Wednesday, December 17, 2025
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करोल बाग के कारखाने में खुलासा—चीन से आए पार्ट्स से बन रहे थे नकली IMEI वाले अवैध मोबाइल

दिल्ली का करोल बाग—एक ऐसा बाज़ार जहाँ रोज़ हजारों लोग मोबाइल खरीदते, रिपेयर कराते और सामान लेते हैं। लेकिन इन्हीं भीड़भाड़ वाली गलियों के बीच एक ऐसा कमरा मिला, जो बाहर से तो एक साधारण दुकान जैसा दिखता था, लेकिन अंदर की हकीकत कुछ और ही थी।

जब पुलिस टीम यहाँ पहुँची और दरवाज़ा खोला गया, तो सामने का दृश्य देखकर हर कोई कुछ सेकंड के लिए ठहर गया। टेबल पर आधे बने मोबाइल पड़े थे, फर्श पर फैले हुए दर्जनों पार्ट्स—कहीं बैटरी, कहीं डिस्प्ले, तो कहीं छोटे-छोटे मदरबोर्ड। कमरे के एक कोने में बैठा व्यक्ति कंप्यूटर पर तेजी से टाइप कर रहा था, जैसे किसी को पता न चले कि वह क्या कर रहा है।

उस कंप्यूटर पर चल रहा था—IMEI बदलने वाला सॉफ्टवेयर।
यानी हर फोन की ‘पहचान’ को मिटाकर, उस पर एक नकली पहचान चिपकाई जा रही थी।

जांच में पता चला कि यह लोग चीन से सस्ते पार्ट्स मंगवाते थे। ई-कॉमर्स और कार्गो के जरिए आने वाले ये पार्ट्स अलग-अलग नामों और छोटे पार्सलों में भेजे जाते थे, ताकि किसी को शक ही न हो। इन पार्ट्स को जोड़कर एक नया फोन खड़ा किया जाता—ऐसा फोन जिसकी दुनिया में कोई असली एंट्री ही नहीं होती थी।

यह काम मजदूरी या कमाई का एक छोटा रास्ता नहीं था—यह एक पूरा सिस्टम था, जिसमें हर फोन तैयार होने के बाद उसका IMEI बदला जाता था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यही IMEI नंबर मोबाइल की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और असली यूज़र तक पहुँचने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता होता है। लेकिन यहाँ तो फोन को ऐसी पहचान दी जा रही थी जो असल में कहीं मौजूद ही नहीं थी।

एक अधिकारी ने बताया—
“सबसे डरावनी बात यही है। ऐसा फोन अपराधी के हाथ में चले जाए तो उसे ढूँढना लगभग नामुमकिन हो जाता है।”

गिरफ्तार किए गए लोगों ने कबूल किया कि वे यह फोन दिल्ली के बाहर के बाज़ारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते थे। कई खरीदारों को तो पता भी नहीं रहता था कि उनके हाथ में पकड़ा फोन असली नहीं, बल्कि एक ऐसा फोन है जिसका कोई रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम तक में नहीं मिलता।

इस कार्रवाई ने सिर्फ एक रैकेट नहीं पकड़ा—इसने एक बड़ी सच्चाई उजागर की है। हमारे हाथों में पकड़ा एक छोटा सा मोबाइल फोन भी अगर गलत तरीके से बनाया गया हो, तो वह हमारी सुरक्षा और देश की कानून-व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बन सकता है।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क का दायरा समझने की कोशिश कर रही है, ताकि पता चल सके कि करोल बाग का यह कारखाना अकेला था या इसके पीछे एक बड़ी चेन काम कर रही थी।

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