांच की जानी है। इन तथ्यों को सामने लाने के लिए पुलिस ने 5 दिन की कस्टडी की मांग की।

बचाव पक्ष की दलील

आरोपियों की ओर से पेश वकील ने पुलिस रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि यह गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने तर्क दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपियों ने शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराया और किसी को नुकसान पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं है।

वकील ने यह भी कहा कि आरोपी एक विपक्षी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और केवल प्रदर्शन के आधार पर गिरफ्तारी उचित नहीं है।

कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की मांग को स्वीकार कर लिया और चारों आरोपियों को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।

अब इस मामले में आगे की जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के पीछे क्या कारण थे और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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दिल्ली में रफ्तार का तांडव: बेकाबू कार ने ली डिलीवरी बॉय की जान

नई दिल्ली: दिल्ली की सड़कों पर तेज रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर काल बनकर टूटी है। पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर इलाके में शुक्रवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में एक डिलीवरी बॉय की दर्दनाक मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक हवा में उछलकर काफी दूर जा गिरा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

भीषण टक्कर: कार के खुले एयरबैग, बाइक के उड़े परखच्चे

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर लगते ही लग्जरी कार के सभी एयरबैग्स खुल गए। आमतौर पर एयरबैग्स तभी खुलते हैं जब टक्कर बेहद शक्तिशाली और उच्च गति पर हो। दुर्घटना में कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया है, वहीं डिलीवरी बॉय की बाइक के भी परखच्चे उड़ गए।

कर्तव्य पथ पर थमीं सांसें

मृतक डिलीवरी बॉय घटना के समय एक ऑर्डर डिलीवर करने जा रहा था। वह अपनी बाइक पर सवार होकर गंतव्य की ओर बढ़ ही रहा था कि पीछे से आ रही एक बेकाबू कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार चालक नशे की हालत में था और गाड़ी की रफ्तार सीमा से कहीं अधिक थी।

पुलिसिया कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

  • आरोपी ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है।
  • हादसे में शामिल कार और क्षतिग्रस्त बाइक को जब्त कर लिया गया है।
  • आरोपी का मेडिकल टेस्ट कराया गया है ताकि ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ की पुष्टि हो सके।

हालांकि, पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर मेडिकल रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया है, लेकिन शुरुआती जांच तेज रफ्तार और लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।

बढ़ते सवाल: कब सुरक्षित होंगी रात में दिल्ली की सड़कें?

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में ‘नाइट ड्राइविंग’ और ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ के खतरों को उजागर करता है। आखिर क्यों रात के सन्नाटे में गाड़ियों की रफ्तार बेकाबू हो जाती है? मासूम डिलीवरी बॉय, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए रात भर सड़कों पर रहते हैं, उनकी सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है?

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दिल्ली के मुखर्जी नगर में दिल दहला देने वाली वारदात: महिला ने 1 साल 9 महीने के मासूम का गला घोंटकर की हत्या

दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। इलाके के एक पार्क में एक महिला द्वारा 1 साल 9 महीने के मासूम बच्चे की गला दबाकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 20 फरवरी शुक्रवार को दोपहर करीब 1:30 बजे पीसीआर को सूचना मिली कि SFS फ्लैट्स, मुखर्जी नगर स्थित एक पार्क में एक महिला ने छोटे बच्चे का गला दबा दिया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।

स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को महिला के चंगुल से छुड़ाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

मृतक बच्चे की पहचान हादी (पुत्र आदिल), निवासी ओल्ड सीलमपुर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादी अपनी मां उजमा के साथ अपने ननिहाल आया हुआ था। घटना की जानकारी बच्चे के मामा द्वारा पुलिस को दी गई।

आरोपी महिला की पहचान

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी महिला अज़रा (30 वर्ष) पार्क में ही बेहोश हालत में मिली। उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसकी हालत और मानसिक स्थिति की जांच की जा रही है।

जांच जारी

पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी महिला ने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया। हत्या के पीछे की वजह क्या थी, इसे लेकर पुलिस गहराई से जांच में जुटी है।

इस दर्दनाक घटना ने इलाके के लोगों को हिला कर रख दिया है। मासूम की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोग भी इस घटना को लेकर हैरान और आक्रोशित हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले के सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा।

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मोदी सरकार पर बरसी कांग्रेस; एआई वीडियो हटाने को बताया आईटी नियमों का दुरुपयोग

एहसान अंसारी,दिल्ली दर्पण

नई दिल्ली: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने और राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने के लिए आईटी नियमों के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले छह हफ्तों के भीतर कांग्रेस के नौ एआई (AI) जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया से डिलीट कराए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी वीडियो पर कानून के अनुसार ‘एआई डिस्क्लेमर’ मौजूद था, जिससे भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं थी, फिर भी इन्हें तानाशाही पूर्ण तरीके से हटवाया गया।

सुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि इन वीडियो को हटाने के आदेश भाजपा शासित राज्यों—बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पुलिस के साथ-साथ सीधे केंद्रीय आईटी मंत्रालय द्वारा दिए गए। उन्होंने कहा कि इन वीडियो में कोई काल्पनिक बात नहीं थी, बल्कि सड़क से लेकर संसद तक उठाए गए ज्वलंत मुद्दे थे। इनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की जिम्मेदारी, अमेरिका के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल आयात और अडानी मामले जैसे विषयों पर तीखा राजनीतिक व्यंग्य किया गया था। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य को ‘डीपफेक’ की श्रेणी में रखकर हटाना अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है।

सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए श्रीनेत ने कहा कि सोशल मीडिया टीम के युवाओं को पुलिस के जरिए डराया जा रहा है और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के चैनलों को ‘डिमोनेटाइज़’ (कमाई बंद करना) किया जा रहा है। उन्होंने आगामी ‘सहयोग’ पोर्टल को लेकर भी आगाह किया, जिसे वे ऑनलाइन सेंसरशिप का हथियार मानती हैं। दिल्ली में आयोजित एआई समिट पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि एक वैश्विक आयोजन को केवल प्रधानमंत्री के ‘फोटो शूट’ तक सीमित कर दिया गया, जहाँ बुनियादी सुविधाएं और इंटरनेट तक स्थिर नहीं था। उन्होंने चीनी रोबोट को स्वदेशी बताकर प्रचारित करने की घटना को देश की छवि धूमिल करने वाला बताया।

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