Wednesday, December 17, 2025
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बढ़ते स्कूल फीस को लेकर सियासत हुई गरम, एक बार फिर बीजेपी का पलटवार

अंशु ठाकुर, दिल्ली दर्पण टीवी

दिल्ली के द्वारका स्थित डीपीएस स्कूल में फीस वृद्धि को लेकर चल रहा विवाद अब तूल पकड़ चुका है। अभिभावकों का गुस्सा, आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच तीखी सियासी जंग, और दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख इस मामले को सुर्खियों में ला रहा है। मनमानी फीस वृद्धि, छात्रों को स्कूल से निकाले जाने, और बाउंसरों की तैनाती जैसे गंभीर आरोपों ने दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आइए, इस विवाद की पूरी कहानी और इसके प्रभावों को समझते हैं।

डीपीएस द्वारका में फीस वृद्धि का संकट

डीपीएस द्वारका के अभिभावक स्कूल पर “अनुचित और अत्यधिक” फीस वृद्धि का आरोप लगा रहे हैं। कुछ अभिभावकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फीस में 82% तक की बढ़ोतरी हुई है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्कूल ने कथित तौर पर बढ़ी हुई फीस न चुकाने के कारण 32 छात्रों को स्कूल से निकाल दिया और उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश से रोक दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि स्कूल ने गेट पर बाउंसर तैनात किए, जिन्हें बच्चों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया गया। एक अभिभावक, संगीता, ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हम शिक्षा निदेशालय (DoE) के नियमों के अनुसार फीस देने को तैयार हैं, लेकिन स्कूल एकतरफा फीस बढ़ा रहा है। मेरी बेटी को बाउंसर ने रोका—यह कैसा स्कूल है?”

दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। 16 अप्रैल 2025 को, जस्टिस सचिन दत्ता ने डीपीएस द्वारका के व्यवहार को “अमानवीय” और “चिंताजनक” बताते हुए स्कूल को फटकार लगाई। कोर्ट ने स्कूल को भेदभावपूर्ण कार्रवाइयों से रोका और निकाले गए छात्रों को आंशिक फीस जमा करने पर पुनः प्रवेश देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि स्कूल ने दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम की धारा 35(4) का उल्लंघन करते हुए बिना पूर्व नोटिस के यह कार्रवाई कैसे की। 19 मई को, कोर्ट ने 32 निकाले गए छात्रों के अभिभावकों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। 5 जून को, डीपीएस द्वारका ने कोर्ट को सूचित किया कि उसने 32 छात्रों का निलंबन वापस ले लिया है। इसके अलावा, 100 से अधिक अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन को सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग को लेकर कोर्ट का रुख किया है।

सियासी जंग: आप बनाम बीजेपी

यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। आप की विपक्षी नेता आतिशी ने बीजेपी सरकार पर निजी स्कूलों को नियंत्रित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। 5 जून 2025 को, आतिशी ने पीड़ित अभिभावकों से मुलाकात की और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) ड्राफ्ट बिल, 2025 पर विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सार्वजनिक परामर्श के अध्यादेश लाना निजी स्कूलों के हितों को बढ़ावा देगा। आतिशी ने कहा, “बीजेपी सरकार के आते ही निजी स्कूलों को लूट की खुली छूट मिल गई है। डीपीएस द्वारका ने 34 बच्चों को निकाल दिया—यह शर्मनाक है।”

इसके जवाब में, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आप पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि फीस वृद्धि की समस्या आप सरकार के कार्यकाल से चली आ रही है और बीजेपी अब इस मुद्दे को हल करने के लिए कदम उठा रही है। सूद ने कहा, “यह समस्या आप के समय से चली आ रही है। तब भी स्कूलों ने मनमानी की और आप ने कुछ नहीं किया। अब बीजेपी एक पारदर्शी प्रणाली ला रही है।”

सरकारी और कानूनी कदम

दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2025 में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) ड्राफ्ट बिल, 2025 को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य फीस वृद्धि में पारदर्शिता और नियमन सुनिश्चित करना है। हालांकि, आप ने इस बिल को “सतही” करार देते हुए कहा कि इसमें अभिभावकों के साथ कोई चर्चा नहीं की गई। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने स्कूलों को फीस वृद्धि से पहले अनुमति लेने का निर्देश दिया है, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं हो रहा। कोर्ट ने भी DoE को स्कूलों की मनमानी पर नजर रखने को कहा है।

अभिभावकों का आक्रोश और भविष्य की राह

अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि अगर फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। कई अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज कर दी है, जिसमें बाउंसरों की तैनाती को “अमानवीय” और “गंदी” हरकत बताया गया है। आप ने भी जनता की राय लेने के लिए एक ईमेल (fee.consultation.aap@gmail.com) शुरू किया है, ताकि फीस नियमन के लिए एक मजबूत कानून बनाया जा सके।

डीपीएस द्वारका का फीस वृद्धि विवाद न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि दिल्ली की सियासत को भी गरमा रहा है। अभिभावकों का गुस्सा, कोर्ट की सख्ती, और आप-बीजेपी की तीखी जंग इस मामले को और जटिल बना रही है। सवाल यह है कि क्या अभिभावकों को न्याय मिलेगा और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी? इस मुद्दे पर दिल्ली की जनता और प्रशासन की नजरें टिकी हैं।

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