पीएम मोदी, अमित शाह और भागवत में बढ़ा टकराव: बीजेपी के अंदरूनी घमासान से चमकेगी योगी की किस्मत ?
-जंतर-मंतर कांड और जन्मदिन कार्यक्रम से शाह की दूरी -क्या योगी आदित्यनाथ को मिलेगा फायदा ?

-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी और उसके मातृ संगठन आरएसएस के भीतर इन दिनों ज़बरदस्त अंदरूनी घमासान और शीर्ष नेतृत्व के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन के दौरान पुलिस की बर्बरता से हुई फजीहत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
जंतर-मंतर कांड और जन्मदिन कार्यक्रम से शाह की दूरी : सूत्रों और राजनीतिक गलियारों की चर्चाओं के मुताबिक, जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से सरकार बैकफुट पर आ गई। इस नाराजगी के चलते पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन पर होने वाले महीने भर के 'सेवा संकल्प अभियान' और 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम की रूपरेखा बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मिलकर तय की और गृह मंत्री से सलाह तक नहीं ली। इसी अनदेखी के चलते अमित शाह ने इन कार्यक्रमों से दूरी बना ली और यूसीसी (UCC) का राग छेड़ दिया।
मोहन भागवत का 'अहंकार' वाला बयान : दूसरी ओर, आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी बिना नाम लिए पीएम मोदी और सत्ता के केंद्रीकरण पर निशाना साधा है। भागवत ने कहा कि "जब व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है और सोचता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में होना चाहिए, तो उसे गलतफहमी हो जाती है।" संघ प्रमुख पीएम मोदी द्वारा सत्ता को व्यक्तिगत रूप से अपने तक सीमित रखने और शाह की कार्यशैली, दोनों से असहज नजर आ रहे हैं।
क्या योगी आदित्यनाथ को मिलेगा फायदा ? तीनों महाशक्तियों के इस आपसी टकराव का सीधा फायदा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव योगी के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम हैं। यदि वे चुनाव जीतते हैं, तो संघ (RSS) का एकतरफा समर्थन उन्हें मिल सकता है, जिससे वे पार्टी के भीतर और मजबूत बनकर उभरेंगे।
यूजीसी विवाद और सवर्णों का आक्रोश : प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भारी फिजूलखर्ची के संदेश और यूजीसी (UGC) नियमों में बदलाव के बाद सवर्ण समाज की नाराजगी ने बीजेपी और आरएसएस दोनों को असमंजस में डाल दिया है। यूजीसी एक्ट को लेकर उठ रहे सवालों के कारण जैन मुनि के विरोध तक का सामना करना पड़ा है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी और संघ की इन शीर्ष महाशक्तियों का यह टकराव पार्टी को किस मोड़ पर ले जाता है।
लेखक



टिप्पणियाँ
0