फर्जी DTU एडमिशन रैकेट का भंडाफोड़: 8.5 लाख की ठगी मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार, दो भोपाल से दबोचे
दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने DTU में एडमिशन दिलाने के नाम पर 8.5 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। तीन आरोपी गिरफ्तार, दो भोपाल से पकड़े गए।

- राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में दाखिला दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जी एडमिशन रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें खुद को DTU का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगने वाला कथित मास्टरमाइंड भी शामिल है। वहीं दो फरार आरोपियों को मध्य प्रदेश के भोपाल से तकनीकी निगरानी के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई शाहबाद डेयरी थाने में दर्ज FIR संख्या 560/2026 के तहत की गई। शिकायतकर्ता डॉ. कृतिका जोशी ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का DTU में एडमिशन कराने का झांसा देकर करीब 8.50 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए संपर्क कर खुद को विश्वविद्यालय से जुड़ा बताते हुए एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया और कई किश्तों में पैसे ऐंठ लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आउटर नॉर्थ जिले के डीसीपी शोभित डी. सक्सेना के निर्देश पर एसीपी बवाना गौरव सिंह की निगरानी और शाहबाद डेयरी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। टीम में एसआई घनश्याम, हेड कांस्टेबल राजेश मलिक और हेड कांस्टेबल प्रदीप अत्री शामिल थे।

जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी निगरानी के आधार पर मुख्य आरोपी यशराज बाजपेयी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपने दो साथियों सोनू उर्फ युवराज और देवेंद्र सिंह के नाम बताए, जो घटना के बाद फरार हो गए थे। पुलिस ने लगातार तकनीकी निगरानी और जांच के बाद दोनों की लोकेशन भोपाल में ट्रेस की और 26 अक्टूबर 2026 को वहां से गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को दिल्ली लाकर पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी - यशराज बाजपेयी, निवासी शहीद विहार, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) - सोनू उर्फ युवराज, निवासी पुणे (महाराष्ट्र), उम्र 32 वर्ष - देवेंद्र सिंह, निवासी गोमती नगर, लखनऊ (उत्तर प्रदेश), उम्र 30 वर्ष
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को DTU का अधिकारी या कर्मचारी बताकर छात्रों और उनके अभिभावकों को एडमिशन दिलाने का झूठा भरोसा देते थे। इसके बाद विभिन्न खातों में पैसे ट्रांसफर कराकर उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे। दिल्ली पुलिस अब इस पूरे रैकेट के नेटवर्क, ठगी की रकम के लेन-देन, अन्य संभावित पीड़ितों और इसमें शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
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