घोंडा विधानसभा में लोकतंत्र, सुशासन और सामाजिक जागरूकता पर मंथन, बौद्धिक सम्मेलन में जुटे प्रबुद्ध नागरिक
नई दिल्ली के घोंडा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ" विषयक बौद्धिक सम्मेलन एवं प्रमुख नागरिक गोष्ठी में विधायक अजय महावर, भाजपा प्रवक्ता अनिल गुप्ता सहित कई गणमान्य लोगों ने लोकतंत्र, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी पर अपने विचार रखे।

- दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली की घोंडा विधानसभा में आयोजित "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ" विषयक बौद्धिक सम्मेलन एवं प्रमुख नागरिक गोष्ठी में लोकतंत्र, सुशासन और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक एवं सार्थक विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
जनप्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का किया आह्वान
कार्यक्रम में घोंडा विधानसभा के विधायक अजय महावर तथा भाजपा दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता अनिल गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की मजबूती, सुशासन, जनभागीदारी, राष्ट्रहित तथा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक नागरिक जागरूक होकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाए।

इस अवसर पर भाजपा उत्तर-पूर्वी जिला अध्यक्ष डॉ. यू.के. चौधरी, दिल्ली प्रदेश किसान मोर्चा प्रभारी राजकुमार बल्लान, पूर्व जिला अध्यक्ष पूनम चौहान, पूर्व विधायक श्रीदत्त शर्मा तथा कार्यक्रम संयोजक भुवनेश सिंघल सहित समाज के अनेक वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे।
सामाजिक समरसता और जन-जागरूकता पर हुआ व्यापक मंथन
गोष्ठी के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक समरसता, नागरिक सहभागिता और वर्तमान सामाजिक एवं राष्ट्रीय चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों से सकारात्मक भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उपस्थित नागरिकों ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए संवाद को और अधिक सार्थक बनाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन भुवनेश सिंघल द्वारा किया गया। अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों ने ऐसे बौद्धिक संवादों को समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण, लोकतांत्रिक चेतना के विस्तार और जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं समय की आवश्यकता बताया।
लेखक

टिप्पणियाँ
0