प्रदूषण पाबंदियों के पहले दिन दिल्ली की सीमाओं पर लगा भीषण जाम, 198 दिनों में सबसे खराब स्तर पर पहुंचा एक्यूआई
राजधानी में नए प्रदूषण रोधी नियमों के तहत वाहनों की सघन जांच के चलते सीमाओं पर लंबा जाम लगा, वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक गिरकर 'खराब' श्रेणी में दर्ज हुआ।

राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए लागू नए प्रतिबंधों के पहले दिन रविवार को दिल्ली की सीमाओं पर भीषण ट्रैफिक जाम देखने को मिला। इसके साथ ही दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बिगड़कर 261 पर पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे खराब स्तर और पिछले 198 दिनों में सर्वाधिक है। इससे पहले 17 अप्रैल को एक्यूआई 263 दर्ज किया गया था, जबकि 12 जुलाई को भी यह 261 रहा था।
दिल्ली परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा गैर-अनुपालन वाले वाहनों की जांच शुरू किए जाने के बाद दिल्ली-गुरुग्राम और दिल्ली-नोएडा सीमा सहित प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एमसीडी टोल बूथों पर चालकों को घंटों रेंग-रेंग कर चलना पड़ा। परिवहन विभाग ने 13 प्रमुख टोल प्लाजा पर लगभग 250 प्रवर्तन कर्मियों की 39 टीमें तैनात की हैं, जो स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों की मदद से गैर-पंजीकृत और पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों पर नजर रख रही हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शहर के 57 निगरानी केंद्रों में से 22 केंद्रों पर हवा 'बेहद खराब' और 21 पर 'खराब' श्रेणी में रही, जबकि केवल 14 केंद्रों पर मध्यम हवा दर्ज हुई। जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 378 एक्यूआई दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी के करीब है। दिल्ली की आबोहवा में मुख्य प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 रहा।
सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-चार और उससे पुराने वाहनों पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा एक नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक रहेगी, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक छूट वाली श्रेणियों को छोड़कर पूर्ण निर्माण प्रतिबंध रहेगा। सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है तथा सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से काम करना अनिवार्य किया गया है।
सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटाने के लिए नगर निगम और दिल्ली सरकार के कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के अनुमान के मुताबिक, रविवार को दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत और पराली जलाने की 18.5 प्रतिशत रही। इसके अतिरिक्त पड़ोसी जिले झज्जर से 9.2 प्रतिशत और गुरुग्राम से 4.8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई।
सीमाओं पर घंटों फंसे यात्रियों ने सोशल मीडिया पर भारी जाम को लेकर नाराजगी जाहिर की और इन कदमों के वास्तविक असर पर सवाल उठाए। एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'खराब' से 'बेहद खराब' श्रेणी में ही बने रहने की संभावना है।
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