Saturday, May 9, 2026
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तुर्कमान गेट हिंसा केस: पुलिस पर पथराव, 8 धाराओं में मुकदमा

नई दिल्ली:
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हालात बेकाबू हो गए। एमसीडी की ओर से चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल तैनात है।

जानकारी के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रात करीब 2 बजे शुरू हुई। एमसीडी की टीम करीब 30 से अधिक बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची और मस्जिद से सटे अवैध ढांचों को हटाने का काम शुरू किया। कार्रवाई के दौरान कुछ उपद्रवी वहां जमा हो गए और पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही थी कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद से सटे दवाखाने और बारात घर को अवैध घोषित किया था, जिसके बाद एमसीडी ने यह कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने से पहले स्थानीय लोगों को सामान हटाने की मोहलत दी गई थी। इसके साथ ही रात में ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर कई सड़कों को बंद कर दिया गया था।

पथराव में SHO समेत कई पुलिसकर्मी घायल

पथराव की घटना में चांदनी महल थाना प्रभारी (SHO) महावीर प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। कुछ उपद्रवियों ने पुलिस द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोलों को वापस फेंकने की कोशिश भी की, हालांकि पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया।

CCTV और बॉडी कैम से होगी आरोपियों की पहचान

दिल्ली पुलिस ने बताया कि पथराव में शामिल आरोपियों की पहचान पुलिसकर्मियों के बॉडी कैम फुटेज और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से की जाएगी। अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और अन्य की तलाश जारी है।

पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने बताया कि एमसीडी की मांग पर रात में कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि सुबह 10 बजे तक रास्ते खोल दिए जाएंगे, लेकिन एहतियात के तौर पर इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती बनी रहेगी। पथराव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 के तहत केस दर्ज किया है। दर्ज की गई प्रमुख धाराएं इस प्रकार हैं:

  • धारा 221: लोक सेवक को कर्तव्य से रोकना – 5 साल तक की जेल या जुर्माना
  • धारा 132: लोक सेवक पर हमला – 2 साल तक की जेल या जुर्माना
  • धारा 121: लोक सेवक को गंभीर चोट पहुंचाने की नीयत – जेल या जुर्माना
  • धारा 191(2) व 191(3): झूठी जानकारी/साक्ष्य – 2 से 5 साल तक की जेल
  • धारा 223(A): गैरकानूनी जमावड़ा – 3 महीने की जेल या जुर्माना
  • धारा 3(5) BNS: सामूहिक अपराध की जवाबदेही
  • PDPP Act 1984, धारा 3: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान – 6 महीने से 10 साल तक की जेल

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‘झूठ बोलो और भाग जाओ’ की राजनीति अब दिल्ली में नहीं चलेगी: आशीष सूद

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

नई दिल्ली, 6 जनवरी: दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने आज एक पत्रकार वार्ता के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। श्री सूद ने कहा कि केजरीवाल की राजनीति ‘झूठ बोलो और भाग जाओ’ यानी ‘शूट एंड स्कूट’ की बन चुकी है, जिसे दिल्ली की जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल दिल्ली में बद-अमनी और भ्रम फैलाकर अपनी खोई हुई राजनीतिक प्रासंगिकता को वापस पाने का असफल प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि केजरीवाल को अपने झूठ और लोगों को गुमराह करने वाली राजनीति के लिए सार्वजनिक रूप से जनता से माफी मांगनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने पिछली पत्रकार वार्ता का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर में कहीं भी शिक्षकों को कुत्तों की गिनती के काम में लगाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी कि यदि सर्कुलर में ऐसा कोई उल्लेख हो तो वे शिक्षा मंत्री के नाते माफी मांगने को तैयार हैं, अन्यथा केजरीवाल को दिल्ली की जनता को गुमराह करने के लिए क्षमा याचना करनी चाहिए। श्री सूद ने दावा किया कि उस दिन के बाद से आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर बात करना ही बंद कर दिया है, क्योंकि उनकी सच्चाई सबके सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

श्री सूद ने आगे कहा कि यह आम आदमी पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पहले निराधार आरोप लगाए जाते हैं, सनसनी फैलाई जाती है और बाद में जिम्मेदारी से पीछे हट जाया जाता है। उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे पर भी ‘आप’ को घेरते हुए कहा कि सरकार चर्चा से नहीं भाग रही है और यह विषय विधानसभा की कार्यसूची में स्पष्ट रूप से दर्ज है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केजरीवाल पहले भी मानहानि के मामलों में माफी मांग चुके हैं और इस बार भी सरकार बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें बिना मुकदमे के माफ करने को तैयार है, बशर्ते वे जनता के सामने सच्चाई स्वीकार करें। इस संबंध में शिक्षा मंत्री ने केजरीवाल को एक कड़ा पत्र लिखकर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई है।

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जागरूक जनता-सक्रिय जनप्रतिनिधि: जब जनता बनी विधायक की ‘आंख और कान’, तो मिनटों में सुधरी तिमारपुर की व्यवस्था

दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: तिमारपुर के गोल मार्केट इलाके में रविवार को हुई एक घटना ने यह साबित कर दिया कि यदि जागरूक जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ‘आंख-कान’ बन जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान मिनटों में संभव है। रविवार को दिल्ली जल बोर्ड द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के पाइपलाइन कार्य के लिए की गई खुदाई और सड़क पर गिरे एक पेड़ ने पूरे क्षेत्र की रफ्तार रोक दी थी। लेकिन स्थानीय युवाओं की सजगता और विधायक की त्वरित प्रतिक्रिया ने घंटों से जारी इस गतिरोध को खत्म कर दिया, जिससे न केवल यातायात सुचारु हुआ बल्कि एक सकारात्मक संदेश भी गया।
दरअसल, अवकाश का दिन होने के कारण सड़क पर वाहनों का भारी दबाव था। इसी बीच बिना किसी ट्रैफिक संकेतक के जेसीबी मशीनों द्वारा सड़क खोद दिए जाने से मार्ग का एक बड़ा हिस्सा बंद हो गया। एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंसकर रह गईं। इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए क्षेत्र के सजग युवाओं, उज्ज्वल प्रताप और पुनीत शर्मा ने मूकदर्शक बनने के बजाय जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने तुरंत स्थानीय विधायक सूर्य प्रकाश खत्री को जमीनी हालात की जानकारी दी। युवाओं की इस पहल ने विधायक के लिए एक रियल-टाइम अलर्ट का काम किया, जिससे प्रशासन तक सूचना पहुँचने में लगने वाला समय बच गया।


सूचना मिलते ही विधायक सूर्य प्रकाश खत्री सक्रिय हुए और अपनी टीम के साथ खुद मौके पर पहुँचे। उन्होंने तत्काल सड़क पर गिरे पेड़ को हटवाने के साथ-साथ जल बोर्ड के कार्य के कारण उपजी बाधाओं को दूर कराया। विधायक की मौजूदगी ने मौके पर मौजूद तंत्र को गति दी और देखते ही देखते रास्ता साफ हो गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि विकास और व्यवस्था केवल प्रशासन के भरोसे नहीं चलती; इसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। जब जागरूक जनता अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जनप्रतिनिधि को सही समय पर सही जानकारी देती है, तो व्यवस्थाएं अधिक जवाबदेह और प्रभावी ढंग से काम करती हैं।

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भारत नगर थाना – पुलिस ने नशा तस्कर को दबोचा, 21 ग्राम हेरोइन बरामद

दिल्ली दर्पण ब्यूरो

नई दिल्ली | राजधानी में नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में उत्तर-पश्चिम जिला की भारत नगर थाना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस टीम ने जेजे कॉलोनी, वजीरपुर क्षेत्र से एक नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से 21 ग्राम हेरोइन (स्मैक) बरामद की गई है। पकड़ा गया आरोपी छोटे-छोटे पाउच बनाकर ग्राहकों को नशे की सप्लाई करता था। गुप्त सूचना पर बिछाया जाल
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तर-पश्चिम जिला) भीष्म सिंह के अनुसार, 3 जनवरी की रात लगभग 10:30 बजे उप-निरीक्षक गवर्नर सिंह को सूचना मिली थी कि शुभम नामक युवक इलाके में स्मैक की तस्करी कर रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसीपी अशोक विहार आकाश रावत के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी राम किशोर के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।


पुलिस टीम ने हरियाणा नहर के पास, श्मशान घाट के सामने रणनीतिक घेराबंदी की। मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने संदिग्ध युवक को धर दबोचा। तलाशी लेने पर उसके पास से 43 पॉली पाउच मिले, जिनमें कुल 21 ग्राम हेरोइन छिपाई गई थी।
आसान कमाई के लिए बना तस्कर
पकड़े गए आरोपी की पहचान शुभम (25), निवासी जेजे कॉलोनी, वजीरपुर के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह पिछले कुछ महीनों से सक्रिय रूप से तस्करी में लिप्त था। वह दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से थोक में नशा लाकर स्थानीय ग्राहकों को ऊंचे दामों पर बेचता था। आरोपी ने कबूल किया कि कम समय में आसान पैसा कमाने के लालच में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा।

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जमानत खारिज पर उमर खालिद के पिता का बयान सामने आया, जानिए क्या कहा

नई दिल्ली।
दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि इसी केस में नामजद अन्य पांच आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी गई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने पर उनके पिता एस.क्यू.आर. इलियास की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने फैसले पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा, “मुझे कुछ नहीं कहना है, फैसला आपके सामने है।” उनके इस संक्षिप्त बयान को फैसले के प्रति असहमति और निराशा के रूप में देखा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए इस स्तर पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी एक वर्ष तक इस मामले में दोबारा जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे

हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को राहत देते हुए 12 सख्त शर्तों के साथ जमानत प्रदान की है। अदालत का कहना था कि इन आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री को देखते हुए उन्हें सशर्त राहत दी जा सकती है।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यदि एक साल के भीतर ट्रायल के दौरान गवाहों की गवाही पूरी नहीं होती, तो उमर खालिद और शरजील इमाम निचली अदालत में दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया में देरी को लेकर अदालत की चिंता को भी दर्शाती है।

गौरतलब है कि इससे पहले 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा है, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।

इससे पहले उमर खालिद को अपनी बहन के निकाह में शामिल होने के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट से 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत मिली थी। इस दौरान अदालत ने कई सख्त शर्तें लगाई थीं। अंतरिम रिहाई की अवधि में उमर खालिद को सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक, किसी भी गवाह से संपर्क न करने, और केवल परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों व करीबी दोस्तों से मिलने की अनुमति दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद एक बार फिर 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश मामले पर बहस तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें ट्रायल की प्रगति और आने वाले महीनों में अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।

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