ISRO में निजीकरण को लेकर बढ़ी बेचैनी: 5,000 कर्मचारियों ने चेयरमैन वी. नारायणन को लिखा पत्र
ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण पर मांगी स्पष्ट नीति, कहा- एजेंसी की मूल पहचान और कर्मचारियों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा

असद अहमद, दिल्ली दर्पण टीवी
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में निजीकरण को लेकर कर्मचारियों की चिंता अब खुलकर सामने आ गई है। ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों, जो संगठन के करीब 5,000 कर्मचारियों (लगभग 27% कार्यबल) का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने ISRO के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग (DoS) के सचिव वी. नारायणन को पांच पन्नों का संयुक्त पत्र भेजकर अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण पर सरकार से लिखित रूप में स्पष्ट नीति की मांग की है।
4 सितंबर 2026 को भेजे गए इस पत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि निजी क्षेत्र के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के बाद यह पहला मौका है जब ISRO के कर्मचारी संगठनों ने संस्थागत स्तर पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
पवन गोयनका के बयान के बाद बढ़ी चिंता:
कर्मचारियों की चिंता का मुख्य कारण IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका का अगस्त 2026 का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में ISRO स्वयं लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह काम निजी कंपनियां या सार्वजनिक उपक्रम (PSU) करेंगे।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी नीति संबंधी जानकारी उन्हें विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से नहीं दी गई, बल्कि इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली।
अपने पत्र में कर्मचारी संगठनों ने कहा कि यदि रॉकेट निर्माण, लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य प्रमुख गतिविधियां पूरी तरह निजी क्षेत्र को सौंप दी जाती हैं, तो ISRO केवल एक सीमित अनुसंधान संस्था बनकर रह जाएगा, जिससे उसकी मूल पहचान प्रभावित होगी।

पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि करदाताओं के पैसे से विकसित तकनीक, परीक्षण सुविधाएं और लॉन्च कॉम्प्लेक्स किन कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत निजी कंपनियों को हस्तांतरित किए जा रहे हैं। कर्मचारियों ने SSLV तकनीक के HAL को हस्तांतरण तथा PSLV और LVM3 रॉकेटों के निजी संचालन की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है।
नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता:
कर्मचारियों ने संभावित नौकरियों में कटौती, भविष्य की सरकारी भर्तियों में कमी और युवा इंजीनियरों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में अवसर घटने की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि यदि स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं किए गए तो वर्तमान कर्मचारियों और भविष्य के वैज्ञानिकों दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।
निजी भागीदारी का नहीं, पारदर्शिता का मुद्दा: पत्र में कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे निजी क्षेत्र की भागीदारी या अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण के विरोधी नहीं हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि किसी भी बड़े और स्थायी बदलाव से पहले कर्मचारियों के साथ पारदर्शी संवाद किया जाए और स्पष्ट नीति सार्वजनिक की जाए।
ISRO प्रमुख ने क्या कहा?
निजीकरण को लेकर उठ रही बहस के बीच ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा है कि बढ़ती राष्ट्रीय जरूरतों को देखते हुए "केवल ISRO अकेले देश की सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता।" उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य ISRO को कमजोर करना नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार करना और वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में देश की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
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