Saturday, May 16, 2026
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दिल्ली में नकली घरेलू सामान का बड़ा जाल बेनकाब, ENO-ऑलआउट-टाटा नमक की नकल पकड़ी गई

नई दिल्ली | Delhi Fake Ghee Racket Busted

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली घी, टाटा नमक, ईनो, ऑल आउट और वीट जैसे नामी ब्रांड्स के एक खतरनाक रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज-1 टीम ने इस मामले में चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में नकली सामान बरामद किया है।

गुप्त सूचना से हुआ खुलासा
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि उत्तम नगर के दल मिल रोड इलाके में नकली सामान की बड़ी खेप सप्लाई होने वाली है। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया और दोपहर करीब 2:15 बजे एक संदिग्ध टेंपो को रोककर तलाशी ली। टेंपो से 1131 लीटर नकली घी, 3000 किलो नकली टाटा नमक, 8640 ईनो सैशे, 1200 ऑल आउट और 1152 वीट प्रोडक्ट्स बरामद किए गए। मौके पर बुलाए गए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जांच के बाद पुष्टि की कि यह सारा सामान नकली है।

नकली फैक्ट्री और पैकिंग यूनिट का भंडाफोड़
पूछताछ में मुख्य आरोपी नितिन कुमार ने खुलासा किया कि कंझावला इंडस्ट्रियल एरिया में नकली घी बनाने की फैक्ट्री चलाई जा रही थी। यहां घटिया कच्चे माल से घी तैयार कर उसे अमूल, पतंजलि और मधुसूदन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के फर्जी पैकेट में पैक किया जाता था। पुलिस ने फैक्ट्री से पैकिंग मशीनें, फर्जी रैपर, लेबल और कच्चा माल बरामद किया।
इसके अलावा निलोठी एक्सटेंशन इलाके में नकली टाटा नमक बनाने की एक अलग यूनिट का भी खुलासा हुआ है।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम हैं—

  • नितिन कुमार (38), निवासी उत्तम नगर
  • रजत सिंघल उर्फ चिंटू (38), निवासी उत्तम नगर
  • सुरेंद्र गुज्जर (45), निवासी उत्तम नगर
  • मुजाहिद उर्फ कार्तिक (38), निवासी मंगोलपुरी

पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी मिलकर नकली ब्रांडेड सामान बनाने, पैक करने और दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करने का पूरा नेटवर्क चला रहे थे।

बरामदगी का पूरा ब्योरा

  • 1131 लीटर नकली घी
    • 531 लीटर अमूल
    • 255 लीटर पतंजलि
    • 345 लीटर मधुसूदन
  • 3000 किलो नकली टाटा नमक
  • 8640 ईनो सैशे
  • 1200 ऑल आउट
  • 1152 वीट प्रोडक्ट्स

आरोपियों की भूमिका
पुलिस जांच में सामने आया है कि नितिन कुमार पिछले 10–12 वर्षों से होलसेल का काम कर रहा था और अलग-अलग शहरों से नकली सामान मंगवाता था। उसका नाम पहले भी ऐसे मामलों में सामने आ चुका है।
रजत सिंघल और सुरेंद्र गुज्जर साप्ताहिक बाजारों और दुकानों में सस्ते दामों पर नकली सामान सप्लाई करते थे। वहीं, मुजाहिद उर्फ कार्तिक अपने घर पर नकली ऑल आउट तैयार करता था, जबकि उसका एक रिश्तेदार नकली वीट बनाने का काम करता था।

लालच में सेहत से खिलवाड़
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कम लागत में नकली उत्पाद तैयार कर 50 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमा रहे थे, लेकिन इस लालच में उन्होंने लाखों लोगों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया। नकली घी और नमक के सेवन से गंभीर बीमारियों की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और कॉपीराइट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और दिल्ली-एनसीआर के किन-किन इलाकों में नकली सामान की सप्लाई की जा रही थी।

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मोदी मैजिक: 2025 की मजबूती से 2026 में उड़ेगा भारतीय व्यापार का परचम — प्रवीन खंडेलवाल 

-दिल्ली दर्पण ब्यूरो नई दिल्ली | विशेष संवाददाता नए वर्ष की पूर्व संध्या पर चांदनी चौक से सांसद और कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने देश के व्यापारिक भविष्य को लेकर बड़ा उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्ष 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है और अब 2026 में भारतीय व्यापार एक ‘बड़ी छलांग’ लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।नीतिगत सुधारों से बढ़ा व्यापारियों का आत्मविश्वाससांसद खंडेलवाल ने बीते वर्ष की समीक्षा करते हुए कहा कि 2025 नीतिगत स्थिरता और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (Ease of Doing Business) के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधारों का वर्ष रहा। उन्होंने कहा, “डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति दी है।”चुनौतियों के बीच दिखाई मजबूतीश्री खंडेलवाल के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के व्यापारिक क्षेत्र ने अद्भुत लचीलापन दिखाया है। उन्होंने इसके पीछे मुख्य कारणों को रेखांकित करते हुए कहा कि:कर सुधार: पारदर्शी टैक्स व्यवस्था ने व्यापार सुगम बनाया।लॉजिस्टिक्स: बुनियादी ढांचे में सुधार से माल की आवाजाही तेज और सस्ती हुई।अनुपालन में सरलता: कागजी कार्रवाई कम होने से छोटे व्यापारियों को राहत मिली।सुलभ ऋण: बैंकिंग सुधारों से व्यापारियों को पूंजी तक आसान पहुंच मिली। 2026: 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर निर्णायक कदमआगामी वर्ष 2026 का खाका खींचते हुए कैट महामंत्री ने कहा कि व्यापार जगत नई आशा और भारी आत्मविश्वास के साथ नए साल में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ेगा।”व्यापारिक समुदाय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास रखता है। हम सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एक ‘आत्मनिर्भर’ और वैश्विक स्तर पर सम्मानित भारत के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

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एंजेल चकमा हत्याकांड पर उबाल: दिल्ली के छात्रों का आक्रोश, जंतर-मंतर पर NSUI का कैंडल मार्च

नई दिल्ली | Angel Chakma Murder Case

देहरादून में नस्लीय घृणा से जुड़ी हिंसा की घटना के खिलाफ राजधानी दिल्ली में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकाला गया, जहां छात्रों ने पीड़ित छात्र एंजेल चकमा को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। हाथों में मोमबत्तियां लेकर उन्होंने नस्लवाद और घृणा अपराधों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि एंजेल चकमा के साथ हुई हिंसा सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि नफरत और असहिष्णुता किस हद तक बढ़ती जा रही है।

पहचान के आधार पर बनाया गया निशाना
छात्रों का आरोप है कि उत्तर-पूर्व से आने वाले एंजेल चकमा को उसकी पहचान और शक्ल-सूरत के कारण निशाना बनाया गया। हमलावरों द्वारा नस्लीय गालियां देने और “चीनी” जैसे अपमानजनक शब्द कहने की बात सामने आई है। एनएसयूआई का कहना है कि यह घटना बताती है कि नस्लीय सोच आज भी समाज में गहराई से मौजूद है और इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कार्रवाई में देरी पर सरकार से सवाल
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड की भाजपा शासित सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए। छात्रों ने कहा कि घटना के करीब 20 दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और आरोपी खुलेआम घूमते रहे। उनका कहना था कि अंजेल की मौत के बाद ही एफआईआर दर्ज होना प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

एनएसयूआई का आरोप—नफरत के माहौल का नतीजा
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि यह घटना कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ते नफरत और विभाजन के माहौल का परिणाम है। संगठन का आरोप है कि ऐसी सोच अपराधियों को बेखौफ बनाती है और उन्हें दंडमुक्ति का भरोसा देती है।

कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि एंजेल चकमा की हत्या नफरत की सोच का नतीजा है, लेकिन न्याय की हत्या सरकार की चुप्पी ने की। उन्होंने सवाल उठाया कि 20 दिनों तक कोई कार्रवाई न होना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मिलीभगत की आशंका भी पैदा करता है।

संविधान और समानता का संदेश
एनएसयूआई ने संविधान के मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि भारत हर भारतीय का है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या समुदाय से हो। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी को भी उसकी पहचान या रूप-रंग के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

कैंडल मार्च के जरिए एनएसयूआई ने साफ संदेश दिया कि नस्लवाद, घृणा अपराध और हिंसा के खिलाफ उसका संघर्ष जारी रहेगा और एंजेल चकमा को न्याय मिलने तक आंदोलन थमेगा नहीं।

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दिल्ली में नकली घी-नमक फैक्ट्री का भंडाफोड़, क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली घी, नमक और रोज़मर्रा के इस्तेमाल के नामी ब्रांड्स के उत्पाद बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में उत्तम नगर इलाके से चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से भारी मात्रा में नकली सामान बरामद हुआ है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लोगों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहा था।

गुप्त सूचना से हुआ खुलासा
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि उत्तम नगर के दल मिल रोड क्षेत्र में नकली सामान की एक बड़ी खेप सप्लाई की जाने वाली है। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया और दोपहर करीब 2:15 बजे एक संदिग्ध टेंपो को रोककर तलाशी ली। टेंपो से 1131 लीटर नकली घी, करीब 3000 किलो नकली टाटा नमक, 8640 ईनो सैशे, 1200 ऑल आउट और 1152 वीट जैसे उत्पाद बरामद किए गए। मौके पर मौजूद संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जांच के बाद पुष्टि की कि जब्त किया गया पूरा सामान नकली है।

नकली फैक्ट्री और पैकिंग यूनिट का भंडाफोड़
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी नितिन कुमार ने खुलासा किया कि कंझावला इंडस्ट्रियल एरिया में नकली घी बनाने की एक फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। यहां घटिया कच्चे माल से घी तैयार कर उसे अमूल, पतंजलि और मधुसूदन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के फर्जी पैकेट में भरकर बाजार में उतारा जाता था। पुलिस ने फैक्ट्री पर छापा मारकर पैकिंग मशीनें, नकली रैपर, लेबल और कच्चा माल बरामद किया।

इसके अलावा निलोठी एक्सटेंशन इलाके में नकली टाटा नमक तैयार करने की एक अलग यूनिट का भी पता चला है, जहां से बड़ी मात्रा में मिलावटी नमक पैक कर सप्लाई किया जा रहा था।

लालच में जनता की सेहत से खिलवाड़
पुलिस के अनुसार आरोपी कम लागत में नकली उत्पाद तैयार कर 50 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमा रहे थे। हालांकि इस लालच में उन्होंने आम लोगों की सेहत को गंभीर खतरे में डाल दिया। नकली घी, नमक और अन्य उत्पादों के सेवन से गंभीर बीमारियों की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और कॉपीराइट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह रैकेट कितने समय से सक्रिय था और दिल्ली सहित किन-किन इलाकों में नकली सामान की सप्लाई की जा रही थी।

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गिग वर्कर्स की हड़ताल से new year ईव समारोहों पर मंडराया संकट

New year ईव से ठीक पहले गिग वर्कर्स की प्रस्तावित हड़ताल ने जश्न की तैयारियों पर संकट खड़ा कर दिया है। फूड डिलीवरी, कैब सर्विस, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं, जिसका सीधा असर 31 दिसंबर की रात होने वाले समारोहों पर पड़ सकता है।

गिग वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से कम भुगतान, अनियमित काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा की कमी और कंपनियों की मनमानी नीतियों से परेशान हैं। new year ईव जैसे व्यस्त मौके पर काम का दबाव कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन उसके अनुपात में उन्हें न तो उचित मेहनताना मिलता है और न ही कोई अतिरिक्त सुरक्षा या बीमा सुविधा दी जाती है। इन्हीं मुद्दों को लेकर देश के कई शहरों में गिग वर्कर्स ने एकजुट होकर हड़ताल की घोषणा की है।

इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। new year ईव पर लोग घर बैठे खाना ऑर्डर करना और देर रात सुरक्षित यात्रा के लिए कैब सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। यदि बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर और ड्राइवर काम पर नहीं आए, तो रेस्टोरेंट्स, होटल्स और पार्टी आयोजकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई आयोजकों ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम शुरू कर दिया है।

वहीं, आम लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि अगर कैब और फूड डिलीवरी सेवाएं ठप रहीं, तो वे न्यू ईयर सेलिब्रेशन कैसे मैनेज करेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि इस हड़ताल से यह साफ हो जाता है कि गिग इकोनॉमी में काम करने वालों की समस्याएं कितनी गंभीर हैं, जिन्हें अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, कंपनियों का कहना है कि वे गिग वर्कर्स से लगातार संवाद में हैं और स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने हड़ताल के दिन इंसेंटिव बढ़ाने और अतिरिक्त बोनस देने की बात भी कही है, ताकि सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों। हालांकि, गिग वर्कर्स संगठनों का दावा है कि जब तक ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कुल मिलाकर, गिग वर्कर्स की हड़ताल ने new year ईव के जश्न पर अनिश्चितता का साया डाल दिया है। यह स्थिति न सिर्फ एक रात के समारोहों से जुड़ी है, बल्कि गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के अधिकार और भविष्य से भी जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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