दिल्ली सरकार बना रही है नई डेटा प्रबंधन नीति, डीपीडीपी कानून का अनुपालन होगा सुनिश्चित
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के कड़े अनुपालन और विभागों के बीच सुरक्षित डेटा साझाकरण के लिए विस्तृत ढांचा तैयार किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार अपने विभिन्न विभागों में डेटा प्रबंधन को सशक्त बनाने और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक नई नीति पर काम कर रही है। अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी कि यह नीति दिल्ली सरकार के स्तर पर डेटा के संग्रह, प्रसंस्करण, साझाकरण, संरक्षण और समग्र प्रबंधन के लिए एक साझा ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से लाई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह नीति डीपीडीपी अधिनियम 2023, डीपीडीपी नियम 2025 और राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस समिति के परामर्शों के अनुरूप तैयार की जा रही है। इसका मुख्य कार्य सभी विभागों के लिए एक अनुपालन प्रवर्तक के रूप में काम करना होगा, जिससे व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और उपयोग के नियमों का पूरी तरह पालन कराया जा सके।
इस व्यवस्था के तहत मुख्य नीतिगत निकाय के रूप में 'राज्य डेटा गवर्नेंस समिति' (एसडीजीसी) का गठन किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इस शीर्ष समिति में वित्त, योजना, शहरी विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ सचिव शामिल होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक इस समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में आयोजित की जाएगी।
विभागीय स्तर पर डेटा सेट के प्रबंधन और रूपरेखा के क्रियान्वयन के लिए 'विभागीय डेटा गवर्नेंस समितियां' (डीडीजीसी) बनाई जाएंगी, जिनका नेतृत्व संबंधित विभागाध्यक्ष करेंगे। वहीं, दिल्ली का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीओआईटी) इस पूरी नीति के लिए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा। डीओआईटी राज्य डेटा एक्सचेंज लेयर, सहमति प्रबंधन प्रणाली और केंद्रीय अनुपालन डैशबोर्ड की देखरेख करेगा।
प्रस्तावित नीति को नौ प्रमुख आधारों पर तैयार किया गया है, जिनमें गोपनीयता व सुरक्षा, कानूनी अनुपालन, एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों का प्रशासन तथा बहुभाषी शिकायत निवारण शामिल हैं। इसके अलावा डेटा की सटीकता, प्रसंस्करण की अनुमति और नागरिकों की शिकायतों को संभालने के लिए डेटा स्टूअर्ड्स की एक टीम भी तैनात की जाएगी।
अनुपालन रूपरेखा के तहत प्रत्येक विभाग को एक डीपीडीपी नोडल या शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा और डेटा मैपिंग का कार्य पूरा करना होगा। इसके माध्यम से विभाग द्वारा एकत्र किए जाने वाले व्यक्तिगत डेटा, उसके उद्देश्य, भंडारण और पहुंच की स्पष्ट पहचान की जाएगी। इसके साथ ही नियमित ऑडिट और समीक्षा तंत्र भी लागू किए जाएंगे।
अंतर-विभागीय डेटा साझाकरण को सुगम बनाने के लिए एक पृथक राज्य डेटा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव भी रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक इस प्लेटफॉर्म को एपीआई सेतु, डिजिलॉकर, एंटिटी लॉकर, नैपिक्स, भारतएक्स, एआई कोश और एनडीएपी जैसे केंद्रीय मंचों के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिसका लक्ष्य जुलाई 2027 निर्धारित किया गया है।
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