मतदाता सूची में कथित विसंगतियों पर दिल्ली में विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी की अगुवाई में रामलीला मैदान तक निकाले गए मार्च में हजारों लोग शामिल हुए, भाजपा ने इसे देश को अराजकता में धकेलने की साजिश बताया।

मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी दलों ने रविवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में विशाल विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों से केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
विपक्षी दलों ने दावा किया है कि इस संशोधन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस कदम से मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाता असंगत रूप से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का समर्थक नहीं माना जाता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी पार्टी का पक्ष लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम गलती से सूची से कट गए हैं, वे दोबारा अपना पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं भाजपा ने विपक्षी दलों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैध चुनावी प्रक्रियाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि देश में अगले आम चुनाव वर्ष 2029 में होने हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस विरोध प्रदर्शन को एक सुनियोजित ड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में जो कुछ हो रहा है वह लोकतंत्र का सम्मान नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के नाम पर देश को अराजकता की ओर धकेलने की सोची-समझी साजिश है।
प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने राजधानी में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए थे और कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू किया था। प्रदर्शनकारी मध्य दिल्ली से रामलीला मैदान की ओर बढ़े, जहां बड़ी संख्या में लाठी-ढाल से लैस पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए थे। मार्च के दौरान विपक्षी नेता खुली जीप में सवार थे, जबकि समर्थक राष्ट्रीय ध्वज और पार्टी के झंडे लहराते हुए चल रहे थे।
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दो सहयोगियों द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण, पंजीकरण नियमों और डिजिटल प्रणालियों पर सवाल उठाए जाने के बाद से यह विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद से ही विपक्षी पार्टियां, छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी सितंबर के अंत से लगभग रोजाना प्रदर्शन कर कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रदर्शनों और विपक्ष के एकजुट होते रुख ने वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से उनके सामने अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
लेखक



टिप्पणियाँ
0