सामग्री पर जाएँ
ताज़ा
ग्रेटर नोएडा में बनेगा रोबोटिक्स और एआई पार्क, यूपी कैबिनेट ने दी 69 एकड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरीनोएडा में जीएसटी की महिला अधिकारी पर 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, विभाग ने नकारापानीपत के तामशाबाद टोल पर टैक्स को लेकर बवाल, मारपीट में 3 कर्मचारी घायलMCD शिक्षा समिति के बड़े फैसले: 50 हजार नए दाखिलों का लक्ष्य, स्मार्ट बोर्ड और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोरदिल्ली: मोहित उर्फ बाबा गैंग का वांछित आरोपी हर्ष गिरफ्तार, देसी पिस्तौल बरामदफ्रांस में शिक्षा प्रस्ताव खारिज, छात्र आंदोलन जारी रखने पर अड़े; देशभर में बढ़े तनाव के बीच सैकड़ों गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा में बनेगा रोबोटिक्स और एआई पार्क, यूपी कैबिनेट ने दी 69 एकड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी

प्रगति पार्क के जरिए एक लाख से अधिक रोजगार मिलने और राज्य की अर्थव्यवस्था में सालाना 2,000 करोड़ रुपये जुड़ने का अनुमान है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
शेयर
28 अक्तूबर 2026 · 12:09 pm119 व्यूज़
ग्रेटर नोएडा में बनेगा रोबोटिक्स और एआई पार्क, यूपी कैबिनेट ने दी 69 एकड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी
ग्रेटर नोएडा में बनेगा रोबोटिक्स और एआई पार्क, यूपी कैबिनेट ने दी 69 एकड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी — The Hindu

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा में उन्नत तकनीक और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'प्रगति' (प्लेटफॉर्म फॉर रोबोटिक्स एंड एआई ग्रोथ थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) पार्क की स्थापना को हरी झंडी दिखाई गई।

सरकारी बयान के अनुसार, यह परियोजना लगभग 69.52 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी। यह पार्क रोबोटिक्स कंपनियों, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप, शोध संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों के लिए एकीकृत सुविधाएं मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। परियोजना का उद्देश्य राज्य को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाना है।

राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस परियोजना का लक्ष्य राज्य में स्वदेशी रोबोटिक्स विनिर्माण को गति देना और एआई आधारित तकनीकों के विकास को रफ्तार देना है। इसके साथ ही रोबोटिक्स क्षेत्र में निवेश और अनुसंधान के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

पूरी क्षमता के साथ शुरू होने पर इस परियोजना से एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष लगभग 2,000 करोड़ रुपये का जीवीए (सकल मूल्य वर्धन) जुड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

प्रशासनिक योजना के मुताबिक प्रगति पार्क को दो अलग-अलग जोन में विकसित किया जाएगा। जोन 1 के लिए आठ एकड़ भूमि तय की गई है, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत बनने वाली स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) द्वारा विकसित और संचालित किया जाएगा। इस एसपीवी में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष 74 प्रतिशत हिस्सेदारी चयनित औद्योगिक साझेदार के पास रहेगी।

जोन 1 के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 21.1 करोड़ रुपये की इक्विटी देगा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार 30 वर्ष की अवधि के लिए 126.2 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराएगी। तय व्यवस्था के अनुसार, आठ एकड़ जमीन के लीज प्रीमियम की प्रतिपूर्ति राज्य के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के जरिए प्राधिकरण को की जाएगी।

परियोजना के जोन 2 के लिए कुल 61.52 एकड़ जमीन आरक्षित रखी गई है। इस हिस्से में निजी उद्यम औद्योगिक इकाइयां और संबंधित गतिविधियों को विकसित करने के लिए निवेश करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जोन 2 के विकास के लिए राज्य सरकार पर कोई पूंजीगत देनदारी नहीं होगी, जबकि एसपीवी को भूमि आवंटन विकास शुल्क से मिलने वाले राजस्व का 5 प्रतिशत सेवा शुल्क और लागू जीएसटी मिलेगा।

इनसे संबंधितdelhi-ncrgreater-noidaGreater NoidaRobotics ParkArtificial IntelligenceUP CabinetPRAGATI
शेयर

लेखक

टिप्पणियाँ

0

चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें। टिप्पणियाँ शिष्टता के लिए संचालित होती हैं।

आगे पढ़ें

संबंधित कवरेज

दिल्ली सरकार बना रही है नई डेटा प्रबंधन नीति, डीपीडीपी कानून का अनुपालन होगा सुनिश्चित1.7 हज़ार

दिल्ली सरकार बना रही है नई डेटा प्रबंधन नीति, डीपीडीपी कानून का अनुपालन होगा सुनिश्चित

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के कड़े अनुपालन और विभागों के बीच सुरक्षित डेटा साझाकरण के लिए विस्तृत ढांचा तैयार किया जा रहा है।

ISRO में निजीकरण को लेकर बढ़ी बेचैनी: 5,000 कर्मचारियों ने चेयरमैन वी. नारायणन को लिखा पत्र3.2 हज़ार

ISRO में निजीकरण को लेकर बढ़ी बेचैनी: 5,000 कर्मचारियों ने चेयरमैन वी. नारायणन को लिखा पत्र

ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण पर मांगी स्पष्ट नीति, कहा- एजेंसी की मूल पहचान और कर्मचारियों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा